Sunday, February 25, 2018
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गंगा को समर्पित रही ५८ वीं माध्यमिक विद्यालीय मंडलीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता  

इलाहबाद में दो दिवसीय ५८ वीं माध्यमिक विद्यालीय मंडलीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता इसबार कुछ अलग हटकर थी।बच्चे जमकर नाचे-गाए और अपनी प्रतिभाओं का बेहतरीन प्रदर्शन भी किया,किन्तु सिर्फ मनोरंजन और पुरस्कार के लिए नहीं,बल्कि देश की संस्कृति की प्रतीक मोक्षदायिनी और जीवनदायिनी गंगा की रक्षा के संकल्प के साथ।
प्रयाग संगीत समिति के विशाल सभागार में २७ और २८ नवम्बर को आयोजित सांस्कृतिक समारोह में इलाहबाद,प्रतापगढ़,कौशाम्बी और फतेहपुर के यूपी बोर्ड तथा सीबीएसई बोर्ड के लगभग बारह हजार छात्र-छात्राओं नें अलग-अलग सत्रों में प्रतिभाग किया।एकल और समूह में गायन,वादन,नृत्य,कविता पाठ और चित्रकला सहित विविध प्रतियोगिताएं आयोजित की गयीं,जो सभी किसी न किसी रूप में गंगा के सम्मान और उसकी मुक्ति से सम्बंधित अभियान को समर्पित थी।इन प्रतियोगिताओं में यूपी बोर्ड में ओवरआल चैम्पियन का ख़िताब बालक वर्ग में केशर विद्यापीठ इंटर कालेज इलाहबाद को तथा लिका वर्ग में किदवई मेमोरियल गर्ल्स इंटर कालेज इलाहबाद को प्राप्त हुआ,जबकि सीबीएसई बोर्ड में टैगोर ब्लिक इंटर कालेज को ओवरआल चैम्पियन का ख़िताब दिया गया। 

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कार्यक्रम को योजनाबद्ध रूप देने में चिदानंद मुनि का गंगा एक्शन परिवार ने सक्रिय भूमिका का निर्वाह किया।परिवार से जुडी पावनी ने बच्चों में न सिर्फ गंगा के प्रति सम्मान का जज्बा पैदा किया, अपितु गंगा की मुक्ति की भावी जिम्मेदारियों के प्रति भी उनमें कर्तब्यबोध पैदा किया।

उप शिक्षा निदेशक माध्यमिक महेंद्र सिंह यादव इस कार्यक्रम के मुख्य संयोजक थे,जिनकी भूमिका अति सराहनीय रही।इतने वृहद् कार्यक्रम की रूप रेखा बनाने में प्रधानाचार्य भारत जी पाण्डेय ,लल्लू प्रसाद त्रिपाठी,केवल शंकर सिंह ,बृजेश शर्मा,प्रधानाचार्य किदवई गर्ल्स और टैगोर पब्लिक स्कूल के आलावा प्रवक्ता डॉ निरंजन सिंह,डॉ विनोद सिंह,डॉ बृजराज यादव,अर्जुन यादव,कौशिकी और दुर्विजय यादव आदि की भूमिका भी उल्लेखनीय रही।

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कार्यक्रम के उद्घाटन में मुख्य अतिथि मंडलायुक्त देवेश चतुर्वेदी थे,जबकि समापन में न्यायमूर्ति रिधर मालवीय,न्यायमूर्ति अरुण टंडन,मेलाधिकारी मणिशंकर मिश्र तथा यूनाइटेड ग्रुप के सतपाल गुलाटी उपस्थित थे।
इस अवसर पर अपने संबोधन में न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने कहा कि जिस दिन गंगा चली जाएगी उस दिन हम और आप नहीं बचेंगे।उन्होंने कहा कि हम सबके लिए यह शर्म की बात है कि हम गंगा के अस्तित्व की रक्षा के लिए पालीथीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।उन्होंने कहा कि गंगा के किनारे बसे तीन शहर कानपुर,इलाहबाद और बनारस गंगा को सबसे अधिक मैली कर रहे हैं।उन्होंने शिक्षा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षा विचार और जीवन को बदल देती है।

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