Saturday, November 25, 2017
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पानी के बाद विश्व में सबसे ज्यादा पीया जाने वाला पेय पदार्थ है चाय। अमीर का महल हो या गरीब की झोपड़ी सुबह नींद खुलने के बाद सबकी पहली जरूरत है चाय। मुख्यतः चाय बनाने का काम परिवार की गृहिणी, बहू या बेटी को करना पड़ता है। सुबह आंख खुलने के बाद या काम से लौटने के बाद पति का पत्नी से कहा गया पहला वाक्य होता है जरा एक कप चाय हो जाए।

घर में मेहमान आने से भी सबसे पहले चाय के लिए पूछा जाता है, खासकर ठंड के दिनों में। एक महिला को पता नहीं दिन में कितनी बार चाय बनाना पड़ता है। किसी किसी घर में सुबह की पहली चाय पति बनाते हैं लेकिन बाद में पता नहीं पत्नी को कितनी बार चाय बनाना पड़ता है। घर में मेहमान आने से सारे घरवाले उनके साथ बैठ जाते हैं और घर की किसी महिला को चाय बनाकर लाना पड़ता है, शादी के लिए जब लड़के वाले लड़की पसंद करने आते हैं तो लड़की के हाथ से चाय भिजवाना एक रिवाज सा बन गया है अर्थात चाय के साथ महिलाओं का गहरा नाता है। चाय तो महिलाओं को बनाना ही पड़ता है चाहे वह खुश हो के बनाए या नाराज होकर। चाय तो मैं भी बनाती हूं । मेरे पति एक पत्रकार थे। रात के बारह बजे घर आने के बाद पहले एक कप चाय पीते थे फिर रात का खाना। उनके दूसरे पत्रकार मित्रों के बारे में भी मैंने ऐसा ही सुना है।पत्रकार और रात की शिफ्ट में काम करने वालों की जिंदगी में चाय की एक बड़ी भूमिका है। चाय बनाते बनाते ही मेरे मन में इसके बारे में जानने की इच्छा जागी। विश्वास कीजिए चाय का इतिहास चाय पीने से कम रोचक नहीं है।

भारत में अनेक पौराणिक कथाएं हैं जो काफी रोचक होती है। इसकी सच्चाई की जांच कोई नहीं करता। इस तरह की कथा चीन में भी प्रचलित है। चीन में चाय के बारे में भी कथाएं प्रचलित है।

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एक ऐसी कथा के अनुसार चीनी सम्राट शेंगनोंग कृषि और चीनी दवाई के आविष्कारक थे। वह उबला हुआ पानी पी रहे थे ताकि प्रजा में यह संदेश पहुंचे कि पानी उबाल के पीना चाहिए। इसी दौरान 2737 ईसा पूर्व के लगभग पास के पेड़ से कुछ पत्ते उस पानी में गिरे और पानी का रंग बदल गया। सम्राट ने उस पानी को पीया, स्वाद कुछ बदला सा लगा। उन्होने उन पत्तों के औषधिय गुण का परीक्षण किया। औषधि बनाने के लिए वह सम्राट अनेक प्रकार की जड़ी बूटी का परीक्षण अपने ऊपर करते थे। कभी कभी जड़ी बूटी विषैला भी होता था। उन्होने पाया कि चाय की पत्तियां विष नाशक भी होती है। ऐसी ही  और एक कथा के अनुसार कृषि के देवता औषधीय जड़ी बूटी का आविष्कार करने के लिए अनेक पौधों के पत्ते, डंठल और जड़ को चबा जाते थे। जब वह कोई विषैला पौधा चबा जाते थे तो विष को काटने के लिए चाय की पत्तियां चबाते थे। इन कथाओं में कितनी सच्चाई है कोई नहीं जानता , लेकिन यह कथाऐं साबित करती है कि चीन का चाय के साथ बहुुत पुराना रिश्ता है।

चाय का आरंभिक इतिहास-

चाय का इतिहास चीन से प्रारंभ होता है। वहां चाय का प्रयोग हजारों सालों से होता आ रहा है। चीन में चाय पीने के प्रारंभिक रिकार्ड 10वीं ईसा पूर्व को जाता है परंतु चाय पीने के विश्वास योग्य रिकार्ड तीसरी सदी में मिलते हैं।

1500 ईसा पूर्व से 1046 ईसा पूर्व तक चीन में शेंग वंश का शासन था। हो सकता है इसी दौरान चीन के कुछ भागों में चाय को औषधीय पेय पदार्थ के रूप में पीया जाता था।

अब हम चीन से निकलकर भारत की ओर रूख करते हैं। प्राचीन भारत में चाय का सर्वप्रथम स्पष्ट उल्लेख रामायण (750-500 ई0 पू0) में मिलता है। इसके बाद एक हजार वर्ष तक भारत में चाय का जिक्र इतिहास के पन्नों में खो गया।

इसके बाद पहली सदी में फिर से चाय के रिकार्ड मिलते हैं। बौद्ध साधुओं का चाय के साथ विशेष लगाव था। इसी तरह बौद्ध साधुओं  की कहानियों के साथ भारत में चाय ने एक बार पुनः इतिहास में अपनी जगह बना ली।

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ब्रिटिश भारत के दौरान असम में सेसा गुडरिक टी एस्टेट

भारत में चाय का व्यवसायीकरण

चाय पर चीन का वर्चस्व तोड़ने के लिए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने चाय को व्यवसायिक रूप देना प्रारंभ किया। अंग्रेजों ने चाय के चीनी बीज और कृषी   तकनीक का प्रयोग करते हुए भारत में चाय उद्योग की स्थापना की। इसके लिए उन्होने असम में किसी भी यूरोपीय को जमीन देने की पहल की जो निर्यात के लिए चाय की कृषी करने को तैयार थे।

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प्रथम भारतीय चाय उत्पादक मनीराम दीवान

प्रथम भारतीय चाय उत्पादक थे मनीराम दीवान। 17 अप्रेल 1806 को जन्मे मनीराम दत्ता बरूया मनीराम दीवान के नाम से लोकप्रिय थे। उन्होने जोरहाट के चीनामारा और शिबसागर जिले के सिंगलोऊ में चाय बागानों की स्थापना की।

प्रारंभ में भारत में चाय का सेवन केवल अंगे्रजी मानसिकता वाले लोग ही किया करते थे। सन् 1920 में भारत के आम नागरिक भी चाय पीने लगे। 1950 में टी बोर्ड के सफल कैंपेन अभियान चलाए जाने के उपरांत उत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों के लोग चाय पीने लगे और संपूर्ण भारत में चाय का प्रचलन शुरू हो गया।

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चाय और महिलाएं - महिलाओं के साथ चाय का संबंध बहुत गहरा है। ज्यादातर भारतीय परिवारों में चाय बनाने का काम महिलाओं का ही होता है। केवल चाय बनाना ही नहीं चाय पत्तियों और महिलाओं का साथ चाय बागान से ही प्रारंभ होता है। चाय का उत्पादन कई चरणों में होता है और इसमें बडी़ मात्रा में कुशल कारिगरों की आवश्यकता होती है, विशेषकर चाय पत्तियां तोड़ने का काम । यह काम नाजुक, कठिन और थका देने वाला होता है, जो काम  प्रधानतः महिलाएं ही करती हैं। चाय पत्तियां तोड़ने का अपना एक अलग तरीका है। यह काम किसी मशीन से नहीं हो सकता। चाय की पत्तियां एक . एक करके नहीं तोड़ी जाती है। दो पत्ती और एक कली एक साथ तोड़ी जाती है जो महिलाएं अपने उंगलिओं से तोड़ती हैं और उन्हें इसमें महारथ हासिल है।

जरा सोचिए, देश में कितनी चाय की खपत होती है और विदेशों में भी भारतीय चाय बेहद लोकप्रिय है इसलिए भारत भारी मात्रा में चाय का निर्यात करता है। इतनी बड़ी मात्रा में चाय की पत्तियों को महिलाएं ही तोड़ती हैं। चाय की पत्तियां तोड़ना किसी कला से कम नहीं है। परंतु क्या इसकी कोई कद्र है।

चाय बागानों में काम करने वाली महिलाओं की दशा बहुत ही दयनीय है। इन्हें जो वेतन मिलता है उससे दो वक्त की रोटी नहीं मिल पाती है। इन महिलाओं का रहन दृ सहन बहुत ज्यादा निम्न स्तर का होता है। चाय बागान के मालिक इनसे काम करवाते हैं। लेकिन इन बातों की परवाह नहीं करते। एक वाक्य में कहा जाए तो इनका शोषण होता है।  यह अनपढ़ होते हैं, पौष्टिक भोजन नहीं मिलता है इसलिए कम उम्र में ही तरह दृ तरह के रोगों का शिकार हो जाते हैं। इनके बच्चों को अच्छी परवरिश नहीं मिलती। कुछ समय पहले तक तो ये बच्चे भी अनपढ़ होते थे। लेकिन आजकल किसी किसी चाय बागान में कुछ समाज सेवक इन बच्चों को पढ़ाते हैं।

कुछ लोगों की धारणा है कि चाय पीना हानिकारक है पर ऐसा हमेशा नहीं होता। किसी किसी बीमारी में डाॅक्टर चाय पीने के लिए मना करते हैं। चाय पीना हानिकारक नहीं है इसका मतलब यह नहीं कि चाय का सेवन असीमित मात्रा में किया जाए। चाय पीने से प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। सर्दी के मौसम में ब्लैक टी बहुत फायदा करता है। पहाड़ी इलाकों में तैनात जवानों को सर्दी से लड़ने के लिए थोड़ी थोड़ी देर में सीमित मात्रा में ब्लैक टी पीने के लिए दी जाती है। खैर इस साल के लिए ठंड तो गई, अब जो मौसम आने वाला है उसमें ब्लैक टी में नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर लेमन टी पीने से ताजगी का अहसास होता है। पुदीने की पत्तियों के साथ ब्लैक टी बनाकर मिन्ट टी पी सकती हैं। हेल्थ काॅन्शस लोग आजकल ग्रीन टी पीते हैं। अधिक गर्मी में कोल्ड टी भी पीया जा सकता है। गर्मी के दिनों में लू में निकलने से पहले अगर एक कप गर्म चाय पी लें तो लू लगने की संभावना कम होती है। लू से लौटने के तुरंत बाद ठंडा पीने की बजाए गर्म चाय फायदा करती है।

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भारत के लिए चाय की अहमियत और बढ़ गई है क्योंकि भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी बचपन में चाय बेचा करते थे। पिछले माह 25 जनवरी 2015 को अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा तीन दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। उसी

दिन हैदराबाद हाऊस के लश ग्रीन लाॅन पर गुनगुनी धूप में ओबामा और मोदी की चाय पर चर्चा हुई और वह चाय मोदी ने स्वयं बनाकर ओबामा को पेश किया। ऐसा करते वक्त उनके चेहरे पर कोई भी झिझक नहीं थी, इसलिए घर में महिलाएं चाय बनाने को छोटा काम न समझें। अब तक रोड साइड टी स्टाॅल या रेस्टाॅरेंट में पुरूष ही चाय बनाते हैं पर वह दिन दूर नहीं जब हमें महिलाओं के टी स्टाॅल देखने को मिलेंगे।

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