Friday, November 24, 2017
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आज से पचास वर्ष पूर्व तलाक और प्रेम विवाह एक खास घटना होती थी जो इक्का दुक्का होने के साथ चर्चा का विषय भी बन जाती। परंतु आज ऐसी घटनाएं रोज मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है।

आज के समाज की बहुत बड़ी समस्या है तलाक की बढ़ती घटनाएं। इसका कारण है युवा वर्ग की सोच - चट मंगनी, पट ब्याह, झट तलाक। आज का युवा वर्ग विवाह को गंभीरता से नहीं लेते। बिना सोचे समझे वह विवाह कर लेते हैं चाहे लव मैरिज हो या अरेंज। उनकी सोच यह होती है कि निभ गया तो बहुत अच्छा नहीं तो तलाक का रास्ता खुला है ही।

युवक - युवती दोनों को समझना चाहिए कि विवाह केवल मौज मस्ती का नाम नहीं है। विवाह एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है जिसे ताउम्र निभाना पड़ता है। पब के डांस फलोर पर बिताए गए चंद घंटों की तरह नहीं।


विवाह का अर्थ समझें -
तलाक कम करने के लिए युवा वर्ग को विवाह का उददेश्य समझना होगा। विवाह एक पुरूष और एक नारी का होता है लेकिन मिलन एक परिवार का दूसरे परिवार से, एक संस्कृति का दूसरे संस्कृति से होता है। यदि विवाह मां बाप की पसंद से होती है तो दूल्हा दुल्हन दोनों सोचते हैं चलो बड़ों का मान रखने के लिए शादी कर लेते हैं। निभ गया तो ठीक है, नहीं निभा तो मां बाप समझेंगे। हम तो तलाक लेकर आजाद हो जाएंगे। कितनी बचकानी सोच है। उन्हें नहीं पता कि तलाक लेकर भी पहले की जिंदगी नहीं मिल सकती। यदि आपको जीवन साथी पसंद नहीं है तो विवाह से पहले ही मां बाप को बता दें, बात को तलाक तक न ले जाएं।

यदि आप लव मैरिज करते हैं तो दोनों विवाह से पूर्व बैठकर विवाह के बाद आने वाले सिथतियों पर गौर करें। इमोशनल नहीं प्रैकिटकल बनिए। हर पहलू पर सिर्फ दिल से नहीं दिमाग से सोचें। जब दिमाग दिल का साथ दे तो शादी कीजिए। शादी से पहले दोनों तय कर लें कि जैसी भी परिसिथति हो विवाह के पवित्र बंधन को तोड़ेंगे नहीं बलिक मुशिकल से मुशिकल चुनौती का सामना मिलकर करेंगे और विवाह को निभाएंगे।

विवाह के बाद की परिसिथति बिल्कुल अलग -
शादी के बाद की परिसिथति बिल्कुल अलग हो जाती है - जो लड़की शादी से पहले अपने ब्वाय फ्रेंड से गुलाब के फूल की मांग करती थी, शादी के बाद वही युवती पति से गोभी का फूल लाने को कहेगी। उसी तरह जो लड़का शादी से पहले चाहता था कि उसकी गर्ल फ्रेंड केवल उसी की खुशी का ख्याल रखे शादी के बाद वही युवक चाहेगा कि उसकी पत्नी पूरे परिवार की खुशी का ख्याल रखे।

विवाह से पहले मानसिक रूप से तयार हों -
आजकल के समाज में प्रेम विवाह अधिक होते हैं। मां बाप चाहें या न चाहें उन्हें रजामंदी देनी ही पड़ती है क्योंकि कोई भी मां बाप लड़का या लड़की को हमेशा के लिए खोना नहीं चाहते। अमूमन लड़की के लिए शादी की उम्र 20 से 25 साल और लड़के के लिए 25 से 30 साल माना जाता है। इस उम्र में जीवन साथी की सही पहचान नहीं हो सकती। इसके लिए अनुभव की आवश्यकता होती है। बेटे के लिए बहू या बेटी के लिए दामाद को परखने का अनुभव तो माता पिता के पास होता है। वर्तमान दौर में युवक युवती दो चार दिन साथ घूमें, फूल या गिफट का आदान प्रदान हुआ, सपनों की दुनिया में जीते हुए ही उन्हें लगने लगता है एक दूसरे के बिना जी नहीं सकेंगे।बस कर लेते हैं शादी का फैसला। सुना देते हैं अपना निर्णय मां बाप को। शादी के लिए मानसिक रूप से तैयार न होते हुए भी शादी कर लेते हैं। अब बारी आती है रियलिटी फेस करने की। कल तक जो लड़की जींस टाप में मां बाप की लाडली बनकर बिंदास घूमती थी, शादी के बाद एक ही पल में परिवार की बहू के साथ साथ भाभी, चाची,ताई,मामी इत्यादि रिश्तों में बंध जाती है। इन सारे रिश्तों को निभाने के साथ साथ पत्नी के दायित्व का भी पालन करना पड़ता है। ब्वाय फ्रेंड जब पति बन जाता है तब उसके साथ इज्जत से पेश आना पड़ता है जो बेहद मुशिकल है।

लड़के के लिए कल तक जो लड़की सिर्फ उसकी गर्ल फ्रेंड थी, जिसके साथ घूमने फिरने और मौज मस्ती करने के बाद कोई जिम्मेदारी उठानी नहीं पड़ती थी। वही लड़की जब पत्नी बन जाती है तो उसके सभी सुख सुविधाओं की जिम्मेदारी पति को ही उठानी पड़ती है। साथ ही पत्नी की गलती सुधारना और घर के लोगों की नाराजगी से उसे बचाना भी पति का ही फर्ज होता है।

अनचाहे तलाक के कारण -

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यह तो हुई विवाह की सच्चाई। आज के समाज की समस्या है तलाक। इस समस्या से पूरी तरह छुटकारा पाना तो मुमकिन नहीं है पर विवाह की सच्चाई को विवाह से पूर्व गंभीरता से समझकर अनचाहे तलाक की समस्या से बचा अवश्य जा सकता है।

देखा गया है कि तलाक का सबसे बड़ा कारण है बेबुनियाद शक। पति पत्नी को हमेशा एक दूसरे पर विश्वास करना चाहिए। इस शक का सबसे बड़ा कारण होता है प्री मैरिटल अफेयर या एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर जो अक्सर बेबुनियाद होता है। इससे बचना चाहिए।

पहले पत्नी की बात लेते हैं। किसी भी दूसरे लड़की से पति को बात करते हुए देखा तो झट से समझ लिया कि दोनों में अफेयर है। किसी भी युवती को यह सोचना चाहिए कि यह उसके लिए शर्म की बात है कि उसके रहते पति का किसी दूसरी लड़की से अफेयर हो। शक करने के बजाय पति को इतना प्यार दें, इतना ख्याल रखें, उनके दिल में अपनी ऐसी जगह बनाएं कि वह आपके स्थान पर किसी अन्य लड़की की कल्पना भी न कर सके। शक कभी न करें क्योंकि बेबुनियाद शक करते करते वह सच भी हो जाता है। यदि आपके पास पति के ऐसे हरकत के पुख्ता सुबूत हों तो अलग बात है। वह शक नहीं सच्चाई होती है।

इसी तरह पति भी पत्नी को किसी लड़का या विवाह पूर्व के दोस्त के साथ बात करते देखकर गलत धारणा बना लेते हैं। पर यह आपके लिए भी शर्म की बात है। यदि आपके रहते आपकी पत्नी किसी और युवक के बारे में सोचे। आप भी पत्नी के साथ उसी तरह पेश आएं जैसे पत्नी आपके साथ आती है। फिर बेबुनियाद शक की कोई गुंजाईश ही नहीं रहेगी।

तलाक का एक और कारण है मेल ईगो। ब्वाय फ्रेंड का कोई मेल ईगो नहीं होता लेकिन पति बनते ही उसमें मेल ईगो उत्पन्न हो जाता है। हमेशा पत्नी को नीचा दिखाने की कोशिश न करें। स्वयं को पत्नी से श्रेष्ठ न समझें। दोनों का बराबर का दर्जा होता है। अगर पत्नी वर्किंग है और उसे आपसे ज्यादा सैलरी मिले तो तुरंत आपका मेल ईगो हर्ट हो जाता है। आप पत्नी को दबाने और नीचा दिखाने का बहाना ढूढ़ने लगते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए मेल ईगो को कंट्रोल में रखें। चाहे आप ज्यादा कमाएं या पत्नी बात तो एक ही हुई। घर में पैसा आना चाहिए। पत्नी को भी ज्यादा कमाने का रौब पति को नहीं दिखाना चाहिए। केवल पति ही क्यों ससुराल के किसी भी सदस्य पर ज्यादा कमाने का रौब न डालें। आफिस में आप बास हो सकती हैं पर घर में तो आप बहू ही होंगी न।

तलाक का एक और कारण है एक्सेसिव पोजेसिफनेस। ज्यादातर मामलों में यह खूबी पतियों में पाई जाती है। पत्नी अगर सुंदर हो तो भगवान बचाए, सुंदर न होने पर भी कई पतिनयों को पति के एक्सेसिव पोजेसिफनेस का शिकार होना पड़ता है। इस तरह के पति अपने पत्नी को दुनिया से छुपाकर रखना चाहते हैं। कोई भी अन्य पुरूष उसकी पत्नी की प्रशंसा में दो शब्द कह दे तो कहने वाले और पत्नी दोनों की खैर नहीं। ऐसे पति सोचते हैं कि वह अपने पत्नी से बहुत ज्यादा प्यार करते हैं और उनके प्यार के बोझ को सहन करना जब पत्नी के बर्दाश्त के बाहर हो जाता है तब नौबत तलाक तक आ जाती है।

ज्यादातर प्रेम विवाह में दोनों के ससुराल वाले और मायके वाले बेमन से शादी के लिए हां करते हैं और शादी के बाद पति पत्नी में मन मुटाव पैदा करके दोनों को अलग करने की कोशिश करते हैं। लड़के की मां बहू के खिलाफ बेटे के कान भरती है और लड़की की मां लड़की के सामने दामाद की कमियां लाती हैं तथा कुछ घरवाले मजा लेने के लिए उनका साथ देते हैं। अगर नवविवाहित जोड़ी कमजोर पड़ जाए तो ऐसे घरवाले तलाक करा के ही दम लेते हैं। यदि यह जोड़ी किसी की बात को दिल से न लगाएं, एक दूसरे पर विश्वास बनाएं रखे और घरवालों को समझने पर मजबूर करें कि उनकी बातों का उन दोनों पर कोई असर नहीं हो रहा है तो धीरे धीरे घरवालों का यह प्रयास बंद हो जाएगा।

हर माता पिता की चाह होती है कि बेटी की शादी अच्छे लड़के से करें परंतु अच्छे दामाद की चाह में वह भूल जाते कि दामाद के साथ जिंदगी उनकी बेटी को बिताना है उनको नहीं। लड़का ऐसा होना चाहिए जिसका टेंपरमेंट लड़की के टेंपरमेंट के साथ मेल खाता हो। पहले जमाने में माता पिता को यह परेशानी नहीं थी क्योंकि 15 से 20 साल की उम्र में ही लड़कियों की शादी हो जाती थी। इस उम्र में उसके अपने ख्यालात बनते ही नहीं थे। इसलिए वह जल्द ससुराल और पति के रंग में रंग जाती थी। पति या ससुराल वालों को पत्नी या बहू के साथ एडजस्ट ही नहीं करना पड़ता था बलिक बहू ही ससुराल की बनकर रह जाती थी।

आज हालात बदल चुके हैं। विवाह देर से होने के कारण लड़की में विवाह से पहले ही मैच्योरिटी आ जाती है। अपने ख्यालात बन जाने के बाद लड़की के लिए अपने से अलग टेंपरमेंट के लड़के या ससुराल के साथ एडजस्ट करना मुशिकल हो जाता है। यदि माता पिता विवाह से पहले थोड़ा ध्यान दें और ससुराल वाले भी कोआपरेट करें तो इस समस्या को सुलझाया जा सकता है।यही समस्या लड़कों के साथ भी होती है।

सोचा जाता है कि तलाक लेने के लिए मन की शकित की जरूरत होती है। यह बात गलत है। जीवन साथी की अच्छाइयों और बुराईयों के साथ उसे अपनाकर सुखी विवाहित जीवन गुजारने के लिए मन की शकित की आवश्यकता होती है। तलाक लेना तो जिंदगी से भागना है। अगर माता पिता विवाह से पहले विवाहित जीवन के हर पहलू की सच्चाई को बेझिझक बच्चों को समझाएं तो विवाह से पहले ही वह सपनों की दुनिया से बाहर आकर सच्चाई का सामना करने के लिए तैयार हो जाएंगे।इससे बिना वजह तलाक में कमी की उम्मीद की जा सकती है। पति पत्नी अगर एक दूसरे से कम उम्मीद रख्ेां तो भी तलाक में कमी आएगी। परंतु कभी कभी कुछ मामले ऐसे होते हैं जहां तलाक ही समस्या का एकमात्र समाधान होता है।ऐसे मामलों में समाज,घरवालों की परवाह किये बिना तलाक ले लेना चाहिए।

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पिछले सप्ताह बने नये कानून के अनुसार तलाक से संबंधित दो आदेश पारित हुए। एक, पति की पैतृक संपतित में पत्नी का हिस्सा और दूसरा, तलाक की प्रकि्रया आसान होने से तलाक जल्दी मिलेगा। यह उन लड़कियों के लिए सच में मददगार होगी जो वाकई में पीडि़त हैं। परंतु युवतियां इसे संपतित पाने का जरिया न सोचें क्योंकि कोर्ट पूरी जांच पड़ताल करने के बाद ही तय करेगा कि किसे कितना और क्या मिलना चाहिए। ऐसा न हो कि संपतित के लालच में कोई युवती पसंद न होने पर भी किसी रईसजादे से विवाह कर ले। यह सोचकर कि कुछ साल बाद तलाक ले लेंगे और संपतित में हिस्सा भी। कहीं ऐसा न हो कि आप अनचाहा विवाह करें , आप पर तलाकशुदा का लेबल भी लग जाए और कोर्ट द्वारा परिसिथतियों की जांच होने के बाद आपकी मुराद भी पूरी न हो। जो लड़का पहले आपसे शादी करने को तैयार था अब तलाकशुदा होने के कारण और संपतित भी न मिलने के कारण शादी से मुकर जाए।

अब तलाक की प्रकि्रया आसान हो गई है । युवक - युवती यह न सोचें कि विवाह कर लेते हैं, नहीं चला तो तलाक ले लेंगे। यह सुनने में जितना आसान है वास्तव में उतना है नहीं। यह सब कुछ कानून पर निर्भर है इसलिए इन दोनों आदेशों का दुरउपयोग करने की कभी न सोचें। इन आदेशों को महिलाओं की भलाई के लिए बनाया गया है वही होने दें।

 

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