Friday, February 23, 2018
User Rating: / 1
PoorBest 

 

aroma world
आंचलिक विज्ञान नगरी में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पर्यावरणीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन चल रहा है। कार्यक्रमों की कड़ी में आज एरोमा जेल कैणिडल कार्यशाला का आयोजन गृहणियों एवं शिक्षिकाओं के लिए किया गया जिसमें लगभग 30 गृहणियों एवं शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यशाला का संचालन सीमैप के पूर्व वैज्ञानिक डा0 आनंद अखिला द्वारा किया गया। इस कार्यशाला के अतिरिक्त पर्यावरण पर आधारित गतिविधि का आयोजन हुआ जिसे उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के डा0 राजीव उपाध्याय, डा. (श्रीमती) सुधा भारद्वाज एवं पर्यावरण निदेशालय की डा0 अर्चना सिंह द्वारा सम्पादित किया गया।


पालीबैग पर अपने व्याख्यान-कम-प्रदर्शन में डा. उपाध्याय ने विधार्थियों को सलाह दी कि हमें पालीबैग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि यह पर्यावरण के लिए खतरनाक होती हैं। उन्होंने अपने साथ लाये 'पालीबैग थिकनेस मीटर द्वारा पालीथीन की मोटाई को नाप कर समझाया तथा बताया कि हमें 40 माइक्रान से अधिक थिकनेस वाली पालीबैग का ही इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि 40 माइक्रान से कम थिकनेस वाले पालीबैग गलते या सड़ते नहीं हैं। डा0 भारद्वाज ने विभिन्न प्रकार के प्रदूषण तथा हमारे पर्यावरण और हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले उनके प्रभाव को अच्छी तरह से समझाया।

प्रकृति में बिखरी फूल-पत्तियों की सुगंध को किस प्रकार सुगंधित व खूबसूरत मोमबत्तियों में कैसे कैद किया जा सकता है यह सिखाया डा0 आनंद अखिला ने। आंचलिक विज्ञान नगरी, अलीगंज में प्रकृति, सुन्दरता व सुगंध पर आधारित अपनी कार्यशालाओं की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए डा0 आनन्द ने आज गृहणियों व स्कूल के बच्चों को ऐरोमा-जेल कैंडल्स व ऐरोमा-वैक्स कैंडल्स बनाने के खूबसूरत तरीकों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि सुगंधित अगरबत्तियों की तरह किस तरह सुगंध वाली मोमबत्तियाँ घर के वातावरण को खूबसूरती व तरोताजा मन को प्रसन्न करने वाला वातावरण दे सकती हैं। उन्होंने लैंवेडर, जिरेनियम, चंदन, गुलाब, मोगरा, चमेली की महक प्रदान करने वाली व खूबसूरत व सुगंध देने वाले फूलों को जेल-मोमबत्तियों में संरक्षित करने की भी कला सिखाई। डा0 अखिला ने बताया कि किस तरह ऐरोमा एवं ब्यूटी कैंडल्स को एक हाबी के अतिरकित एक छोटे-मोटे लघु उधोग की तरह भी अपनाया जा सकता है।

आंचलिक विज्ञान नगरी, के परियोजना समायोजक श्री उमेश कुमार ने बताया कि पर्यावरणीय जागरूकता कार्यक्रम के 'पर्यावरण पर आधारित गतिविधि का आयोजन किया जायेगा जिसे डा0 ओ0पी0वर्मा, निदेशक, पर्यावरण निदेशालय द्वारा सम्पन्न किया जायेगा तथा इसके अतिरिक्त 'ऊर्जा संरक्षण पर एक लोकप्रिय व्याख्यान दिया जायेगा।

 

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

women empowerment

Who's Online

We have 3097 guests online
 

Visits Counter

782495 since 1st march 2012