Friday, November 24, 2017
User Rating: / 0
PoorBest 


ऋतु परिवर्तन प्रकृति का नियम है। प्रत्येक ऋतु का असर अलग अलग होता है। हमें भी अपनी आदतें इस तरह बदलनी चाहिए कि हम प्रत्येक मौसम के असर को बर्दाश्त कर सकें। सिर्फ इंसान ही नहीं जानवर भी मौसम के अनुसार अपने आपको ढ़ाल लेते हैं।

इसलिए कभी हमें गर्मी से जूझना पड़ता है , कभी शीत लहरी की चपेट में आना पड़ता है तो कभी बारिश में भीगना पड़ता है। प्रत्येक मौसम में प्रकृति से जूझने का अलग अलग तरीका होता है। इसके लिए हमें मौसम के बदलते ही आदतों को बदलना चाहिए।

ऐसा करने के लिए घर के गृहिणी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।  आदतों में हमें खान पान पर सबसे पहले ध्यान देना चाहिए। उत्तर भारत में लोगों को मौसम की मार सबसे अधिक झेलनी पड़ती है। शीत ऋतु में जहां न्यूनतम तापमान साधरणतः 5 के नीचे, कहीं कहीं शून्य से भी नीचे चला जाता है वहीं ग्रीष्म ऋतु में अधिकतम तापमान 45 पार कर जाता है।ऐसे में हाजमा बिगड़ने की पूरी संभावना रहती है। खान पान में बदलाव करके गृहिणी घरवालों की सेहत को ठीक रख सकती है।

गर्मी का मौसम आ गया। सूर्य की किरणें तीखी हो गई। अब वक्त आ गया जब गृहिणी को घरवालों के खान पान पर ध्यान देना चाहिए। इस समय गरिष्ठ भोजन से परहेज करना चाहिए। ज्यादा तेल मसाले वाला भोजन नहीं करना चाहिए। अब जाड़े की सब्जी का मोह त्यागकर गर्मी के मौसमी सब्जियों की ओर रूख करें जैसे परवल, भिंडी,लौकी, कद्दू,तरोई,नेनूआ इत्यादि। रोज के भोजन में किसी न किसी रूप में करेला और पुदीने तथा कच्चे आम की चटनी को अवश्य शामिल करें। सब्जियों मंे भी पुदीने की पत्ती डाल सकते हैं। इससे सब्जी स्वादिष्ट भी बनेगी और उसका असर ठंडा भी रहेगा।कच्चा  आम शरीर को ठंडा रखता है। तला भुना जितना कम खाएं उतना ही अच्छा। बच्चे तो तला भुना खाना चाहेंगे ही मां को चाहिए कि अपने आप पर और घर के बड़ों के खाने पर नियंत्रण रखें तभी बच्चे इसे मानेंगे। कभी कभी घरवालों और बच्चों की खुशी के लिए घर में कुछ हल्का पकौड़ा इत्यादि बनाइए नही ंतो वे बाहर का खाएंगे और उन्हें ज्यादा नुकसान होगा।

मौसमी फल रोज लें जैसे खीरा,ककड़ी कुछ दिन बाद खरबूज,तरबूज,आम, लीची, फालसा, जामुन इत्यादि। भोजन में दही अवश्य शामिल करें।बच्चे इस मौसम में गर्म दूध नहीं पीना चाहते। उन्हें फ्रिज में रखा ठंडा दूध या घर पर बनाया हुआ मिल्क शेक, मैंगो शेक दें।

जो नाॅन वेज खाते हैं उन्हें मछली ज्यादा लेना चाहिए। वह भी ज्यादा बड़ा नहीं। मटन न लें तो अच्छा, चिकेन का हल्का करी या स्टू लें। कुछ लोग रोज अंडा खाते हैं , वह खा सकते हैं पर दिन में एक से अधिक नहीं। नाॅन वेज पकाते समय भी ज्यादा तेल मसाला न डालें।

अपने भोजन में सलाद को शामिल करें। कच्चा प्याज अवश्य खाएं। शरीर को ठंडा करने के लिए लोग आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक लेते हैं पर उसे  खाते वक्त ठंडा अहसास जरूर होता है , लेकिन शरीर को ठंडक नहीं मिलता। वह तो आप शौक के लिए अवश्य खाएं परंतु शरीर को ठंडा रखने के लिए घर में बना शर्बत  लें जैसे बेल,फालसा, तरबूज, नींबू, पुदीना का शर्बत। गर्मी में पानी खूब पीएं लेकिन उबालकर या फिल्टर करके।

गर्मियों में व्रत रखते समय  खोए की मिठाई न लेकर पेठा , लौकी का हलवा, परवल की मिठाई, कच्चे आम की खीर इत्यादि लें।

गर्मी में अपने बच्चों और घरवालों के पहनावे पर विशेष ध्यान दें। हल्के रंग का सूती कपड़ा पहनें। इस मौसम में फ्लोरल प्रिंट आंखों को राहत देता है।  टाईट कपड़ा बिल्कुल न पहनें। स्लीव लेस पहनें पर दिन में नहीं , इससे दिन में लू लगने का डर रहता है। शाम को स्लीव लेस पहन सकते हैं।  दिन में ऐसा कपड़ा पहनें जिससे कि अधिक से अधिक शरीर ढ़़का हो।

फुटवियर पर भी ध्यान बहुत जरूरी है । बंद जूते न पहनें, चप्पल या सैंडल पहनें। बंद जूते  पहनने पर पैरों में पसीना बहुत आता है। इस मौसम में भी स्कूल काॅलेजों या किसी किसी आॅफिस में बंद जूतों के साथ मोजा पहनना आवश्यक होता है। इस हालात में आपको जूता मोजा तो पहनना ही होगा परंतु घर आते ही उसे उतारकर कुछ देर नंगे पैर रहें और फिर हल्का चप्पल पहनें। घूमने जाना हो तो भी चप्पल या सैंडल ही पहनें।

धूप में कम से कम निकलें। अगर निकलना जरूरी हो तो छतरी या कैप का प्रयोग करें।छतरी का रंग काला नहीं होना चाहिए क्योंकि काला रंग सूर्य की किरणों को अपनी ओर खींचता है। धूप में खाली पेट कभी न निकलें। खाने के साथ कच्चा प्याज अवश्य खाएं और पानी पीकर बाहर निकलें इससे लू नहीं लगता। धूप से घर लौटकर कच्चे आम का पना पीएं।

गर्मी में घर की सजावट में बदलाव कीजिए। घर के पर्दे हलके रंग के बनवाएं। घर के अंदर इनडोर प्लांट रखें।इस मौसम में हरियाली आंखों को भाती है। अन्य जगहों के साथ साथ डाइनिंग टेबल पर भी ताजे फूलों का गुलदस्ता रखें। जहां तक हो सके बेड शीट, पिलो कवर सफेद या हलके रंग का लगाएं। बेड कवर भी हलके रंग का बिछाएं। कमरे से कालीन हटा दें और उसकी जगह चटाई या मैट बिछाएं। अगर घर में मच्छर ज्यादा हों तो रात को मच्छरदानी लगाकर सोएं। कूलर की टंकी की नियमित सफाई करें और रोजाना उसमें डेटाॅल की कुछ बूंदें अवश्य डालें। शाम को बाहर ठंडा हो जाने पर घर के खिड़की , दरवाजे खोल दें चाहे कुछ देर के लिए ही सही और स्वंय घर के सदस्यों तथा बच्चों के साथ मार्निंग वाॅक या ईवनिंग वाॅक पर अवश्य जाएं। घर में दिन भर कूलर , एसी की हवा खाने के साथ ही ताजी हवा भी आपके लिए बहुत आवश्यक है।

नहाने के पानी में लिक्विड एंटीसप्टिक की कुछ बूंदें रोजाना डालें, प्रिकली हीट पाउडर का प्रयोग करें, धूप में निकलने से पहले सन स्क्रीन लगाकर निकलें, आजकल गर्मियों में लगाने वाला बाॅडी लोशन भी मिलता है इन सबका प्रयोग करके इस मौसम में खिली खिली रहें।

गर्मी का मौसम है तो आप पार्टी में नहीं जाएंगी ऐसा तो नहीं हो सकता। पाटी्र में जाते समय हलका मेकअप करें, सोबर पर सुंदर दिखने वाला डे्रस पहनें भड़कीला नहीं।आजकल खुले बालों का फैशन  चल रहा है पर गर्मियों में खुले बालों से अधिक गर्मी लगती है इसलिए बालों को बांधें। बालों को बांधने के भी कई स्टाइल हैं। पार्टी, दावत   में आजकल अनेक तरह का खाना बनता है, संभलकर खाएं    जिससे आपका हाजमा ठीक रहे। अगर बच्चे साथ हों तो उन पर विशेष नजर रखें। यदि आप घर पर पार्टी दे रही है तो घर की सजावट और मेन्यु   गर्मी के अनुरूप होना चाहिए।

अगर आप गर्मी में इसी तरह अपनी आदतें बदल लें और गर्मी में भी खुश रहने की कोशिश करें तो गर्मी आसानी से गुजर जाएगी। उपर के चित्र में देखें एक बंदर आंखें बंद करके तल्लीनता के साथ सड़क के नल से बह रहे पानी का किस प्रकार आनंद ले रहा है। यह तो एक चित्र है लेकिन इन दिनों खासकर उत्तर भारत में यह दृश्य आम है। चिडि़या भी मुंह में पानी लेकर अपने उपर छींटा मारती हैं। बहुत सुंदर दृश्य होता है यह। मैने अपनी आंखें से देखा है। जब जानवर मौसम के हिसाब से अपने को बदल सकते हैं तो हम इंसान क्यों नहीं। अपनी आदतें बदलने से उफ गर्मी नहीं वाह गर्मी होगी।

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

women empowerment

Who's Online

We have 3097 guests online
 

Visits Counter

750960 since 1st march 2012