Saturday, November 25, 2017
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sharbat 1
आजकल किसी तरह की देसी स्टाईल आउट आफ फैशन है जैसे कि फलों का रस घर पर बना कर पीएं तो मध्यम वर्गीय मानसिकता कहलाएगा परंतु फ्रूट जूस की दुकान पर खड़़े होकर स्ट्रा से पीएं तो स्टैंडर्ड बढ़ जाता है।गर्मी साल दर साल बढ़ रहा है। ऐसे में हमें कुछ ऐसा करना पड़ेगा जिससे शरीर को सही मायने में ठंडक पहुंचे। गर्मी प्रारंभ होते ही दुकानों में आइसकी्रम और कोल्ड डि्रंक की खपत बढ़ने लगती है पर इससे मन सोचता है कि ठंडा पी लिया पर शरीर ठंडा नहीं होता है।

गर्मी में ठंडा पीने का चलन बहुत पुराना है। इतिहास से हमें पता चलता है कि राजा महाराजा भी अपने महल में बना खास ठंडा शर्बत पीते थे और प्रजा भी अपने घरों में बनाकर शर्बत पीती थी।राजा महाराजा तो अब इतिहास हो गये हैं। 1970 के दशक तक अमीर हो या गरीब घर का बना शर्बत पीकर गर्मी भगाते थे। घर की महिलाएं रोज शाम को शर्बत बनाकर परिवार को पिलाती थीं। उस जमाने में हर घर में कूलर या एसी नहीं होता था परंतु बगीचा या आंगन प्राय: सभी घरों में होता था जिसे शाम को पानी डालकर ठंडा किया जाता था और परिवार के सदस्य वहीं बैठकर ठंडा शर्बत पीते थे।आइए हम आज जरा उस जमाने में झांकें और देखें कि किस तरह हर तबके के लोग गर्मी का आनंद उठाते थे। आज हम गर्मी के दिन काट देते हैं उसका आनंद उठाना भूल गये हैं।

लू से बचिए

खान पान में बदलाव करके लू से बचा जा सकता है। पुराने जमाने में गर्मी से बचने की तैयारी सुबह से प्रारंभ हो जाती थी।सभी घरों में सुबह ही आम का गाढ़ा पना या नींबू का रस बनाकर रखा जाता था।कोई लू में निकले या लू से लौटे तो उनको मटके के ठंडे पानी में पना या रस मिलाकर दिया जाता था। घर आए मेहमान को भी लू से बचने के लिए आम का पना या नीेबू पानी दिया जाता था आज मेहमानों का स्वागत ग्लूकोन डी नींबू पानी से किया जाता है। मटके या सुराही का स्थान आज फि्रज ने ले लिया है। यह तो वक्त की मांग है और बुजर्ुगों ने उसके साथ समझौता कर लिया है।आप आज भी लू से बचने के लिए इसका प्रयोग कर सकते हैं।यह वाकई में शरीर को लू से बचाती है।

पुराने स्वाद आधुनिक पद्धति से

यह सोच रखना गलत है कि पुराने जमाने में सब कुछ अच्छा था और आधुनिक युग का सब कुछ खराब है। आज की गृहिणी को चाहिए कि वह बदलते परिवेश में परिवार के माडर्न डायट के साथ अपने सुविधा अनुसार कुछ पुराने स्वाद को भी भोजन में शामिल करे।पुराने जमाने में महिलाओं को कुछ भी करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती थी। उस जमाने में खाना बनाने के लिए चुल्हा जलाना पड़ता था आज की तरह गैस, इंडक्शन या माईक्रोवेव नहीं था।मिक्सर - जूसर नहीं था कुछ भी पीसने के लिए सिलौटी का प्रयोग करना पड़ता और रस निकालने के लिए हाथों का। फि्रज नहीं होता था बर्फ बाजार से मंगाई जाती थी और पानी ठंडा करने के लिए सुराही या मटकी में रखा जाता था। इतना मेहनत करने के बाद घर की महिलाएं परिवार को खिलाने पिलाने का आनंद लेती थीं पर स्वयं खाने पीने का नहीं।आइए कोशिश करते हैं माडर्न किचन में दादी नानी के हाथों के स्वाद को माडर्न तरीके से बनाने की।

आम का पना

aam ka pana
कच्चे आम को धोकर ओवन में बेक कर लें। थोड़ी देर ठंडे पानी में बेक्ड आम को डुबो कर रखें।ठंडा होने पर छिलका उतार के आम का गुदा निकालकर गुठली फेंक दें और आम का पल्प , थोड़ा से पानी और पुदीने की पत्ती को मिक्सी में चला लें। इसे छानकर ठंडा पानी मिलाकर पतला करें और काला नमक ,सफेद नमक , भुना जीरा पाउडर मिलाकर फि्रज में रख दें। पीने से पहले ग्लास में पना , बर्फ डालें अगर इच्छा हो तो स्ट्रा लगाकर पीएं। इसके अलावा घर में ग्लूकोन डी , इलेक्ट्राल पाउडर अवश्य रखें। हो सकता है पना हमेशा न बन पाए।

तरबूज का शर्बत

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गर्मी के दिनों में तरबूज का शर्बत पीने से शरीर को ठंडक पहुंचती है। यह लाल रंग का शर्बत सबका मन मोह लेता है। तरबूज धोकर काट लें। तरबूज का सबसे उपर का नरम हिस्सा जहां बीया भी नहीं हुआ है को काटकर अलग कर लें। इस हिस्से को छोटे छोटे टुकड़ों में काटकर फि्रज में ठंडा होने के लिए रखें।तरबूज का बचा हुआ लाल हिस्सा निकालकर बीया अलग कर दें।अब उसे बड़े बड़े टुकड़ों में काटकर जूसर में चला लें। रस निकल आए तो उसे छानें ,चीनी व अंदाज से पानी मिलाएं और थोड़ा सा नींबू का रस डालकर ठंडा करने के लिए फि्रज में रखें। सर्व करते समय ग्लास में शर्बत डालकर उपर से बर्फ और काट कर रखे नरम तरबूज के कुछ टुकड़े से गार्निश करें।

बेल का हल्का शर्बत

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इसे तो हाथों से ही बनाना पड़ता है। पका हुआ बेल धोकर तोड़ लें। गुदा निकालकर दो तीन घंटे के लिए पानी में भिगो दें फिर हाथ या चम्मच से गुदा को हल्के से पानी में मिलाएं और छानकर चीनी , काला नमक मिलाएं और फि्रज में रखें। सर्व करते समय उपर से बर्फ और भुना जीरा पाउडर डाल दें।

पुदीने का शर्बत

pudine ka sharbat

पुदीने की डंठल अलग करके पत्ती को धो लें , बीया निकाला हुआ इमली या कच्चा आम और गुड़ या चीनी के साथ एक दो घंटे के लिए भिगो दें। फिर इसे मिक्सर में अच्छी तरह चलाकर निकाल लें और अंदाज से पानी मिलाकर छान लें। फि्रज में रख कर ठंडा करें। सर्व करते समय उपर से बर्फ , काला नमक और भुना जीरा पाउडर डालें। चाहें तो ग्लास के साईड में पुदीने की पत्ती लगा दें।

फालसे का शर्बत

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फालसे को गर्मी का मेवा कहते हैं। फालसे को धोकर एक दो घंटे के लिए भिगो दें। हाथ से मसलकर बीया निकालकर फेंक दें। गुदा को जूसर में डालकर जूस निकालें और छान लें। अंदाज से पानी और चीनी मिलाएं।फि्रज में रखकर ठंडा करें। शीशे के सफेद ग्लास में फालसाई रंग का शर्बत डालकर बर्फ देकर सर्व करें। फालसाई रंग का यह शर्बत देखने में बहुत सुंदर लगता है।

आज की व्यस्त जिंदगी में पहले की तरह हर रोज देसी स्टाईल का शर्बत बनाना संभव नहीं है क्योकि ज्यादातर घरों में पति , पत्नी दोनों कामकाजी होते हैं। परंतु सप्ताह में एक दो बार इसमें से कोई भी शर्बत बनाएं।

आजकल हर घर में छत , आंगन या बगीचा तो मिलना मुशिकल है इसलिए एसी वाले कमरे में रोशनी हल्की कर दें। अपने पसंद का म्यूजिक लगाएं और आवाज धीमी कर दें। घरवालों को इस माहौल में ठंडा शर्बत पेश करें। अपने किसी खास मेहमान का स्वागत भी आप इस तरह कर सकती हैं। शायद यह बाटल की कोल्ड डि्रंक से आकर्षक होगी।

Comments 

 
#1 Stella04 2017-10-29 05:05
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