Friday, November 24, 2017
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भारतवर्ष में अनेक तीज त्यौहार होते हैं और अधिकांश त्यौहारों पर व्रत रखने का नियम है। ज्यादातर महिलाएं व्रत रखती हैं लेकिन कुछ पुरूष भी व्रत रखते हैं। नवरात्र एक बड़ा पर्व है जो साल में दो बार होता है।चैत्र में और शरद ऋतु में।

इस साल चैत्र नवरात्र 11 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। पिछले साल यह पर्व मार्च के महीने में ही प्रारंभ हो गया था। इस बार देर होने के कारण गर्मी काफी बढ़ गई है इसलिए नवरात्र में खान पान का विशेष ध्यान रखना पड़ेगा क्योंकि पर्व समाप्त होने के बाद ग्लूकोज चढ़ाने के लिए अस्पताल जाना कोई काम की बात नहीं है। 

व्रत में ज्यादातर फल ,खोए की मिठाई , सिंघाड़े के आटे के पकवान ,कुटटू के आटे की पकौड़ी खाई जाती है। एक तो यह सब दो चार दिन खाने के बाद जी उब जाता है और दूसरी बात इस साल की गर्मी में यह सब खाना भारी होगा। फल भारी नहीं होता लेकिन अभी सर्दी के फल समाप्त हो रहे हैं और गर्मी के फल ठीक से बाजार में आए नहीं हैं। जो भी आया है उसकी कीमत आसमान छू रहे हैं।हमें कुछ ऐसे खान पान के बारे में सोचना है जो बजट , मौसम और स्वास्थ्य के अनुरूप हो।

आइए देखें व्रत में खोए की मिठाई के अलावा हम क्या मीठा खा सकते हैं जो हल्का और स्वादिष्ट हो।

लौकी का हलवा -

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नरम लौकी को छीलें , धोएं ,काटकर बीया अलग करें और लौकी को कददूकस करें। कददूकस करने के बाद लौकी को न धोएं। अब लौकी को उबालकर नर्म करें और छलनी से पानी अलग करके पानी फेंक दें। अब गैस पर कड़ाही चढ़ाएं , उसमें अंदाज से दूध डालकर अच्छी तरह उबालें। फिर उसमें उबले लौकी डाल दें और चलाती रहें। दूध जब गाढ़ा होने लगेगा तो चीनी व किशमिश डालें और चलाती रहें जब मिश्रण सूखकर कड़ाही छोड़ने लगे तो गैस बंद करके गुलाबजल और काजूु के कतरन डाल दें और फि्रज में रखकर ठंडा करें। इसे एक साथ ज्यादा बनाकर दिन में कई कई बार थोड़ा थोड़ा खा सकते हैं। अगर लौकी का खीर खाना चाहें तो दूध में उबाल आने पर उबली लौकी , चीनी और किशमिश एक साथ डाल दें थोड़ा गाढ़ा होने पर गैस बंद करें और इलायची पाउडर डालकर ठंडा खाएं। यह दोनो मिठाई शरीर को ठंडा रखती हैं।

मलाई पेठा-

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बजार से क्रीम लाएं। क्रीम में थोड़ा सा उबला ठंडा दूध डालकर फेंटें। उसमें थोड़ा सा चीनी पाउडर मिलाएं। फि्रज में रखकर ठंडा करें। पेठे के टुकड़ों को एअर टाइट जार में डालकर एक दिन पहले फि्रज में रख दें जिससे कि वह कड़ा हो जाए। अब पेठे के टुकड़ों को कददूकस करें। मलाई को फि्रज से निकालकर फिर से अच्छी तरह फेंटें। अगर क्रीम कड़ा हो गया हो तो थोड़ा सा उबला ठंडा दूध मिलकर फेंटें। अब इसमें कददूकस किया हुआ पेठा डालें और अच्छी तरह मिलाएं। पहले से ठंडे दूध में भिगोया हुआ केसर डालें। अगर चाहें तो केसर के स्थान पर क्रीम को ठंडा करते वक्त उसमें गुलाबजल डालें और लाल गुलाब की पंखुडि़यों से सजाकर खाएं।इसे फि्रज में भी एक दिन से ज्यादा न रखें। चीनी पाउडर मिलाते समय ध्यान रखें कि पेठा भी मीठा होता है।

लच्छेदार पनीर की खीर-

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100 ग्राम पनीर का मोटा मोटा लच्छा बनाएं। 1 लीटर दूध गैस पर चढ़ाएं उबलते उबलते जब दूध आधा रह जाए तब उसमें काजू का कतरन ,किशमिश ,चिरौंजी डालकर मिलाएं। चीनी का पाउडर मिलाएं , थोड़ी देर चलाएं अब पनीर का लच्छा डालें। तीन मिनट उबालें , हल्के हाथ से चलाएं लच्छा न टूटे। गैस बंद करके इलायची पाउडर डालें। सामान्य तापमान पर आने से फि्रज में रखकर ठंडा करें। अगर चाहें तो बादाम और पिस्ता से सजा सकते हैं। अगर केसर डालना चाहें तो इलायची पाउडर न डालें।

व्रत में केवल मीठा ही नहीं खाया जाता है। नमकीन भी जरूरी है। व्रत में नमक का परहेज करना पड़ता है लेकिन सेंधा नकम तो चल ही सकता है। आमतौर पर चाय के साथ बिस्कुट या कुछ नमकीन खाया जाता हैै। व्रत में साबूदाने का पापड़ खरीदें और तलकर सेंधा नमक बुरक कर चाय के साथ खाएं। केवल चाय कभी न पीएं।

साबूदाने का भरवां पकौड़ा-

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साबूदाना व्रत में खूब चलता है क्येंकि यह हल्का होता है। उबला आलू और साबूदाने की पकौड़ी तो बनती ही है। उसको और स्वादिष्ट भी बनाया जा सकता है। साबूदाना भिगोने के लिए पहले उसे धो लें ,फिर पानी से अलग करके छोटी परातनुमा थाली में फैला दें। एक मोटा , सफेद सूती कपड़ा अच्छी तरह गीला करके साबूदाने को तीन घंटे के लिए ढक दें। इससे साबूदाना नर्म तो होगा लेकिन लिसलिसा नहीं। भरावन के लिए मसला पनीर ,शिमला मिर्च के महीन कतरे ,महीन कटा हरा मिर्च और अदरक तथा पुदीना के महीन कतरे ,किशमिश और सेंधा नमक ,अगर पसंद हो तो थोड़ा सा चीनी लें। सभी सामग्री अच्छी तरह हल्के हाथों से मिलाएं। आलू को उबालें ,छीलें और मसलें। उसमें भिगोया हुआ साबूदाना ,भुना हुआ मूंगफली का चूरा , नारियल का बुरादा, स्वादानुसार सेंधा नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण के गोले बनाएं और उसमें भरावन भरें। इसे मनपसंद आकार दें और डीप फ्राई करें। नारियल की चटनी के साथ खाएं। कददूकस किया हुआ कच्चा नारियल और हरी मिर्च महीन पीसकर सेंधा नमक मिलाएं। चटनी तैयार है।

सबूदाने का पोहा -

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सबूदाने की खिचड़ी तो सभी खाते हैं आप इस बार पोहा खाएं। साबूदाने को उसी प्रकार भिगोएं जैसा कि पकौड़े में बताया गया है। आलू ,शिमला मिर्च , गाजर , फूलगोभी ,फेंचबीन्स ,पालक के पत्ते , हरा मिर्च सभी को छोटे टुकडों में काट लें। उबले हरे मटर के दाने लें। गैस पर कड़ाही चढ़ाएं और सफेद तेल गर्म करें। साबुत जीरे का तड़का दें। सभी सबिजयां डाल दें और सेंधा नमक डालकर थोड़ी देर चलाएं। फिर थोड़ा सा पानी डालकर ढ़क दें ताकि सभी सबिजयां नरम हो जाएं। सबिजयां नरम होने पर अबले मटर डालें। पानी बिल्कुल सूख जाने पर इसमें भिगोया साबूदाना और भुने मूंगफली के दाने डालें। गैस बंद करके सभी सामग्री एक साथ मिला लें। उपर से धनिया पत्ता और नींबू का रस डालकर गर्मा गर्म खाएं।पहले से बनाकर न रखें दोबारा गर्म करने पर साबूदाना लिसलिसा हो जाता है।

भरवां शिमला मिर्च -

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आलू अबालें , छीलें और मसल लें। पनीर को कददूकस कर लें। हरी मटर उबाल लें। पालक के पत्तों को छोटे छोटे टुकड़ों में काटें। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है शिमला मिर्च के डंठल हटा के गुदा निकाल लें। बीया फेंक दें और गुदा को छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें। गैस पर कड़ाही चढ़ाएं। सफेद तेल गर्म करें। जीरे का तड़का देकर पालक के टुकड़ों को डालें । पालक नर्म हो जाने पर उबला मटर और शिमला मिर्च के गुदे का टुकड़ा डालकर थोड़ी देर चलाएं। पानी सूख जाने पर मसला हुआ आलू डालकर थोड़ी देर भूनें ,सेंधा नमक डालें और पनीर तथा किशमिश डालें अच्छी तरह मिलाएं। अब इसमें कतरा हुआ धनिया का पत्ता मिलाएं।भरावन थोड़ा ठंडा होने पर शिमला मिर्च में भरें और शिमला मिर्च के चारों ओर थोड़ा तेल लगाकर ओवन में बेक करें। अगर ओवन की सुविधा न हो तो नान सिटक फ्राई पैन में थोड़ा तेल डालकर शिमला मिर्च को धीमी आंच पर ढ़ककर आठ से दस मिनट तक पकाएं। पैन पर मिर्च सीधा बैठाएं नही तो भरावन निकल जाएगा। मिर्च नरम हो लेकिन क्रंची रहे।

इतनी गर्मी में दही का सेवन बहुत जरूरी है। अगर दही के साथ कुछ मिला कर खाएं तो जायका भी बढ़ेगा और पेट भी भरेगा। इसके लिए छोटे टुकड़ों में कटा हुआ आलू ,छोटे टुकड़ों में कटा हुआ खीरा और बीया निकालकर टमाटर को छोटे टुकड़ों में काटें। दही को फेंट कर इसमें मिलाएं और भूना जीरा पाउडर ,सेंधा नमक और पुदीने की पत्ती मिलाएं। इसे फि्रज में रखकर ठंडा करके खाएं। अगर आपका बजट आपको अनुमति दे तो मौसमी फल जैसे पपीता ,संतरा इत्यादि को छोटे टुकडों में काटकर इसी प्रकार दही में मिलाकर खाएं।

व्रत में तरल पदार्थ का सेवन बहुत जरूरी है लेकिन पानी कितना पीया जा सकता है। आप पतली काली चाय बनाकर पुदीने की पत्ती डालकर फि्रज में रख दें। एक दो घंटे बाद चाय से पुदीने के पत्ते को निकाल दें और नींबू का रस डालकर पीएं।

पुदीने की पत्ती ,इमली और गुड़ भिगो दें। एक घंटे बाद इसको मसलकर छान लें। फि्रज का पानी मिलाकर शर्बत जैसा पतला करें। भूना जीरे का पाउडर डालें और बरफ डालकर पीएं। पुदीने का शर्बत तैयार है।

एक गिलास ठंडा पानी में दो चम्मच फेंटा हुआ दही मिलाकर छान लें। इसमें भूना जीरा पाउडर , सेंधा नमक और बरफ डालकर पीएं।दही का पतला नमकीन शर्बत इस मौसम में स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। इसके अलावा जितना हो सके पानी भी पीते रहें। व्रत में शरीर का संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है और संतुलन बनाए रखने के लिए तरल पदार्थ आवश्यक है।

व्रत में जीरा का प्रयोग ज्यादा किया जाता है क्योंकि जीरा हाजमा ठीक रखता है और शरीर को ठंडक पहुंचाता है।पुदीने का प्रयोग भी शरीर को ठंडक पहुंचाता है। पुदीने की चटनी भी खा सकते हैं। यह सारा खाना जिनका व्रत नहीं है वह भी खा सकते हैं इसलिए बनाने के बाद व्रत वाले अपने लिए पहले से निकाल कर अलग रख लें नही तो हो सकता है कि बिना व्रत वाले ही सारा खा लें।

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