Friday, November 24, 2017
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देश में महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष हो रहा है।इन परिस्थितियों मे भी कुछ स्त्रियाँ आगे बढ़ रही हैं और अन्य महिलाओं का भी मान बढ़ा रही हैं। आइये 2012 की कुछ ऐसी महिलाओं की झलक देखते हैं।

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चानू शर्मिला

12 साल अनशन के- मणिपुर के इरोम चानू शर्मिला का अनशन सन 2000. से चल रहा है। 2 नवंबर 2000 को असम राइफल्स के जवानों ने इम्फाल घाटी के मालोम गांव में दस बेकसूर लोगों को मार गिराया था। उसके बाद इरोम ने अनशन करने का फैसला लिया। उसकी मांग है असम राइफल्स के जवानों की तैनाती को रद करें। 5 नवंबर 2012 को अनशन के बारह साल पूरे हो चुके हैं। अनशन प्रारंभ करने के तीन दिन बाद ही पुलिस ने उसे पकड़ कर नाक में नली डालकर तरल पदार्थ देना प्रारंभ कर दिया है ताकि वह जिंदा रहे। लेकिन इन 12 सालों में उसके मुंह से शरीर में पानी की एक बूंद भी नहीं गई। यह अनशन अब अविश्वसनीय चीजों का संग्रह करने वाली अमरीकी संस्था 'रीप्ले में दर्ज हो चुकी है।

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अवार्ड ग्रहण करते हुए अनु पेशावरिया
भारतीय मूल की महिला वकील को अमरीकी अवार्ड- भारतीय मूल की जानी मानी अमरीकी वकील अनु पेशावरिया को 25 फरवरी 2012 को कैलिर्फोनिया स्टेट गवर्नमेंट ने ' अवार्ड आफ एक्सीलेंस से नवाजा। उन्होने अप्रवासियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई विशेषकर महिलाओं के और सामाजिक जागरूकता फैलाई , जिसके लिए उन्हे यह पुरस्कार मिला। वह किरण बेदी की छोटी बहन हैं।


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प्रियंका वाड्रा वृंदा करात
अंग दान का फैसला - सर गंगा राम अस्पताल के अफसरों के अनुसार प्रधान मंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की पुत्री श्रीमती प्रियंका वाड्रा तथा भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी माक्र्सवादी की नेता वृंदा करात ने वहां हुए एक कार्यक्रम में 5 दिसंबर 2012 को अपने अंगों को दान करने की शपथ ली है। प्रियंका वहां उपसिथत नहीं थीं परंतु उन्होने कहा यदि इससे लाभ हो तो आप मेरा नाम अंग दान करने वालों में गिन सकते हैं। वृंदा करात ने कहा मैं पूरी तरह से अंग दान का समर्थन करती हूं और इसका हिस्सा बनने के बाद अपने आपको गर्र्वित भी महसूस कर कही हूं। इस कार्यक्रम में जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के 500 लोगों ने भाग लिया।


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माउंट एवरेस्ट की चोटी पर भारतीय सेना का महिला पर्वतारोही दल
महिलाओं का एवरेस्ट फतह -दो महिला दलों ने भारतीय सेना महिला एवरेस्ट अभियान 2012 के तहत एवरेस्ट की चोटी फतह कर महिलाओं की क्षमता दुनिया को दिखा दी। इस दल को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी
सिंह पाटिल ने झांडा दिखाकर रवाना किया।

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श्रद्धा श्री
बदलाव की चैंपियन- बिहार में 'सपनों को चली छूने प्रतियोगिता में बदलाव की चैंपियन रही पटना वूमेंस कालेज मास कम्यूनिकेशन तृतीय वर्ष की छात्रा श्रद्धा श्री को यूण्एनण्एफण्पीण्ए द्वारा बैंकाक में एक सप्ताह तक चलने वाले प्रशिक्षण के लिए भेजा गया। प्रशिण का विषय था पिछड़े इलाके की लड़कियों को प्रगति में प्रोत्साहन देना।महिला आयोग का विशिष्ट सम्मान-महिला उत्थान एवं समाज सेवा के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग ने कानपुर की आरती दिक्षित को विशिष्ट सम्मान प्रदान किया।

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सोनाली आचार्जी
गिनीज बुक में नाम दर्ज- हेलाकांडी दक्षिण असम की नृत्यांगना सोनाली आचार्जी ने गुरू देव रवींद्र नाथ टैगोर की 150वीं जयंती के अवसर पर बिना रूके 25 घंटे 25 मिनट तक रवींद्र नृत्य किया। वर्तमान में वह विवाह
के बाद हैदराबाद में रहती हैं। उन्होने वहीं 1 और 2 फरवरी को रवींद्र भारती में यह कारनामा किया। उनका नाम गिनीज बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज हो गया है।

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भारतीय वायु सेना की वरिष्ठ  पायलट निवेदिता भसीन
महिला पायलट का गौरव- भारतीय वायुसेना की वरिष्ठ पायलट कैप्टन निवेदिता भसीन को आधुनिक सुविधाओं से युक्त , इको फ्रेंडली ,बिना रूके 16000 किमी तक चलने की क्षमता वाली बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को उड़ाने का गौरव प्राप्त हुआ। निवेदिता भसीन ड्रीमलाइनर उड़ाने वाली दुनिया की पहली महिला पायलट बनीं।

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टेसी थामस
देश की अगिन पुत्री- केरल की टेसी थामस देश के किसी मिसाइल प्रोजेक्ट की पहली महिला प्रमुख बनीं। वह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के अगिन-5 कार्यक्रम की निदेशक हैं।

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7वें स्पेस वाक के दौरान सुनीता विलियम्स
भारतीय मूल की अमरीकी अंतरिक्ष यात्री- अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अमरीकी नेवी अफसर हैं। उन्होने दो बार अंतरिक्ष की यात्रा की। दूसरी यात्रा 2012 में थी। वह एक्सपेडिशन-33 की कमांडर बनीं। अंर्तराष्टी्रय स्पेस स्टेशन की कमान संभालने वाली वह दूसरी महिला हैं। 17 सितंबर 2012 से वह एक्सपेडिशन की कमांडर बनीं। नवंबर 2012 तक विलियम्स ने सात स्पेस वाक में हिस्सा लिया। स्पेस वाक का उनका कुल समय है 50 घंटे 40 मिनट।

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पहली महिला कुली माया देवी
महिलाओं में दम- नार्दन रेलवे में लुधियाना जंकशन पर माया देवी ने महिला कुली का काम शुरू कर दिया है। इस पेशे में आने वाली वह पहली महिला हैं। माया देवी के पति स्व राजकुमार इसी स्टेशन पर कुली का काम करते थे। स्टेशन प्रबंधन ने अब यह काम उसकी पत्नी को सौंपा है।

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