Friday, November 24, 2017
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saint teresa


मदर टेरेसा अब संत टेरेसा बन गईं हैं। 4 सितम्बर 2016 को वेटिकन सिटी में पोप फ्रांसिस ने मदर टेरेसा को एक लाख लोगों के सामने संत घोषित किया। सेंट पीटर्स स्क्वायर पर जमा भीड़ इस खबर को सुनकर झूम उठी। यह भारत के लिए गर्व का क्षण था। मदर टेरेसा के संत टेरेसा बनने पर गर्वित तो पूरी दुनिया थी पर भारत संत टेरेसा की कर्मभूमि रहा और हम भारतवासी संत टेरेसा को भारतीय ही मानते हैं, भारत का थोड़ा ज्यादा गर्वित होना तो बनता है।


संत बनने के लिए भगवान का सेवक होना तो आवश्यक है ही, जिस व्यक्ति को संत घोषित किया जा रहा हो उसके द्वारा किए गए दो चमत्कारों को एपेक्स चर्च की स्वीकृति मिलनी भी आवश्यक है।
संत टेरेसा के दो चमत्कार.
उनके पहले चमत्कार को उनकी मृत्यु के पांच साल बाद चमत्कार के रूप में स्वीकृति मिली। पोप जाॅन पाॅल द्वितीय ने इस घटना को चमत्कार के रूप में मान्यता दी।



पश्चिम बंगाल की 50 वर्षीय एक आदिवासी महिला मोनिका बेसरा के पेट में तेज दर्द था। उसके पेट में ट्यूमर था। वह कई अस्पतालों और डाॅक्टरों के चक्कर काट चुकी थी लेकिन ठीक नहीं हुई। सन् 1998 मई में मोनिका को मिशनरीज आॅफ चैरिटीज के होम में भर्ती किया गया।
पांच सितम्बर 1998 संत टेरेसा की मृत्यु के ठीक एक वर्ष बाद ननों ने मोनिका के पेट पर एक छोटा सा लाॅकेट रखा जिसमें मदर की एक तस्वीर थी और प्रार्थना किया।
मोनिका बेसरा के अनुसार दो सिस्टर मुझे पकड़कर चर्च ले गई क्योंकि कमजोरी की वजह से तब मुझमें चलने फिरने की ताकत नहीं थी। जैसे ही मैंने चर्च में प्रवेश किया मदर की फोटो से आंखों को चैंधियाने वाली दैवीय प्रकाश निकली और मुझे घेर लिया। मैंने अपनी आंखें बन्द कर ली, मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या हो रहा है , मैं इसका वर्णन नहीं कर सकती, मैं बेहोश हो गई।
जब मैं बिस्तर से उठी तो अपने को हल्का और अच्छा महसूस कर रही थी। मैंने अपने पेट की ओर देखा क्योंकि ट्यूमर की वजह से पहले पेट फूला हुआ था परंतु अब ट्यूमर गायब था और पेट सामान्य। इसके बाद से मोनिका ने वह लाॅकेट गले में पहनना शुरू कर दिया।



2015 में पोप फ्रांसिस ने मदर के दूसरे चमत्कार को मान्यता दी।दिसंबर 2008 में ब्राजील का एक व्यक्ति एनड्रीनो कई ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित था। उसने दावा किया कि वह उसकी पत्नी के महीनों की प्रार्थना के बाद ठीक हुआ। उसकी पत्नी ने उसके ठीक होने के लिए ननों से महीनों प्रार्थना की थी।
एन्ड्रीनो को वायरल ब्रेन इन्फेक्शन हुआ था, जिससे उसके ब्रेन में कई ऐबसेस हो गए। डाॅक्टरों को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था और दिसम्बर 2008 में वह कोमा में चला गया। एन्ड्रीनो की पत्नी और परिवार ने नन से दिल से प्रार्थना की थी और जब उसे आॅपरेशन थियेटर ले जाया गया तो सर्जन ने देखा कि वह होश में है। उसे कोई दर्द नहीं था।
छहः महीने के अंदर ही एन्ड्रीनो काम पर लौट गया, उसके बाद ही इस दम्पति को पहली बार माता पिता बनने की सूचना मिली। जबकि अधिक दवाईयों के सेवन की वजह से डाॅक्टरों ने कहा था कि एन्ड्रनों कभी पिता नहीं बन सकता। अब उनके दो बच्चे हैं और एन्ड्रीनो बच्चों को मदर के चमत्कार का ही हिस्सा मानते हैं।



मदर टेरेसा को अब संत घेषित किया जा चुका है। वह अब संत टेरेसा हैं परंतु वह हमेशा हम सबकी मदर टेरेसा ही रहेंगी। हम सबको गर्व है कि मदर अब संत बन गई हैं लेकिन मदर ंसंत के मुकाबले सदा ही दिल के बहुत करीब होती हैं।

 

Comments 

 
#1 BHW 2017-04-16 11:20
Hello friends, how is all, and what you would like to say on the topic of this piece of writing, in my view its actually amazing designed for me.
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