Thursday, November 23, 2017
User Rating: / 1
PoorBest 

regular study

स्कूल अभी खुले हैं तो क्या हुआ! अभी से पढ़ाई में इंट्रेस्ट लोगे और रेगुलर स्टडी का रिद्म बनाओगे, तो कभी-भी एग्जाम फोबिया नहीं होगा। एग्जाम आने पर भी कूल-कूल रहते हुए जोरदार परफॉर्म कर सकोगे...

        प्रातिभ बारहवीं की बोर्ड एग्जाम में अपने जिले का टॉपर है। रिजल्ट आने के तुरंत बाद एक अखबार के रिपोर्टर ने उससे उसकी सफलता का राज पूछा। उसने हंसते हुए जवाब दिया, 'मैंने सिर्फ एग्जाम टाइम में पढ़ने की बजाय साल भर रेगुलर स्टडी की है। मैंने पूरे सप्ताह को कुछ इस तरह से बांटा था कि सभी विषयों को बराबर समय मिल सके। स्कूल और घर में पढ़ाई के दौरान मैं जो नोट्स बनाता था, उन्हें रात में दोहराता था। प्रातिभ का यह फॉर्मूला अगर तुम भी अपना लो, तो एग्जाम टाइम में कभी-भी प्रेशर फील नहीं करोगे। तुम सोच रहे होगे कि अभी तो स्कूल खुले हैं और अभी से रेगुलर पढ़ाई क्यों? दोस्तो, अगर तुम्हें सिर्फ एग्जाम के समय पढ़ने की आदत है, तो तुम्हें न सिर्फ पढ़ाई बोझिल लगेगी, बल्कि प्रेशर भी फील करोगे। अगर तुम अभी से पढ़ना शुरू कर दो, तो धीरे-धीरे रेगुलर स्टडी का एक रिद्म बन जाएगा और तुम्हें स्टडी बुक्स पढ़ना भी मजेदार लगेगा। इसके अलावा, कुछ और भी बातें हैं, जिन्हें अपनाकर तुम न सिर्फ एग्जाम टाइम में प्रेशर-फ्री रह पाओगे, बल्कि तुम्हारी परफॉर्मेस भी होगी-द बेस्ट।

 

स्टडी का टाइमटेबल

        अगर एक बार स्टूडेंट्स पढ़ाई का रिद्म बना लेने में कामयाब हो जाते हैं, तो फिर उन्हें पढ़ाई कभी बोझिल नहीं लगती। यह रिद्म बनती है निश्चित समय पर रेगुलर स्टडी करने से। मान लो कि तुम्हें रोज आठ बजे स्कूल के लिए निकलना है, तो तुम जल्दी तैयार होकर सात बजे पढ़ने बैठ सकते हो। एक घंटे की पढ़ाई काफी है। स्टडी सिटिंग की छोटी अवधि अधिक कारगर होती है, क्योंकि हमारा दिमाग लगातार 30-40 मिनट ही कॉन्सन्ट्रेट रह पाता है। तुम एक टाइम-टेबल बना लो। इसके अनुसार, सप्ताह के सातों दिन को अलग-अलग विषयों के अनुसार बांट लो। अगर किसी कारणवश निश्चित समय पर किसी विषय की पढ़ाई नहीं कर पाते हो, तो उसे अगले दिन पर टालने की बजाय उसी दिन खाली वक्त में निपटा लो। रेगुलर पढ़ाई से न सिर्फ कठिन सवालों को समझने में आसानी होती है, बल्कि क्लास मैटीरियल्स भी हमेशा के लिए याद हो जाता है।

पहचानो बॉडी रिद्म

        रोहन चाहकर भी सुबह जल्दी उठकर पढ़ नहीं पाता है। इसकी बजाय उसे रात में पढ़ने में मजा आता है। वह कहता है कि रात में मेरा दिमाग अधिक कॉन्सन्ट्रेट होता है। 9-11 के बीच मैं मैथ्स के कठिन से कठिन सवाल भी हल कर सकता हूं। यह सच है कि कुछ स्टूडेंट्स को सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करने की आदत होती है, तो कुछ रात में अधिक कॉन्सन्ट्रेट महसूस करते हैं। तुम अपनी सुविधानुसार समय का चुनाव कर सकते हो। जिस समय तुम सबसे अधिक फ्रेश महसूस करते हो, उसी समय पढ़ाई करो। अगर तुम स्कूल जाने के लिए जल्दी तैयार हो गए हो और तुम्हारे पास पांच या दस मिनट बचा है, तो उस समय कठिन सब्जेक्ट के चैप्टर्स के इम्पॉर्टेट प्वाइंट्स पर नजर दौड़ा सकते हो।

माइंड बूस्टर

        यदि कोई टॉपिक तुम्हें समझ में नहीं आ रहा है या याद नहीं हो पा रहा है, तो उसे 3-4 बार लिखो। तुम देखोगे कि लिखने पर न सिर्फ वह बात तुम्हें समझ में आ जाती है, बल्कि वह मुंहजबानी याद भी हो जाती है। जरूरत पड़ने पर तुम उसके बारे में अपने टीचर्स या दोस्तों को बता सकते हो, समझा सकते हो। ठीक इसी तरह यदि तुम्हें पढ़ना रुचिकर लगता है, चाहे वे पाठ्य-पुस्तकें हों या नॉवेल, यह तुम्हारे लिए माइंड बूस्टर का काम करेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि जितना अधिक तुम पढ़ोगे, तुम्हारा दिमाग उतना ही एक्टिव होगा। तुम्हारी इमेजिनेशन पॉवर और कॉन्सन्ट्रेशन दोनों ही बढ़ेंगे।

याद रखने के मजेदार तरीके

        शोभित साइंस के फॉर्मूले, थ्योरी आदि याद नहीं रख पाता है। कुछ दिनों पहले उसने एक नायाब नुस्खा अपनाया। उसे जो टॉपिक कठिन लगता है या याद नहीं रह पाता है, उसके वह डायग्राम बना लेता है। कलर्ड इंक से इम्पॉर्टेट प्वाइंट्स लिख लेता है। याद रखने के लिए वह उसे कुछ कोडव‌र्ड्स से भी जोड़ लेता है। सब्जेक्ट मैटर को याद रखने का उसका यह तरीका स्कूल भर में चर्चित है। इसे मनोविज्ञान में 'पेयर्ड एसोसिएशन' कहते हैं। यदि हम स्टडी मैटीरियल्स को कॉमन ऑब्जेक्ट्स से जोड़कर देखते हैं, तो यह हमारी मेमोरी में लंबे समय के लिए सेव हो जाती है। इसलिए चार्ट पेपर पर तुम साइंस सब्जेक्ट के हर चैप्टर के कॉन्सेप्ट्स, फॉर्मूला और अन्य जरूरी बातें अलग-अलग कलर में कोट कर सकते हो। स्कूल में जिस चैप्टर की पढ़ाई हुई है, घर आने पर उसकी सभी महत्वपूर्ण बातों को संक्षेप में नोट बुक में लिख लो। इससे एग्जाम के समय रिवीजन करने में अधिक सुविधा होगी। क्लास में मैथ्स के किसी फॉर्मूले को समझने में दिक्कत हो रही है, तो तुरंत टीचर से पूछो।

बैलेंस्ड डाइट

        तुम अपना बेस्ट तभी दे पाओगे, जब वर्ष भर तुम बैलेंस्ड डाइट लोगे। हैवी या ऑयली से परहेज करो। फास्ट फूड्स और तली हुई चीजें खाने से न सिर्फ तुम्हारा हाजमा खराब होगा, बल्कि मोटापा भी बढ़ेगा। इससे तुम्हें अच्छी नींद भी नहीं आ पाएगी। भोजन करने के बाद थोड़ी देर आराम करना मत भूलो। पढ़ाई के दौरान हर एक घंटे पर पांच मिनट का ब्रेक लेना भी बहुत जरूरी है। इससे नीरसता खत्म होती है और व्यक्ति फ्रेश महसूस करता है। इस दौरान तुम म्यूजिक सुन सकते हो, हल्का-फुल्का गेम खेल सकते हो या फिर दोस्तों से बातें कर सकते हो। लेकिन टीवी ज्यादा नहीं देखना चाहिए, क्योंकि तुम्हें अपनी आंखों को भी तो आराम देना है।

एक्सरसाइज, मेडिटेशन भी जरूरी

        एक स्टूडेंट की दिनचर्या में एक्सरसाइज, मेडिटेशन, वॉकिंग आदि शामिल होना बेहद जरूरी है। इससे उसे न सिर्फ रिलैक्स महसूस होता है, बल्कि उसका कॉन्सन्ट्रेशन लेवल भी बढ़ता है। एक्सरसाइज हमें फुर्तीला बनाती है। इससे हमारे शरीर से एंडोर्फिन हार्मोन निकलता है, जो शरीर और दिमाग दोनों को ही रिलैक्स करता है। ध्यान रखो कि एक्सरसाइज एक घंटे से अधिक न हो।

 

बेहतर प्रदर्शन के टिप्स

 

  • 'मैं यह नहीं कर सकता'- इसे मन में कभी मत लाओ। हमेशा स्वयं से कहो- मैं यह कर सकता हूं। मैं यह करूंगा। अपने अंदर पॉजिटिव एटीट्यूड डेवलप करो।
  • अपना आत्मविश्वास हमेशा बरकरार रखो।
  • पढ़ाई को कल पर मत टालो। टाइमटेबल के अनुसार, जिस चैप्टर पर जितना समय देना तय हुआ है, उसे उसी दिन खत्म करने का प्रयास करो।
  • क्लास में यदि तुम्हें कोई टॉपिक या फॉर्मूला समझ में नहीं आ रहा है, तो उसे तुरंत अपने टीचर से समझ लो।
  • अपने वीक और स्ट्रॉन्ग, दोनों प्वाइंट्स पर ध्यान केंद्रित करो।
  • पढ़ाई के दौरान हर एक घंटे पर पांच मिनट का ब्रेक लो।

साभार: दैनिक जागरण

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

youth corner

Who's Online

We have 1216 guests online
 

Visits Counter

750290 since 1st march 2012