Saturday, November 25, 2017
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diwali pataka

दिपावली  को रोशनी का त्यौहार कहते हैं। पर आजकल दिपावली पटाखे का त्यौहार हो गया है। हाउसवार्इफ का फर्ज है कि दिपावली को पटाखे के त्यौहार से पुन: रोशनी का त्यौहार बनाए। हाउसवार्इफ यानि मां , पत्नी ही ऐसा कर सकती है। वह चाहें तो दिपावली को पटाखे से जोड़कर प्रकाश से जोड़ें। इस बार की दिपावली को आनंदमय और यादगार बनाएं।

आजकल के बच्चे यही जानते हैं कि दिपावली का अर्थ सिर्फ पटाखे चलाना है। आज के सामाजिक परिसिथति और प्रदूषण को ध्यान में रखकर अगर प्रत्येक घर में मां बच्चों को  बचपन से ही दिपावली का सही अर्थ समझाएं तो दिपावली सच में आनंद और रोशनी का त्यौहार बन जाएगी। दिपावली शब्द दीप से जुड़ता है पटाखों से नहीं।

दिपावली में पटाखे चलाना रस्म होता है इसलिए थोड़ा सा तो लाना ही पड़ेगा। कम मात्रा में रोशनी वाले पटाखे लाएं जैसे फुलझड़ी , चरखी , अनार। लेकिन याद रखें पटाखे केवल रस्म निभाने के लिए लाएं। इस बदलाव के लिए बच्चों को मनाना बहुत मुशिकल है और यह काम सिर्फ मां ही कर सकती है।

diwali shoping

दिपावली के पहले घर की साफ सफार्इ तो आप कर ही लेंगी लेकिन घर सजाने में बच्चों की मदद लें। सिर्फ माता पिता अपने पसंद से घर को सजाएं बलिक बच्चों से राय लें।उन्हें भी अपने पसंद का करने दें , चाहे आपको अपनी पसंद के साथ थोड़ा समझौता ही क्यों करना पड़े। बच्चों को घर की सजावट में इस तरह उलझाएं कि उनका दिमाग पटाखों से हट जाए। दिपावली के शापिंग के लिए बच्चों को साथ ले जाएं और अपने बजट के अंदर बच्चों की पसंद को ध्यान में रखकर उनके कपड़े खरीदें।अपने  और अपने पति के कपड़े बजट के अंदर दो तीन जोड़ी पसंद कर लें और फार्इनल बच्चों से करवाएं। उन्हें थोड़ी बहुत अहमियत दें। दूसरे चीजों की शापिंग में भी इस तरह बच्चों को शामिल करें कि उन्हें भी थोड़ी बहुत अहमियत दी जा रही है। चालाकी से अपनी पसंद को ही उनसे पसंद करवाएं।

घर में झालर - माला इत्यादि लगाने में बच्चों की मदद लें ,रंगोली बेटी से बनवाएं। अगर उसे रंगोली बनाना ठीक से नहीं आता हो तो घर के मुख्य द्वार की रंगोली स्वयं बनाएं और घर के भीतर के कमरे की रंगोली बेटी से बनवाएं। एक दो साल में वह अच्छी रंगोली बनाना सीख जाएगी। दिया लगाते समय बच्चों को साथ में लें। उन्हें भी जलता दिया लगाने दें परंतु स्वयं उनके साथ रहें जिससे कि कोर्इ हादसा हो। बेटी अगर थोड़ी बड़ी हो तो दिपावली के पकवान बनाते समय उसे भी साथ लें। कुछ उसके मन का भी बनाएं और कुछ उसे आसान पारंपरिक पकवान सिखाएं। इससे उसका भी दिल लगा रहेगा और आपको भी मदद मिलेगी।

दिपावली रोशनी का त्यौहार है और रोशनी सकारात्मकता का प्रतीक है। जहां तक हो सके दियों से घर को सजाएं बल्ब से नहीं। दिये की रोशनी में कीड़े मर जाते हैं और बल्ब की रोशनी से कीड़े बढ़ जाते हैं। बच्चों को यह समझाना पड़ेगा कि पटाखे कितने हानिकारक है। स्वयं भी इसे समझें और पटाखों का मोह त्याग दें। पटाखों से पर्यावरण को बहुत हानि पहुंचती है।

दिपावली में घर को इस तरह सजाएं कि वह सबसे अलग दिखे। बच्चों को अच्छी तरह तैयार करें। स्वयं भी सलीके से तैयार हों। अच्छा अच्छा पकवान बनाकर सबको खिलाएं। घर में खूब खुशी मनाएं। दिपावली का दूसरा नाम पटाखा बनने दें। बच्चों और घरवालों को इस खुशी में इस कदर उलझाएं कि उन्हें पटाखे चलाने का मन भी हो। तभी तो मनेगी आनंदमय रोशनी वाली दिपावली और इस तरह की सुंदर दिपावली मनाने का सारा श्रेय आपको मिलेगा।

Comments 

 
#1 kaverii 2013-11-03 17:15
darun lekha hoyeche tobe amra sikhle bachcha der sekhate arbo noile jamonti dekhbe tamoti sikhbe .
stike
r na kine alona dile kamon hoi? community fireworks er idea bastobaito hote arbe ki kono din?
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