Friday, November 24, 2017
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tarla dalaal

भोजन बनाना भारतीय महिलाओं का डेली रूटीन है। ज्यादातर महिलाओं के लिए यह बोझ बन जाता है। घर वाले भी महिलाओं के खाना बनाने को कोर्इ अहमियत नहीं देते। तरला दलाल भारत की पहली महिला सेलिबि्रटी शेफ थीं जिन्होने  खाना बनाने को पाक कला में परिवर्तित किया।

सन 1936 में तरला का जन्म पुणे में हुआ था। उनका पालन पोषण पुणे में ही हुआ। 1960 में उन्होने नवीन दलाल से विवाह किया और तरला दलाल मुंबर्इ आ गर्इं। 1966  में उन्होने घर से ही कुकिंग क्लास प्रारंभ किया और यह उनके पहले कुक बुक का आधार बना। 1974 में उनका पहला कुक बुक द प्लेजर आफ वेजिटेरियन कुकिंग निकला। यह उनके जीवन की बहुत बड़ी सफलता थी। यह कुकरी बुक्स में क्लासिक्स बन गया एवं इसकी 1,50,000 कापी बिकी। उन्होने सौ से अधिक किताबें लिखी हैं और तीन मिलीयन से अधिक किताबें बिकी हैं। उनकी किताबों का अनुवाद हिंदी , गुजराती , मराठी , बंगाली , डच एवं रूसी भाषा में हुआ।

उन्होने कर्इ कुकिंग शो भी होस्ट किये जिनमें सोनी टीवी पर आने वाला शो कुक इट अप विद तरला दलाल बेहद लोकप्रिय रहा। उनके कुकिंग शो भारत के अलावा दक्षिण पूर्वी एशियागल्फ देश , युनार्इटेड किंगडम और अमरीका में प्रसारित हुआ। सन 2007 में उन्होने टोटल हेल्थ सिरीज नाम से कुक बुक सिरीज प्रारंभ की थी। उनके रेडी टू मिक्स बेहद लोकप्रिय हैं। इंटरनेट पर भी तरला दलाल छार्इ हैं। उनकी वेबसार्इट भारतीय व्यंजनों की सबसे बड़ी वेबसार्इट है।

उन्होने भारतीय व्यंजनों में महारत हासिल की , खासकर गुजराती व्यंजनों में। 2005 में इंडियन मर्चेंटस चेम्बर की ओर से उन्हें वुमेन आफ द र्इयर का पुरस्कार दिया गया। 2007 में भारत सरकार ने उन्हें पदम श्री से नवाजा। तरला दलाल के पति का निधन 2005 में हुआ। उनके तीन बच्चे हैं। वह दक्षिण मुंबर्इ में नेपियन सी रोड सिथत  एपार्टमेंट में रहती थीं। 77 वर्ष की आयु में 6 नवंबर 2013, बुधवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हुर्इ। उन्होने 17,000 व्यंजनों की सृषिट की है।

भारतीय गृहिणियों को किचेन में गर्व से सर उंचा करके कुकिंग करना तरला दलाल ने ही सिखाया है। महिलाएं साधारणत: किचेन में काम करने से, खाना बनाने से स्वयं को छोटा महसूस करती हैं। अगर आप अपने काम को छोटा समझें तो घरवाले और दुनिया वाले तो आपको छोटा समझेंगे ही। तरला दलाल भी एक गृहिणी , पत्नी और तीन बच्चों की मां थीं। पर उन्होने कुकिंग के माध्यम से अपने आपको केवल भारत में ही नहीं दुनिया में भी पहचान दिलार्इ इसलिए कुकिंग को छोटा काम न समझें। तरला जी से प्रेरणा लेकर कुकिंग को इस स्तर पर पहुंचाएं कि दुनिया या पूरे भारत में न हो कम से कम अपने परिवार और दोस्तों में अपनी गुड कुक के रूप में पहचान बनाएं। महंगार्इ के इस जमाने में आप कुकिंग को अपने रोजगार का माध्यम बना सकती हैं।

मैंने तरला दलाल से बहुत कुछ सीखा है जैसे डिनर या लंच पर खाना कुछ खास न बना हो तो एक अच्छी सी स्वीट डिश बना लें। स्वीट डिश के आकर्षण में परिवार वाले खुशी खुशी खाना खा लेंगे। सोनी टीवी पर आने वाले कुकरी शो कुक इट अप विहद तरला दलाल में उन्होने सिखाया था कि भुटटे के दाने का पेस्ट बनाने के लिए उसका दाना निकालकर पीसने के बजाए भुटटे को कददूकस कर लें। बहुत अच्छा पेस्ट बहुत जल्दी बन जाता है। उस दिन उन्होने जो रेसिपी सिखाया था उसे तो मैनें बनाया ही , अपने परिवार के स्वाद को ध्यान में रखते हुए कददूकस किए हुए भुटटे से कर्इ और व्यंजन बनाएं। जो परिवार वालों के अलावा दोस्तों को भी बहुत पसंद आए। मैं आज भी इसी तरह भुटटे का पेस्ट बनाती हूं। हम गृहिणियों को कुकिंग को आसान और स्वादिष्ट बनाने वाले टिप्स अपनाने चाहिए। तरला दलाल के स्वीट डिश वाले सुझाव से मेरे दिमाग में एक दूसरा आइडिया आया। एक दिन कुछ खास सब्जी नहीं बनी थी और स्वीट डिश बनाने लायक घर में कुछ नहीं था तो मैनें रोटी बनाने की जगह पूरी तल दी और टमाटर की मीठी चटनी बना दी। उस दिन का डिनर स्पेशल बन गया।  मैं उनसे प्रेरणा लेकर बहुत कुछ करती हूं। खाने में वेरार्इटी तो मैं कर लेती हूं पर हां कुकिंग से रोजगार नहीं कर पार्इ। मैं छोटे शहरों में ही रही हूं और उस जमाने में छोटे शहरों में कुकिंग रोजगार का जरिया नहीं बन सकती थी। परंतु आज सिथतियां बदल गर्इ हैं।

हमारे देश में बहुत लड़कियां घर गृहस्थी के अलावा रोजगार करना चाहती है। पर कुछ को मौका नहीं मिलता। पढ़ार्इ समाप्त होने के साथ ही उनकी शादी कर दी जाती है। उन्हें कहा जाता है कि लड़की हो चूल्हा चौका करो, रोजगार घर के मर्द करेंगे। पर यह गलत है। लड़की अगर कुछ पैसा कमाए तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और तब परिवार वाले भी उसका सम्मान करते हैं। जल्दी शादी हो जाने की सिथति में आप चूल्हा चौका को ही रोजगार का माध्यम बनाएं क्योंकि घर छोड़कर नौकरी करने जाना सबके लिए संभव नहीं हो पाता है। कुकिंग के विस्तारित ज्ञान के लिए टीवी पर कुकरी शो देखें , कुक बुक पढ़ें , इंटरनेट की मदद लें , घर में बुजुर्ग महिलाओं से पारंपरिक और परिवार के खास व्यंजन सीखें , चाहें तो शुरूआत में कुकिंग क्लास भी ज्वार्इन कर सकती हैं। कम से कम पांच साल कुकिंग का ज्ञान बढ़ाने में लगेगा। इसके बाद आप स्वयं कुकिंग क्लास घर पर ही शुरू कर सकती हैं , शुरूआत में छोटे छोटे पार्टी या गेट टू गेदर का आर्डर लें। कौन जाने ऐसा करते करते आपका अपना बड़ा केटरिंग बिजनेस चालू हो सकता है।आप स्वयं आफिस जाकर रोजगार न कर पाएं लेकिन दूसरों को नौकरी दे सकती हैं। तरला दलाल से प्रेरणा लें और दिखा दें कि चूल्हा चौका से आप कहां पहुंच सकती हैं।

 

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