Saturday, November 25, 2017
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योग गुरू बाबा रामदेव ने मई 2010 में पत्रकारों से हुई वार्ता में कहा था कि 500 और 1000 के नोटों को बंद करने से देश में जमा काला धन बाहर आ जाएगा। लेकिन उस समय इस सुझाव को वास्तविकता से बहुत दूर का माना गया और उस समय की मौजूदा सरकार इतना बड़ा कदम उठाने की हिम्मत नहीं कर सकी। मोरारजी देसाई के बाद नरेंद्र मोदी दूसरे प्रधानमंत्री हैं जिन्होने यह साहसिक कदम उठाने की हिम्मत दिखाई। इसके पहले 1978 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय मोराराजी देसाई ने 1000, 5000, 10000 के नोट बंद कर दिए थे।1000 के नोट कई साल बाद पुनः प्रचलन में आए।


आज 500, 1000 के नोट प्रत्येक स्तर के लोग के पास होते हैं। 1978 में बड़े नोट कुछ ही लोगों के पास होते थे इसलिए सभी स्तरों के लोगों पर इसका आज जैसा व्यापक असर नहीं हुआ। लेकिन जिस उद्देश्य से उस समय यह फैसला किया गया था बहुत हद तक कारगर रहा।सरकार के इस फैसले से देश के लोगों को कुछ असुविधा, तकलीफ जरूर उठानी पड़ रही है लेकिन जब हमारे घर में कोई बीमार हो जाता है तो हमें उसे रोग मुक्त कराने के लिए तकलीफ उठानी पड़ती है। ठीक उसी तरह आज हमारा देश भ्रष्टाचार रूपी रोग से ग्रस्त है और सभी भारतवासियों का सबसे बड़ा पहचान हमारा देश भारतवर्ष को इस रोग से मुक्त कराने के लिए हमें कुछ तकलीफ तो उठानी ही पड़ेगी।
फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने कहा कि जिस प्रकार जवान बार्डर पर अनेक कष्ट सहकर देश की रक्षा करता है उसी तरह क्या अपने देश के लिए हम कुछ तकलीफ नहीं सह सकते। मैनें समाज के करीब करीब सभी वर्गों से नोटबंदी पर बात की और उनसे प्रतिक्रिया मांगी। मुझे ज्यादातर प्रतिक्रिया सकारात्मक मिली। ज्यादातर लोगों का मानना था कि अच्छे दिन आने वाले हैं।
समाज सेविका और भाजपा की महापौर प्रत्याशी इलाहाबाद निवासी आरती भट्टाचार्या का कहना है कि मोदी जी का यह कदम सरहानीय है। उनके अनुसार आज लोगों को परेशानी अवश्य झेलनी पड़ रही है परंतु यह उन्ही की बेहतरी के लिए किया गया है। जब उनसे पूछा कि कालाधन समाप्त होने पर क्या होगा तो उन्होनें कहा कि अपराध कम हो जाएंेगे और समाज में समानता आएगी। कोई बहुत अमीर और कोई बहुत गरीब नहीं होगा जैसे कि आज किसी अच्छे स्कूल में अमीर अपने बच्चे का एडमिशन डोनेशन देकर आसानी से करवा लेते हैं और गरीब चाहकर भी अपने होनहार बच्चे को अच्छे स्कूल में नहीं डाल सकता है। उसे अपना मन मारना पड़ता है। अब अमीर के पास डोनेशन देने के लिए पैसे भी नही होंगे और स्कूल चाहकर भी पैसे नहीं ले पाएगा तो समाज में समानता तो आएगी ही।
मुंबई निवासी वरिष्ठ पत्रकार एनण्केण्घोषाल ;सीनियर सिटिजनद्ध का कहना है कि मोदी ने बहुत साहसिक कदम उठाया है। इसका अच्छा परिणाम अवश्य सामने आएगा। उन्होने 1978 में नोटबंदी का असर भी देखा है। उन्होने कहा कि उस समय जन साधारण के पास इतने बड़े नोट नहीं होते थे, इसका सबसे बड़ा कारण है उस समय लोगों की सैलरी आज की तुलना में बहुत कम होती थी। आज की परिथिति को समझाने के लिए उन्होने एक उदाहरण दिया दृ जब एक सड़क बनती है तो लोगों को कुछ दिनों तक बहुत परेशानी होती है पर जब सड़क बन जाती है तो उस पर सफर करने का अपना ही मजा है, आज भी ऐसी ही परिस्थिति है लोगों को कुछ दिन परेशान अवश्य होना पड़ेगा पर बाद में सब सही होगा । उनके ही शब्दों में दृ अच्छे दिन आने वाले हैं और उसकी शुरूआत डंके की चोट पर हुई है।
दिल्ली निवासी वरिष्ठ पतं्रकार गोपाल रंजन ;सीनियर सिटिजनद्ध के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अच्छा कदम उठाया है। इससे जनता को काफी तकलीफ हो रही है पर इसे हमें बर्दाश्त करना होगा क्योंकि बिना कुछ खोए कुछ मिलता नहीं है। उन्होनें कहा कि जिस दिन से नोटबंदी की घोषणा हुई है उसी दिन से कश्मीर में पत्थरबाजी बंद हो गई है, पत्थर बाजी करने वालों को देने के लिए पैसे ही नहीं हैं तो शुरूआत अच्छी हुई न।
जगत तारन गोल्डन जुबली स्कूल इलाहाबाद की पूर्व प्रिंसिपल देविका देब ;सीनियर सिटिजनद्ध ने कहा कि स्वतंत्रता पाने के लिए हजारों प्राणों का बलिदान देना पड़ा। भारतीयों को भारी तकलीफ झेलनी पड़ी। इतनी शहादतों की बदौलत आज हम स्वतंत्र देश में सांस लेते हैं और स्वंय को स्वाधीन भारत का नागरिक कहते हुए गर्व महसूस करते हैं। उसी तरह भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए हमें कुछ तो तकलीफ उठानी ही पड़ेगी। मोदी जी ने बहुत बड़ा कदम उठाया है। देविका जी ने भी कहा कि कश्मीर में पत्थरबाजी बंद हो गई है।
इलाहाबाद निवासी बिजनेसमैन बरकत अली ;सीनियर सिटिजनद्ध का कहना है कि मोदी जी ने बहुत बोल्ड स्टेप लिया है। ऐसा स्टेप मोदी जी ही ले सकते हैं। उनके अनुसार अगर इस कदम से काला धन खत्म हो जाता है तो कुछ दिनों की तकलीफ झेलने के लिए वह तैयार हैं।
इलाहाबाद निवासी नौकरी पेशा हरीश चन्द्र त्रिपाठी के अनुसार वह पूर्ण रूप से इस फैसले का समर्थन करते हैं। सुनहरे भविष्य के लिए थोड़ी सी परेशानी झेलने में उन्हें कोई तकलीफ नहीं है।
इलाहाबाद निवासी कावेरी घोष एक गृहिणी हैं। वह अर्थराइटीज की मरीज हैं। जोड़ों के दर्द के साथ घंटों लाईन में लगकर उन्होने नोट बदलवाए परंतु वह इस फैसले के खिलाफ नहीं हैं। उनके अनुसार इसके पहले भी हम लोग राम राज्य में वास नहीं कर रहे थे, न की आज करते हैं और ऐसा भी नहीं है कि अगर मोदी जी का यह फैसला गलत सिद्ध हुआ तो हम रावण की लंका में पहुंच जाएंगे। यदि मोदी जी के फैसले से वाकई में कालाधन खत्म हो जाएगा तो कुछ दिन की तकलीफ उठाई जा सकती है।
दवा विक्रेता इंदर पाल सिंह का कहना है कि काला धन समाप्त होना जरूरी है इसलिए काला धन समाप्त करने का फैसला तो अच्छा है लेकिन मोदी जी के इस तरीके को वह सही नहीं मानते। उन्होने कहा कि एक तो सरकार को और तैयारियां कर लेनी चाहिए र्थी आैर एक सवाल पूछा कि 2000 के नए नोट आ जाने के बाद कालाधन समाप्त कैसे होगा , भविष्य में तो 2000 के नोटों में ही कालाधन जमा हो जाएगा।
नाम न बताने की शर्त पर अवकाश प्राप्त बैंक कर्मी ने कहा कि लोगों की परेशानी को देखते हुए वह मोदी के इस फैसले का समर्थन नहीं करते। उनके अनुसार कहा जा रहा है कि बाद में फायदा होगा लेकिन भविष्य किसने देखा है। जब उनसे पूछा गया कि यदि वह आज बैंक में काम कर रहे होते तो यदि बैंक यूनियन विरोध करती तो वह उनके साथ खड़े होते तो उन्होने कहा कि ऐसी परिस्थिति में वह यूनियन का साथ देते।
एक और अवकाश प्राप्त बैंक कर्मी इलाहाबाद निवासी अनूप चैटर्जी का कहना है कि यह कदम बहुत सही है। वह नरेंद्र मोदी के साथ हैं। उनसे पूछने पर उन्होने बताया कि उनके साथी बैंक कर्मी जो कार्यरत हैं वह सभी मोदी के साथ हैं हां , उनके ऊपर काम का दबाव है पर फिर भी वह पीछे हटने की नहीं सोच रहे हैं। उनके अनुसार बैंकों कर्मियों में देश भक्ति का माहौल है। ऐसी चर्चा चल रही है कि अवकाश प्राप्त कर्मियों से काम कराया जाएगा। इस विषय पर उन्होने कहा कि उनके साथ ऐसा हुआ तो वह बहुत खुश हांेगे।
बिजनेसमैन अभिजीत राॅय मोदी के फैसले को ऐतिहासिक बताते हैं।वह भी पूरह तरह मोदी के साथ हैं। उन्होने तो यह भी कहा कि मन मोहन सिंह एक अर्थशास्त्री है, आर बी आई गर्वनर रह चुके हैं फिर भी वह ऐसा करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। ऐसा मोदी ही कर सकते हैं।
एक युवती मिनी विश्वास अपनी मां के साथ रहती है। वह घूम घूमकर एटीएम से पैसा भी निकालकर लाई है। बैंक से भी पैसे बदलवाए। परेशानियों का सामना उसे भी करना पड़ा।लेकिन उसका कहना है कि आने वाले अच्छे दिनों के सामने यह परेशानी कुछ भी नहीं।
इलाहाबाद में यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्र विकास कुमार का कहना है कि मोदी जी का कदम सराहनीय है।वह इसका समर्थन करते है।आठ दिन से एटीएम का चक्कर काटकर भी उसे पैसे नहीं मिले फिर भी वह कह रहे हंै कि सुनहरे भविष्य के लिए यह परेशानी झेली जा सकती है ,इसमें उन्हें कोई प्राब्लेम नहीं है। उसके साथी छात्रों में 70 से 80ः का यही मानना है।
लखनऊ में बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र आकाश जायसवाल का भी यही मानना है। उसके साथी छात्र भी ऐसा ही सोचते हैं।
मैनें समाज के सभी स्तर के लोगों के विचार जानें। अधिकांश का ही यही सोचना है कि कुछ दिन परेशानी झेलने के बाद अच्छे परिणाम आ सकते हैं। जब भी सरकार देश हित के मामले में कोई कदम उठाती है तो कुछ लोग सरकार का साथ देते हैं तो कुछ सरकार के फैसले का विरोध करते हैं। पर इस बार ज्यादातर लोग सरकार के साथ खड़े दिख रहे हैं।
कुछ लोगों का कहना है खासकर विपक्ष का कि सरकार ने पूरी तैयारी के बिना ही नोटबंदी का फैसला ले लिया। अगर सरकार पूरी तैयारी करने जाती तो यह फैसला लीक हो जाता फिर तो यह फैसला बेमतलब हो जाता। हम आशा करते हैं कि इस फैसले से बाद में अच्छे परिणाम निकलेंगे परंतु आज स्थिति बेहद जटिल है। इसे अपने फायदे के लिए और भी जटिल बना रहे हैं कुछ लोग। जहां चेक लिया जा सकता है वहां भी चेक नहीं लिया जा रहा है। पुराने नोटों में पेमेंट लेकर यदि कोई अपने अकाउंट में जमा कर दे तो नोट अपने आप ही बदल जाएंगे लेकिन इसके लिए पूरी कमाई डिक्लेयर्ड होनी चाहिए। बहुत लोग आज मकान का किराया न दे पाने के कारण मुसीबत में हैं। अगर मकान मालिक थोड़ा सहयोग करें तो स्थिति आसान हो सकती है। इस मामले में मैं बहुत भाग्यशाली हूं।मैं किराए के मकान में रहती हूं और मेरे मकान मालिक ने कहा है कि पुराने नोटों में वह किराया ले लेंगे और अपने अकाउंट में जमा कर देंगे। मुझे किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। सरकार जो भी सुविधा दे रही है उसका भी दुरूपयोग हो रहा है जैसे कि 4500 के लिमिट को घटाकर 2000 कर दिया गया। दुरूपयोग कुछ लोग करते हैं लेकिन तकलीफ सबको भुगतनी पड़ती है।
मीडिया का काम सच्चाई को उजागर करना तो है ही, लेकिन सिर्फ परेशानी नहीं दोनों पक्ष दिखाना चाहिए।मीडिया का काम सनसनी पैदा करना कतई नहीं है। न्यूज चैनेल में लोगों से पूछ ताछ की जा रही है लेकिन कब , जब लोग दो तीन घंटा लाईन में खड़े होकर परेशान हो चुके हों तब। ऐसे में किसी भी व्यक्ति की प्रतिक्रिया सकारात्मक नहीं हो सकती। उस समय लोग गुस्से से भरे होते हैं। इन लोगों से ही अगर घर में शांति के साथ पूछा जाए तो इनका जवाब अलग होगा।
कुछ लोग कोशिश कर रहे हैं कि अपने पहचान वालों के खाते में कुछ दिनों के लिए अपना काला धन जमा करा दें।इसमें आम आदमी से लेकर नेता तक शामिल हैं। यह लोग काफी हद तक सफल भी हो रहे हैं। लेकिन इतने बड़े ऐतिहासिक फैसले में छोटी मोटी अड़चनंे ंतो आएंगी ही। उससें हमें घबराना नहीं चाहिए। ऐसे लोगों को रास्ते पर लाने के लिए सरकार कोई न कोई रास्ता अवश्य निकालेगी। इस संदर्भ में डेन नेटवर्क के कर्मचारी विनय कुमार राॅय ने कहा कि कोई भी बड़़ा काम करने में थोड़ी बहुत मुश्किल तो आती ही है। उन्होने कहा कि हमें तो पूरे सिस्टम को बदलना है। उनका एक उदाहरण. जब हम घर का रिनोवेशन करवाते हैं तो हमें कुछ दिन बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है परंतु बाद में हम आराम से रह सकते हैं।
मेरे घर में काम करने वाली लड़की भी इस मामले में सरकार को कोसती नहीं है। वह भी कह रही थी की काले धन को तो खत्म करना ही है । इसके लिए कुछ दिन तकलीफ झेल लेंगे। उसने कहा कि उसके पास जो पुराने नोट हैं उसे वह अपने खाते में जमा कर देगी।
इससे एक फायदा तो यह हुआ कि भारी मात्रा में कर और बिल जमा हो रहे हैं। घाटे में चल रहे कई नगर निगम और बिजली विभाग के पास काफी पैसा आ गया है। नोटबंदी के सभी पहलुओं पर विचार करने से लगता है कि काले धन से मुक्ति चाहिए यह आम जनता की आवाज है । आज सभी वर्गांे में जागरूकता आ गई है, उसे बहलाना आसान नहीं है। हजार तकलीफ सहने के बाद भी वह लोग मोदी का साथ दे रहे हैं और उनकी आंखें ने भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखना प्रारम्भ कर दिया है। जिस देश की जनता इतनी संवेदनशील है और इतनी तकलीफ सहने के बाद भी सरकार के फैसले का स्वागत कर रही है उस देश का भविष्य उज्जवल तो होगा ही। आइए एक स्वर में बोलें भारत माता की जय।

Comments 

 
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