Thursday, November 23, 2017
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unemployment

 

 

39 प्रतिशत नौकरियां बढ़ी हैं यूपी में

58 प्रतिशत के बढ़ोत्तरी लखनऊ में

2 प्रतिशत नौकरियां कम हुईं देशभर में

लखनऊ। नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए शुभ संकेत है। आर्थिक राजधानी मुंबई, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में जहां नौकरियां कम हो रही हैं वहीं लखनऊ, कानपुर और इलाहाबाद जैसे शहरों में नौकरियों के अवसर बढ़े हैं। लखनऊ में पिछले साल की अपेक्षा इस साल 58 प्रतिशत नौकरियां बढ़ी हैं तो कानपुर में 53 प्रतिशत। नौकरियां इलाहाबाद, आगरा व अलीगढ़ जैसे शहरों में भी बढ़ी हैं। सूबे में नौकरियों की ग्रोथ 39 प्रतिशत रही है।

 

        उद्योग संगठनों की प्रतिष्ठित संस्था एसोचैम ने वित्त वर्ष 2012-13 और 2013-14 की पहली तिमाही (मार्च से जून) में देश भर में नौकरियों के अवसर को लेकर एक सर्वे किया है। इसमें ये संकेत उभर कर सामने आए हैं। एसोचैम के राष्ट्रीय महासचिव डीएस रावत ने सोमवार को सर्वे के निष्कर्षों को जारी किया। एसोचैम ने 56 शहरों और 32 सेक्टर (शिक्षा, आईटी, बैंकिंग आदि) में पिछले साल और इस साल की पहली तिमाही में निकली नौकरियों का अध्ययन किया। इसके लिए 3000 कंपनियों को बेस बनाया गया। सर्वे में आगरा, अलीगढ़, लखनऊ, कानपुर और मेरठ जैसे शहरों में औसत 39 प्रतिशत की ग्रोथ सामने आई है। सर्वे के अनुसार मुंबई में अवसर जहां तेजी से घटे हैं। विकास को लेकर काफी सराहना बटोरने वाले बिहार में भी अवसर कम हो गए हैं।

 

आंकड़ों की जुबानी

          प्रदेश में अप्रैल से जून के बीच 5,230 नौकरियां पैदा हुर्इं। पिछले वर्ष इसी अवधि में 3,750 नौकरियां थीं।

          इनमें से अकेले 2,690 नौकरियों लखनऊ में पैदा हुर्इं जो सर्वाधिक और कुल छह शहरों का 51 प्रतिशत है।

          मेरठ में 16 प्रतिशत, इलाहाबाद में 13 प्रतिशत, आगरा में 10, अलीगढ़ में 7 प्रतिशत नर्इ नौकरियों पैदा हुर्इं।

          मेरठ और इलाहाबाद में नौकरियों में वृद्धि दर 21 प्रतिशत और बाकी शहरों में 8 प्रतिशत रही।

 

छोटे शहरों की ओर बड़ी कंपनियां

        एसोचैम के राष्ट्रीय सचिव डीएस रावत के अनुसार नौकरियों का बढ़ना यह साबित करता है कि अब कम्पनियां द्वितीय               और तृतीय श्रेणी के शहरों और यहां की प्रतिभाओं के प्रति आकर्षित हो रही हैं। यह उनके कारोबार को कम खर्च में        चलाने व प्रतियोगिता में बने रहने में मदद कर रहा है। का कहना है कि उद्यमियों को इस बात का अंदाजा हो गया है      कि प्रतिभाएं सिर्फ मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद और बंगलूरू जैसे बड़े शहरों में नहीं होतीं।

 

शिक्षा और अकादमिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा अवसर

          शिक्षा और अकादमिक: 2,340 नौकरियों इस क्षेत्र से आर्इं, जिनमें से 1,490 नौकरियां लखनऊ में पैदा हुर्इं।

          बीएफएसआर्इ: बैंकिंग, फाइनेंस सर्विसेज और इंश्योरेंस सेक्टर 1,030 नौकरियों देते हुए दूसरे स्थान पर रहा। इनमें     लखनऊ 360 और कानपुर 214 नौकरियों दे पाए।

          आर्इटी: इन्फार्मेशन टेक्नोलाजी और आर्इटी आधारित सेवाओं के क्षेत्र में 300 रोजगार सृजित हुए।

          अन्य: आटोमोबाइल सेक्टर में 220, फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुडस में 160 और रियल एस्टेट में 130 जाब जनरेट हुए।

साभार: अमर उजाला

 

 

 

 

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