Thursday, November 23, 2017
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friendship day

आज सोशल साइटस ने दोस्ती को गली-मुहल्ले और स्कूल-कालेज से आगे ले जाते हुए ग्लोबल बना दिया है, यानी अब हम घर बैठे पूरी दुनिया में दोस्त बना सकते हैं। लेकिन इस दोस्ती के कुछ खतरे भी हैं। फ्रेंडशिप डे (4 अगस्त) के मौके पर जानों आनलाइन दोस्ती के जरूरी टिप्स...

फ्रेंडशिप डे

अगस्त का पहला रविवार दुनिया भर में फ्रेंडशिप डे के तौर पर मनाया जाता है। अपने दोस्तों को पूरा एक दिन देने की शुरूआत 1935 में अमेरिका में हुर्इ थी। हालांकि 2011 में संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली ने इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे 30 जुलार्इ को घोषित किया है।

  • टेलिनार द्वारा की गर्इ एक स्टडी के मुताबिक साल 2012 तक भारत में चार करोड़ किशोर इंटरनेट पर सक्रिय थे।
  • 2017 में यह आंकड़ा 13 करोड़ हो जाएगा।
  • साइबर बुलिंग के मामलों में भारत का विश्व में तीसरा नंबर है।
  • सूचना प्रौधोगिकी कानून की धारा 66ए के तहत साइबर बुलिंग के कुछ मामले कवर होते हैं।

                नौंवीं क्लास में पढ़ने वाले रोहित की दोस्ती अपनी क्लास में पढ़ने वाली राइमा से थी। लेकिन उनके कॉमन फ्रेंड प्रियांशु को उनकी दोस्ती पसंद नहीं थी। वह सबसे कहता कि राइमा रोहित की नहीं, बल्कि उसकी फ्रेंड है। रोहित को प्रियांशु की यह बात बिल्कुल पसंद नहीं थी। उसने प्रियांशु और राइमा की दोस्ती खत्म करने के बारे में सोचा। उसने अपने दोस्त रोहन की मदद से प्रियांशु के मेल अकाउंट के सीक्रेट क्वैश्चन का जवाब पता कर लिया, जिसके जरिए उसे प्रियांशु के फेसबुक का पासवर्ड भी पता चल गया। रोहित ने प्रियांशु के अकाउंट से उसकी और राइमा की फोटो निकालकर उसके साथ छेड़छाड़ की और प्रियांशु के नाम से राइमा को पोस्ट कर दिया। इससे राइमा और प्रियांशु की दोस्ती टूट गई। बाद में पूरी घटना की पड़ताल हुई और हकीकत भी सामने आ गई। इस एक हरकत ने रोहित को अपने सभी दोस्तों से दूर कर दिया।

                तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। दसवीं में पढ़ने वाले शशांक के करीब 300 फेसबुक फ्रेंड्स हैं। जब उसने अपना प्रोफाइल बनाया था, उस समय वह मैथ्स में कुछ वीक था। उसने अपनी क्लास के मैथ्स के मेधावी छात्रों के साथ-साथ ऐसे लोगों को अपना फ्रेंड बनाया, जिनका बैकग्राउंड मैथ्स का है। इसमें उनके मैथ्स टीचर भी शामिल थे। शशांक ने फेसबुक का इस्तेमाल मैथ्स को जानने-समझने में किया। उसके ग्रुप के सदस्य दोस्तों ने भी उसे कठिन इक्वेशंस सॉल्व करने में खूब मदद की। इसका परिणाम यह हुआ कि शशांक ने मैथ्स की परीक्षा में 90 परसेंट नंबर हासिल किए।

                दोस्तो, सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने दोस्ती को एक नया आकाश दिया है। इससे अब दोस्ती, क्लास, गली-मुहल्ले से बाहर निकलकर ग्लोबल हो गई है। लेकिन यदि दोस्त बनाने में हम सचेत नहीं हैं, तो हमें पछताना भी पड़ सकता है। समाजशास्त्रियों का मानना है कि फेसबुक और ट्विटर पर अनजान लोगों से दोस्ती करने से साइबर बुलिंग की आशंका बढ़ जाती है। साइबर बुलिंग का मतलब है इंटरनेट पर किसी के बारे में आपत्तिजनक बातें लिखना, उन्हें शर्मिदा करना, धमकाना या परेशान करना। तुम्हारे साथ ऐसी नौबत ही न आए, इसलिए सोशल साइट्स का हमेशा पॉजिटिव इस्तेमाल करो।

पहले परख, फिर दोस्ती

                वास्तविक जीवन की तरह साइबर व‌र्ल्ड में भी हमें देख-परखकर दोस्ती करनी चाहिए। बिना किसी का बैकग्राउंड जाने उन्हें अपनी फ्रेंडलिस्ट में शामिल करना सही नहीं है। कोशिश करो कि जिन्हें तुम पर्सनली जानते हो, वे ही फ्रेंड लिस्ट में हों। उनके म्युचुअल फ्रेंड्स तुम्हें इनवाइट करते हैं, तो पहले अपने फ्रेंड से उनके बारे में तहकीकात कर लो।

भरोसा ठोंक-बजाकर

                ग्लोबल सिक्योरिटी टेक फर्म मैकएफी ने देश के 10 शहरों में सर्वे के बाद पाया कि 62 परसेंट बच्चे अपनी पर्सनल इंफॉर्मेशन ऑनलाइन शेयर करते हैं। यदि तुम भी ऐसा करते हो, तो पहले उनके बारे में पूरी पड़ताल करके भरोसा कर लो कि उनमें से कोई तुम्हारी बातों का गलत फायदा नहीं उठाएगा। आमतौर पर अपनी कोई भी निजी बात शेयर करने से बचना चाहिए।

जोश में न खो जाए होश

                जब हम किसी बात पर जोश में या गुस्से में आ जाते हैं, तो अपनी सारी भड़ास निकाल देते हैं। क्या कहना है, क्या नहीं, हमें अंदाजा नहीं होता। इसी तरह सोशल साइट्स पर जोश में आकर कही गई बात महंगी पड़ सकती है। इन बातों का गलत इस्तेमाल हो सकता है।

अपलोड सोच-समझकर

                ध्यान रहे इंटरनेट पर जो भी अपलोड करते हो, वह स्थायी होता है। यदि तुम यह सोच रहे हो कि अपनी जानकारी को बदल देने के बाद वह बदल जाएगा, तो तुम गलत हो। जो सामग्री एक बार अपलोड हो जाती है, वह इंटरनेट की संपत्ति बन जाती है। जो जानकारी तुमने डिलीट की है, उसे हासिल करना किसी भी व्यक्ति के लिए मुश्किल काम नहीं।

प्रोफाइल प्राइवेट सेटिंग पर

                अपनी प्रोफाइल को नया लुक देना, अपनी फोटो, अपनी अभिव्यक्ति की स्टाइल बदलना ठीक है, लेकिन इसका ध्यान रहे कि तुम्हारी प्रोफाइल प्राइवेट सेटिंग पर ही रहे। नेटवर्किग साइट पर दी हुई प्राइवेसी पॉलिसी को ध्यान से पढ़ना न भूलो, ताकि पता रहे कि अपनी प्रोफाइल की सुरक्षा के लिए तुम क्या-क्या कर सकते हो।

पैरेंट्स रहें साथ

                अपने पैरेंट्स को भी अपने दोस्तों के बारे में बताओ। यदि कोई परेशानी आ रही है, तो उनसे शेयर करना मत भूलो। वे मुश्किल वक्त में तुम्हारी मदद कर सकते हैं और तुम साइबर बुलिंग जैसी समस्या से बच सकते हो।

साभार: दैनिक जागरण

 

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