Friday, November 24, 2017
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केरल के सुन्नी नेता कान्थापुरम एपी अबुबकर मुलसीयार ने बहुत ही विवादित बयान दिया है। उन्होने कहा कि लिंग समानता गैर इस्लाम और मानवता के विरूद्ध है, और महिलाएं केवल बच्चों को जन्म दे सकती हैं। महिलाएं कभी भी पुरूषों की बराबरी कर ही नहीं सकतीं।
शनिवार 28 नवंबर 2015 को आॅल इंडिया सुन्नी जमायतहुल उलामा के मुखिया कान्थापुरम ने कहा महिलाओं के पास मानसिक शक्ति नहीं होती है और दुनिया को नियंत्रित करने की भी शक्ति नहीं होती। वह शक्ति केवल पुरूषों में होती है अतः दुनिया को नियंत्रित करने का काम पुरूषों का होता है। केरल के कोझाीकोड शहर में मुस्लिम छात्र संघ के कैम्प में बोलते हुए उन्होने यह भी कहा कि लिंग समानता कभी वास्तविकता में नहीं बदल सकती। यह गैर इस्लामिक और मानवता के विरूद्ध है महिलाएं कभी भी पुरूषों की बराबरी नहीं कर सकतीं। महिलाएं मुश्किल परिस्थितियों का सामना नहीं कर सकतीं।
अबुबकर जी क्या आप जानते हैं कि बच्चे को जन्म देने के लिए किस शक्ति की जरूरत होती है। कैसे जानेंगे, आज तक किसी पुरूष ने बच्चे को जन्म नहीं दिया है और आप भी पुरूष ही हैं।
बच्चे को जन्म देने के लिए जितनी मानसिक शक्ति की आवश्यकता होती है वह महिलाओं के पास मिलती है पुरूषों के पास नहीं। अगर महिलाओं के पास मानसिक शक्ति नहीं होती तो आज आप यह विवादित बयान देने के लिए नहीं होते। आप क्या सृष्टि ही नहीं रहती। महिला जब बच्चे को जन्म दे सकती है तो वह कोई भी काम कर सकती है।
अबुबकर जी आप यही कहना चाहते हैं न कि महिलाएं पुरूषों की बराबरी नहीं कर सकती। सत्य कहा आपने महिलाएं पुरूषों की बराबरी नहीं कर रही हैं बल्कि हर क्षेत्र में उनसे आगे निकल रही हैं।
आपके अनुसार लिंग समानता कभी वास्तविकता में नहीं बदलेगा। दुनिया के सभी देशों में लिंग समानता को वास्तविक जीवन में सच करने की कोशिश हो रही है और आप कहते हैं कि यह सच नहीं हो सकता। यानि आपको छोड़कर सभी पागल हैं।
आप यह भी कहते हैं कि लिंग समानता गैर इस्लाम और मानवता के विरूद्ध है। परंतु इस्लाम तो महिलाओं की इज्जत करता है, उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखता है वही इस्लाम लिंग समानता का विरोध कैसे कर सकता है।
रही बात लिंग समानता के मानवता के विरूद्ध होने की। कान्थापुरम जी आप केरल के 76 वर्षीय बुजुर्ग सुन्नी नेता हैं। आप यह क्या कह रहे हैं। मानवता का अर्थ क्या है। लिंग समानता मानवता के विरूद्ध है ! आपके कहने का अर्थ है मानवता में लिंग समानता की कोई जगह नहीं। अगर मानवता लिंग समानता की बात नहीं करेगा तो कौन करेगा। माफ करिएगा आप काफी बुजुर्ग हैं लेकिन आपकी बातों से लगता है कि लिंग समानता से आपकी व्यक्तिगत समस्या है।
आप कहते हैं कि महिलाएं मुश्किल परिस्थितिओं का सामना नहीं कर सकतीं। आपकी बातों से यही लगता है कि आप महिलाओं से असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। लगता है कि आप चाहते हैं बेटी के जन्म के बाद पिता से उसका परिचय हो, विवाह के बाद पति से और बुढ़ापे में बेटे से। उसका अपना कोई परिचय नहीं होना चाहिएं वह तो केवल बच्चा पैदा करने की मशीन है न।
कौन कहता है कि महिलाओं का काम केवल बच्चे पैदा करना है। आपके अल्लाह, हिन्दुओं के भगवान, सिक्खों के वाहे गुरू या इसाईओं के जीसेस। नहीं किसी ने कहा क्योंकि अपनी ही सृष्टि के विषय में ऐसी अपमानजनक बात वह नहीं कर सकते । जिस तरह पुरूष ऊपर वाले की सृष्टि है उसी तरह महिलाएं भी ऊपर वाले की सृष्टि है। हां महिलाओं के अनेक कामों में से एक काम बच्चों को जन्म देना भी है और वह ऐसा कर भी रही है। वह घर, परिवार के साथ साथ बाहर का काम भी बखूबी संभाल रही है। अगर वह ऐसा नहीं कर रही होती तो दुनिया का अंत हो चुका होता।
इस तरह के बयानों की वजह से ही कुछ पुरूष महिलाओं पर अत्याचार करना अपना जन्म सिद्ध अधिकार समझते हंै और कलंकित होती है संपूर्ण पुरूष जाति। महिलाएं बच्चा पैदा करने के लिए ही बने हैं जैसे बयानों से ही रेपिस्टों को बढ़ावा मिलता है। ऐसे बयानों से लगता है कि महिला केवल भोग की वस्तु है, जब तक कान्थापुरम जैसे कुछ पुरूषों की मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक लिंग समानता मुश्किल है। परंतु इन लोगों को जान लेना चाहिए कि वह दिन गए जब आप लोग महिलाओं को दबाकर रखते थे। अब महिलाओं ने छीनना सीख लिया है। आज वह दिन आ गया है जब महिलाओं को समाज में बराबरी का अधिकार, इंसान होने का दर्जा और महिला होने का सम्मान, संपत्ति में बेटे के बराबर का अधिकार, घर के बाहर काम करने की आजादी इत्यादि अगर नहीं मिलेगी तो वह छीन कर लेगी लेकिन हारेगी नहीं।

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