Saturday, November 25, 2017
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winter season starts

जम्मू कश्मीर में बर्फ बारी के साथ ही उत्तर भारत में ठंड ने पैर पसारना प्रारंभ कर दिया है। हम सभी ठंड से बचने के उपाए कर रहे हैं। कोहरे की संभावना को देखते हुए रेलवे ने भी पुख्ता इंतजाम करने का दावा किया है। अब आप भी शायद परिवार के सदस्यों को बढ़ती ठंड से बचाने का उपाए सोच रही हैं।

ठंड दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। महसूस हो रहा है कि दिसंबर के प्रारंभ तक सर्दी काफी बढ़ जाएगी।

साधरणत: लोग  ठंड के शुरूआत को हल्के से लेते हैं और ठंड के चपेट में आ जाने के बाद ही सतर्क होते हैं , परंतु एक बार ठंड लग जाने से फिर उससे छुटकारा पाना मुशिकल हो जाता है। इसलिए अभी से ठंड से बचने के उपाए कर लेना चाहिए। गरम कपड़े , कम्बल, रजार्इ को तो आपने धूप दिखा ही दिया होगा। अभी भी बहुत लोग गरम कपड़े का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। सभी को कम से कम सुबह शाम गरम कपड़ा जरूर पहनना चाहिए। सुबह शाम ही क्यों अब समय आ गया है हल्का गरम कपड़ा हर समय पहनने का। सुबह शाम ज्यादा पहनना चाहिए। ठंड बच्चों और बुजुर्गो के लिए ज्यादा तकलीफदेह होता है क्योंकि बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता का विकास अभी पूरा नहीं होता है। बुजुर्गो में प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इस समय सिर्फ ठंड से बचाव ही नहीं खानपान का भी खास ख्याल रखना चाहिए। सर्दी के मौसम में घरवालों को स्वस्थ रखना सभी गृहिणीयों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।


बच्चे के जन्म के बाद पहली सर्दी में काफी सावधानियां बरतनी चाहिए। पहले जमाने में गीले बिस्तर से बच्चों को ठंड लग जाता था। डाइपर ने इस समस्या का समाधान कर दिया है। सुबह रजार्इ से बच्चे को निकालने के तुरंत  बाद गरम कपड़ा पहनाएं । साथ में टोपी और मोजा पहनाना न भूलें। ठंड में अक्सर बच्चों की आंखें चिपक जाती है। इसके लिए साफ पानी को कुनकुना गरम करें। उसमें मेडिकेटेड रूर्इ भिगाकर धीरे धीरे बच्चे की आंखों को सहलाइए। थोड़ी देर में आंख खुल जाएगी। गरम पानी से मुंह पोंछकर सूखा बेबी टावेल से पोंछिए और बेबी क्रीम लगाइए। सुबह ग्यारह बजे के बाद लेकिन बारह बजे से पहले बच्चे को गरम पानी से नहलार्इए परंतु धूप में नहीं। बंद कमरे या बाथरूम में नहलार्इए जहां हवा बिल्कुल न आए। नहलाने के बाद गरम कपड़ा पहना के थोड़ी देर धूप में रखें पर उसके चेहरे और सर में धूप न लगे इससे बच्चों को तकलीफ होती है। बच्चों का डायट चार्ट तो डाक्टर बना ही देते हैं।

अगर शाम को बच्चे को लेकर बाहर जाना हो तो साथ में बेबी ब्लैंकेट अवश्य ले जाएं और इससे बच्चे को अच्छी तरह ढंक दें। बच्चों की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है। दिन में तो बच्चों को बेबी आयल लगाया जाता है। पर ठंड के दिनों में शाम होते होते बच्चों की त्वचा खिंचने लगती है और बच्चे को बहुत तकलीफ होती है। इसके लिए दादीमां का एक नुस्खा है , इसे आजमाकर देखें। शाम को बच्चे को घुमाने के बाद अच्छे ब्रांड का सरसों का तेल गर्म कर लें। इसके बाद बंद कमरे में हल्का गर्म सरसों के तेल से बच्चे की मालिश करें। मालिश के बाद तुरंत गरम कपड़ा पहना के कम्बल ओढ़ा दीजिए। इसके बाद बच्चे को खुले में न ले जाएं। इससे बच्चे को आराम मिलेगा , सर्दी जुकाम का खतरा कम होगा और बच्चे को अच्छी नींद आएगी। अगर बच्चे की नाक बहने लगे या हल्का जुकाम हो तो तुलसी के पत्ते लें , उबले पानी को हल्का गरम करके उस पानी से पत्ते अच्छी तरह धोकर उसका रस निकाल लें। रस को हल्का गरम करें और आधा चाय चम्मच रस में एक चौथार्इ चम्मच शहद मिलाकर  बच्चे को दिन में दो बार चटार्इए। इससे सर्दी कम होगी। पर डाक्टर को भी अवश्य दिखाएं। बच्चे को अधिक कड़ी दवार्इ देना ठीक नहीं होता है इसलिए पहले जमाने के डाक्टर ही ऐसा करने को कहते थे। बच्चों को हमेशा नरम उन का स्वेटर पहनाना चाहिए। उन्हें रैशेस बहुत जल्दी निकलते हैं क्योंकि बच्चे की त्वचा बहुत संवेदनशील और खुरदुरी होती है। किसी भी चीज के रगड़ से रैशेस जल्द ही निकल आते हैं। आवश्यकता के अनुसार बेबी क्रीम, बेबी लोशन का प्रयोग करें। ठंड के दिन में बच्चे को जमीन पर नहीं छोड़ना चाहिए। ठंड लगने के अलावा बच्चे अगर कुछ उठाकर मुंह में डालें तो पेट की बीमारी हो सकती है।  गर्मी के दिनों में भी बच्चे को पेट की बीमारी हो सकती है परंतु सर्दी के मौसम में यह ठीक होने में बहुत समय लेता है और मां तथा बच्चे को ज्यादा तकलीफ होती है।पेट में ठंड न लगे इसका बहुत ध्यान रखना चाहिए।


बच्चे जब पांच छह: साल के हो जाएं तो उसका देखभाल बड़ों के समान ही करना चाहिए जैसे ठंड में ब्लैक टी बहुत फायदा करता है। बार्डर पर ठंड के समय जवानों को बार बार  ब्लैक टी पीने को दी जाती है। गलन में ब्लैक टी राहत पहुंचाती है। बड़ों के साथ साथ बच्चों को भी कम मात्रा में ब्लैक टी देना चाहिए। चाय से प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

ठंड के प्रारंभ से परिवार के सदस्यों को  आंवले का मुरब्बा खिलार्इए और स्वयं भी खार्इए। इसे घर में बनार्इए यह ज्यादा फायदेमंद होगा। घर में बनाना ज्यादा कठिन नहीं है। हां घर का बना मुरब्बा दुकान जैसा स्वादिष्ट नहीं होगा। पर घर का बना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है। हर समय स्वाद के पीछे नहीं भागना चाहिए। आंवले का मुरब्बा बनाने की विधि- आंवले को अच्छी तरह धोकर उसमें कांटे से छेद कर लें और साफ पानी में रात भर के लिए भिगो दें।सुबह पानी फेंककर एक बार फिर से अच्छी तरह धो लें। एक किलो आंवले के लिए चार सौ ग्राम चीनी का पतला शीरा बनाएं। शीरा काफी पतला होना चाहिए। चीनी पानी में घुल जाने पर एक उबाल आते ही  आंवले उसमें डाल देंं और धीमी आंच पर ढ़ंककर पकने दें। जब आंवला अच्छी तरह नरम हो जाए तो गैस का आंच तेज कर दें और तब तक पकार्इए जब तक शीरा आंवले में लिपट न जाए। अब इसे ठंडा करके कांच की शीशी में भरकर फि्रज में रख दें। प्रतिदिन घर के हर सदस्य को एक आंवला खिलाएं , खुद भी खाएं। बच्चों को उनके उम्र के हिसाब से आंवले की मात्रा कम ज्यादा करके खिलाएं। कच्चा आंवला नमक , चीनी के साथ पीसकर चटनी भी बना सकते हैं। आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में रहता है। यह सर्दी जुकाम से भी बचाव करती है इसलिए इसे जैसे भी खाएं फायदेमंद होता है।

ठंड के दिन में गुड़ , तिल , मौसमी फल विशेषकर अमरूद खाना चाहिए। इससे प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह विटामिन सी और ए का अच्छा स्रोत है। इसमें फार्इबर और लाइकोपिन मौजूद है। लाइकोपिन त्वचा कैंसर व अन्य त्वचा संबंधी बीमारी से बचने के लिए असरदार होता है। अमरूद को काटकर नमक के साथ खाना सबसे अच्छा है। अमरूद का जैली भी सेहत के लिए बहुत अच्छा है परंतु घर का बना। मूंगफली , घर पर बना सबिजयों का अचार, मौसमी सबिजयां , साग विशेष रूप से सरसों , बथुआ और मेथी का साग। पालक महिलाओं के लिए बहुत अच्छा है पर महंगार्इ ने इसे आम आदमी की पहुंच से बाहर कर दिया है। इस समय घर वाले पकौड़ी , पूरी इत्यादि तली चीजें ज्यादा खाना पसंद करते हैं। कुछ तो उन्हें खिलाना पड़ेगा ही। घर का बना हुआ खिलाएं बाजार का नहीं। किसी भी साग का पकौड़ा, पूरी , पराठा बनाएं।

सर्दी के दिनों में शादी , पार्टियां , दावत ज्यादा होती है। अक्सर देखा जाता है कि पुरूष तो ऐसे अवसर पर गरम सूट पहनकर आते हैं पर महिलाएं फैशन के चक्कर में सिर्फ साड़ी , लहंगा ड्रेस या सलवार सूट पहनकर आती हैं। ठंड में ठिठुरते हैं पर गरम कपड़ा नहीं पहनतीं। इसके बाद वे बीमार पड़ जाती हैं। क्या गरम कपड़ा पहनकर फैशन नहीं किया जा सकता ? सर्दी के मौसम में गरम कपड़ा पहनना ही फैशन है। आजकल हर साल नये नये फैशन के गरम कपड़े मार्केट की शोभा बढ़ाते हैं।उसे अपनाकर तो देखिए , जब आप मौसम के अनुरूप ड्रेस अप करेंगी  तो आप ज्यादा मार्डन और खूबसूरत लगेंगी।

ठंड के मौसम को बोझ न समझें। सावधानियों के साथ इस मौसम का भरपूर आनंद लें। यह मौसम सभी मौसमों में सबसे अच्छा है। इस मौसम में आप  घर का और बाहर का ज्यादा काम कर सकते हैं। ज्यादा घूम फिर सकते हैं। बस सिर्फ ठंड से बचने के उपायों पर ध्यान देना चाहिए।

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