Friday, November 24, 2017
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happy monsoon

गर्मी का प्रारंभ होते ही हर किसी की जबान पर मानसून की बात आने लगती है।बड़ी बेसब्री से हम मौसम विभाग की खबर का इंतजार करते हैं - केरल में कब मानसून आएगा ? इस साल मानसून ने अधिक इंतजार नहीं कराया और समय से पूर्व ही आ गई।

बारिश के मौसम का अलग ही मजा है। क्या बच्चे क्या बूढ़़े सभी का मूड बदल जाता है। लेकिन बारिश केवल खुशियां लेकर नहीं आती है। खुशियों के साथ साथ कुछ परेशानियां भी है जो इस मौसम के आनंद में खलल डालती है।यदि आप चाहें तो इन समस्याओं का हल चुटकी बजाते निकाल सकते हैं और आपकी मानसून होगी प्रारलेम फ्री हैप्पी मानसून।

सर्दी और गर्मी के मौसम में बैकिटरिया खुलकर पनप नहीं सकता। बरसात के बूंद के साथ ही इन्हें भी खुलकर पनपने का मौका मिल जाता है जो लोगों को अस्वस्थ्य कर देती है। घर के सदस्यों के सेहत की चाभी तो आपके हाथ में है।

सबसे पहले पीने के पानी का ख्याल रखें। एक्वा गार्ड या किसी भी वाटर प्यूरिफायर का प्रयोग करें।अगर ऐसा कोई साधन न रहे तो पानी को उबालें, ठंडा करें,छानें और पिएं। इस मौसम में कालरा, टायफायड, निमूनिया, डायरिया इत्यादि ज्यादा होती है। तपिश के बाद बारिश आने से मौसम पूरी तरह बदल जाती है। सर्दी जुकाम की समस्या इस मौसम में आम है। एक तो मौसम में बदलाव और बारिश में भीगना इसका मुख्य कारण है। मौसम का बदलाव तो प्राकृतिक है लेकिन जहां तक हो सके बारिश से बचने की कोशिश करें, अगर भीग भी जाएं तो जितनी जल्दी हो सके गीले वस्त्रों को बदल लें, गर्म पानी में डेटाल की बूंदें डालकर एंटिसेपिटक सोप से नहा लें, अदरक वाली गरम चाय पिएं और बारिश में ज्यादा भीग गये हों तो चाय के साथ सर्दी से बचने का कोई दवा ले लें। इन दिनों अगर आप न भी भीगे हों तो भी बाहर से घर आकर तुरंत कपड़े बदल लें, हाथ-पैरों को अच्छी तरह एंटिसेपिटक सोप से धो लें नहीं तो त्वचा संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। आंखें का भी ख्याल रखें कन्जंटिवाइटिस को पास न आने दें।

इस मौसम में पेट संबंधित बीमारी ज्यादा होती है इससे बचने के लिए पानी का ध्यान रखने के साथ साथ साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें। पेट की बीमारियां संक्रमण से होती है। यदि संक्रमण को रोकने में आप कामयाब होंगी तो पेट की बीमारी से बचा जा सकता है। फल को अच्छी तरह प्यूरिफाईड वाटर से धोकर खाएं। सबिजयों को भी इसी पानी से धोएं। इन्हें ओवर कुक न करें लेकिन ध्यान रहे कि सबिजयां अधपकी न रह जाएं। ज्यादा गरिष्ठ भोजन न करें। ऐसा भोजन लें जो सुपाच्य हो।बुजुर्ग और छोटे बच्चों के भोजन का खास ख्याल रखें। बाजार का बना भोजन जितना कम खाएं वही अच्छा। खुले ठेले का भोजन तो बिल्कुल न लें। बासी भोजन से परहेज करें। आप जितनी साफ सफाई से खाना बनाएंगी शहर के बड़े बड़े होटल भी सफाई का उतना ध्यान नहीं रख पाएगा।
किचन की सफाई का पूरा ध्यान रखें।

गर्मी के बाद बारिश सबको भाता है।परंतु मौसम ठंडा होने के बावजूद हम आईसक्रीम,कुल्फी, कोलड्रिंक,ठंडा पानी पीना कम नहीं करते। इस पर थोड़ा बहुत रोक लगना चाहिए। बारिश शुरू होने के बाद बर्फ का गोला बिल्कुल न खाएं। अदरक वाली चाय लें। यह सेहत के लिए भी अच्छी होती है।ग्रीन टी, लेमन टी भी ले सकते हैं। इन तीनों के सेवन से आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है। विटामिन सी युक्त फल सर्दी जुकाम से बचाता है। ज्यादा दिन तक फि्रज में खाना रखकर न खाएं। इससे फूड पायजनिंग हो सकता है।

अगर घर के किसी सदस्य को होटल में भोजन करना पड़े तो इस मौसम में साग की सब्जी कभी आर्डर न करें।मौसमी सबिजयां या आलू की सब्जी ही आर्डर करें। होटल में इन दिनों नान वेज कभी न खाएं। बारिश के समय डेयरी प्रोडक्टस से परहेज करें परंतु दूध से नहीं। ज्यादा देर पहले कटा हुआ फल न खाएं। होटल का सलाद कभी न खाएं। फल में खरबूज,तरबूज का सेवन बिल्कुल न करें। आम सीमित मात्रा में खाएं। यदि घर के बाहर पानी पीना हो तो मिनरल वाटर पिएं।

बारिश में चाट पकौड़ी खाने का दिल सभी का करता है।चाट तो इस मौसम में बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।पकौड़े खाना हो तो घर पर बनाएं। मूंग के दाल में लहसुन डालकर पकौड़े बनाएं। इस मौसम में लहसुन बहुत फायदा करता है। आलू या शिमला मिर्च के पकौड़े बनाएं। मिर्च मसाला कम डालें। बच्चों को मूंग दाल का चिल्ला बनाकर दें। कचौड़ी सबको बहुत पसंद होता है। मूंग का या आलू की कचौरी घर पर बनाएं। यह हल्का रहेगा।परंतु इन दिनों तला भुना कम ही खाना चाहिए इसलिए सीमित मात्रा में लें अन्यथा हाजमा बिगड़ जाएगा। यदि आप नान वेज खाती हैं तो बरसात के चार महीने मछली न खाएं। इस समय नदियां उफान पर होती हैं और इस पानी की मछली खाने से संक्रमण फैल सकता है। अगर खाना ही हो तो बड़ा रोहू मछली खाएं। अच्छी तरह धोकर,तलकर पकाएं। बेहतर है चिकेन और अंडा खाना। फिश और चिकेन गि्रल करके भी खा सकते हैं।

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इन सबके अलावा हाउसवाइफ बारिश के मौसम में कुछ अपनी सूझ बूझ से इसे खुशनुमा बना सकती है। हम सभी जानते हैं कि यह मौसम अपने साथ परेशानियां भी लेकर आती है। इन सावधानियों पर अमल करके आप बहुत हद तक इस परेशानी से बच सकती हैं।घर के सदस्यों की सेहत ठीक रहेगी तभी तो आप बरसात का खुलकर आनंद ले सकेंगी। घर के कामों के अलावा अपने लिए भी कुछ वक्त निकालें। ध्यान से बारिश की बूंदों को देखें वह भी आपसे कुछ कहना चाहती है। यदि आप उन्हें दुखी मन से देखें तो आपको लगेगा कि बूंदें भी दुखी हैं। खुश मन से निहारेंगी तो बूंदें भी खुशी से नाचेंगी।किसी उलझन में हैं तो बारिश की बूंदों को एकटक निहारें धीरे धीरे समस्या का समाधान नजर आने लगेगा। बारिश के मौसम में अगर आप अपने लिए कुछ खास करना चाहती हैं तो अवश्य करें। खुद के लिए भी जीएं। याद रखें हर गुजरते साल के साथ आपकी उम्र भी एक साल बढ़ जाती है। इसलिए इस बारिश के अरमान इसी बारिश में पूरा करें। कौन जाने अगला बारिश कौन सी समस्या लेकर आए। घर के सदस्यों का ख्याल तो आपको ही रखना है परंतु खुद को मिटाकर नहीं। जैसे आप दूसरों के मानसून को हैप्पी बनाती हैं वैसे ही अपने लिए भी बनाएं।

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