Friday, November 24, 2017
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be yourself

अगर संस्थान में अपना अलग वजूद बनाना चाहते हैं, तो कुछ अलग करके दिखाना होगा। ऐसा तभी कर सकते हैं, जब अपने भीतर छिपी प्रतिभा को पहचान कर उसे आगे बढ़ाएंगे और पॉजिटिव अप्रोच के साथ हमेशा कुछ नया सीखने की ललक रखेंगे।अपनी क्षमताओं को कैसे पहचानें, बता रहे हैं

 

  • अपने भीतर छिपी हुई क्षमता और सामर्थ्य को जानें-समझें और उसे डेवलप करें।
  • खुद को हीन समझने की बजाय कॉन्फिडेंस का लेवल बढाएं, ताकि हर चुनौती को फेस कर सकें।
  • अपने प्रोफेशन की चुनौतियों को समझते हुए खुद को लगातार अपडेट करते रहें।
  • टास्क को अचीव करने के लिए अपना सौ प्रतिशत दें। 

सबसे पहले दो उदाहरण देखें। चंद्रप्रकाश पिछले 25 साल से एक कॉरपोरेट कंपनी में काम कर रहे हैं। इस बीच उनके साथ के कुछ लोग कंपनी में प्रशासनिक अधिकारी बन गए। उन सभी के साथ नजदीकी रिश्ता होने के कारण चंद्रप्रकाश को भी थोड़ा-बहुत फायदा होता था, लेकिन अपने मूल काम में उनकी कोई खास पहचान नहीं बन पाई थी। दरअसल, उन्होंने प्रोफेशन की जरूरतों और अपने को अपग्रेड करने पर कभी ध्यान ही नहीं दिया। वे नौकरी को सिर्फ टाइम पास का जरिया मानते रहे। उन्हें अपने संपर्को के बल पर समय-समय पर प्रमोशन का लाभ तो मिल गया था, लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने खुद को प्रूव करने की कभी कोई पहल नहीं की।

                आज हालात काफी बदल गए हैं। प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की तरफ से मिलती चुनौती के कारण उनकी कंपनी भी गुणवत्ता को लेकर बेहद दबाव में है। यही कारण है कि नये बिग बॉस ने क्वालिटी वर्क को लेकर हर किसी पर प्रेशर बनाया है। इससे वे लोग हैरान-परेशान हैं, जिन्होंने कभी आगे बढ़कर कोई काम नहीं किया और सिर्फ संपर्को के बल पर अधीनस्थों को धमकाते रहते थे। आज जब आये दिन ऐसे लोगों की क्लास लग रही है, तो उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें? चूंकि उन्होंने अपने को अपडेट और अपग्रेड भी नहीं किया है, इसलिए मार्केट में भी उन्हें कोई भाव नहीं दे रहा है। ऐसे में वे अपमान का घूंट पीकर जैसे-तैसे नौकरी को निभा रहे हैं.., पर सवाल है कि ऐसा कब तक चलेगा?

                एक दूसरा उदाहरण हरीश का है, जो उसी संस्थान में काम करते हैं। उन्होंने अपने विजनरी अप्रोच से बिग बॉस के सामने काफी बेहतर इमेज बना ली है। लकीर का फकीर होने की बजाय वे हर समय कुछ नया सोचते रहते हैं। उनके पास आइडिया का खजाना होता है। चाहे वह अपने काम से संबंधित हो या फिर किसी और के काम या विभाग से। ऐसा इसलिए है, क्योंकि वह नई चीजों के लिए हमेशा अपने आंख-कान खुले रखते हैं और खुले मन से सोचते हैं। नतीजा यह है कि बॉस जब भी कुछ नया सोचते हैं, तो उनके सामने हरीश का नाम सबसे पहले आता है। ऐसी इमेज का फायदा हरीश को इंक्रीमेंट और प्रमोशन के रूप में भी मिल चुका है। उम्मीद है कि आगे भी उन्हें अपने विजनरी अप्रोच का फायदा मिलता रहेगा।

चुनौतियों को समझें

        पिछले कुछ वर्षो से चल रहे रिसेशन के कारण देश की तमाम कंपनियां आर्थिक संकट से जूझ रही हैं। अब वे कम से कम लागत या स्टाफ में ज्यादा से ज्यादा आउटपुट चाहती हैं। ऐसे में सरवाइव वही कर सकता है, जो अपने काम में स्मार्ट होने के साथ मल्टीटास्कर भी होगा। जो रूटीन के काम में अपना बेस्ट तो देगा ही, खुद पहल करके नये और चुनौतीपूर्ण काम करके अपनी क्षमता को साबित करेगा। साथ ही जो खुद को लगातार अपडेट करता रहेगा। नौकरी को डय़ूटी समझने की भूल न करते हुए अपने प्रोफेशन की चुनौतियों को भली-भांति समझते हुए उसे इंज्वॉय करेगा।

खुद को जानें

        ऐसे माहौल में यह न सोचें कि आपने तो इतने वर्षो से एक ही तरह का काम किया है, इसलिए अब कैसे बदल सकता हूं? ध्यान रखें, आपको सुकून से जीना और अपनी जिम्मेदारियों को कामयाबी से निभाना है, तो संस्थान की जरूरतों के मुताबिक खुद को ढालना और साबित करना होगा। संस्थान आप से जिस भूमिका की अपेक्षा कर रहा है, उसे समझें और उसके मुताबिक खुद को बदलने का प्रयास करें। ऐसा नहीं है कि यह आमूल-चूल बदलाव होगा। जाहिर है यह बदलाव आपके प्रोफेशन के अनुसार ही होगा। क्या आप नहीं चाहेंगे कि लोग आपको जानें-पहचानें? हर नये काम के समय आपको याद किया जाये? आप संस्थान की जरूरत बन जायें? निश्चित रूप से ऐसा चाहेंगे। . तो फिर देर किस बात की। आप अपने भीतर झांकें और अपनी क्षमताओं को टटोलें। विचलित और परेशान होने की बजाय ठंडे दिमाग से सोचें। इसके बाद खुद को बदलने और सीखने के लिए तैयार कर लें। एक बार जब इस राह पर चलेंगे, तो आपको खुद आनंद आने लगेगा। जब बॉस और संस्थान का बेटर रिस्पॉन्स मिलेगा और आप सराहे जाएंगे, तो फिर आप बीते दिनों को भूल जाएंगे।

 

साभार: दैनिक जागरण

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