Thursday, November 23, 2017
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sports management

क्रिकेट और बैडमिंटन के अलावा कई और खेलों में भी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कायम करने के लिए प्रतियोगिता आयोजित करने का सिलसिला चल पड़ा है। प्रतियोगिताओं को प्रभावी तौर पर सफल बनाने के लिए स्पोर्ट्स इवेंट मैनेजर और मैनेजमेंट की मांग बढ़ रही है। इसीलिए स्पोर्ट्स इवेंट मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स मीडिया प्रभारी, स्पोर्ट्स मेडिसिन, स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट, मेंटर, स्पोर्ट्स लॉयर यानी वकील, एजेंट्स, रिसर्चर और स्पोर्ट्स कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में काम करने की संभावनाएं पैदा हुई हैं।

संस्थान

  • नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स, पटियाला
  • लक्ष्मीबाई नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ फिजिकल एजुकेशन, ग्वालियर
  • एसजीटीबी खालसा कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय
  • आईआईएसडब्ल्यू बीएम, कोलकाता
  • अलगप्पा यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु
  • इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, मुंबई

        पहले क्रिकेट का इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल बना, अब बैडमिंटन का भी लीग बनाया गया है। इससे भारतीय खेल परिदृश्य में नई ऊर्जा भर गई है। क्रिकेट और बैडमिंटन के अलावा कई और खेलों में भी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कायम करने के लिए प्रतियोगिता आयोजित करने का सिलसिला चल पड़ा है। प्रतियोगिताओं को प्रभावी तौर पर सफल बनाने के लिए स्पोर्ट्स इवेंट मैनेजर और मैनेजमेंट की मांग हो रही है। आज नये-नये स्पोर्ट्स क्लब और टीमें कॉरपोरेट घरानों की ओर से गठित हो रही हैं। यही कारण है कि स्पोर्ट्स मैनेजर की खोज हो रही है। स्पोर्ट्स इवेंट मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स मीडिया प्रभारी, स्पोर्ट्स मेडिसिन, स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट, मेंटर, स्पोर्ट्स लॉयर यानी वकील, एजेंट्स, रिसर्चर और स्पोर्ट्स कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में काम करने की संभावनाएं पैदा हुई हैं।

        क्रिकेट वर्ल्ड की बादशाहत मिलने और चैम्पियनों पर धनवर्षा होने के बाद यह समझा जाने लगा कि खेल और उससे जुड़े अन्य कार्यों में बेहतर करियर बनाया जा सकता है। क्रिकेट के अलावा चाहे कुश्ती में सुशील कुमार का ओलंपिक में रजत जीतने का मामला हो या गगन नारंग का शूटिंग में मेडल जीतने का- ऐसे माहौल में खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए बढ़िया स्पोर्ट्स मैनेजमेंट की जरूरत है। यह मैनेजमेंट भारत के लिए नया है लेकिन इसकी मांग बढ़ रही है। अब खेलकूद में लाखों का निवेश करके करोड़ों मुनाफा कमाया जा रहा है, मैदान के अंदर और बाहर करियर के भी तरह तरह के विकल्प सामने आ रहे हैं। युवाओं की जरूरत और बाजार में हुनरमंद लोगों की मांग को पूरा करने के लिए आज विभिन्न जगहों पर स्पोर्ट्स मैनेजमेंट सिखाने के लिए कोर्स भी शुरू किए जा रहे हैं।

कोर्स

        स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कोर्स खिलाड़ियों के खेल से हटकर एक मैच या कार्यक्रम के आयोजन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज का बेहतर प्रबंधन सिखाता है। इसका मुख्य मकसद मनोरंजन के साथ साथ बाजार के हिसाब से खेल को भुनाना है। कोई भी आयोजन दर्शकों को अपनी ओर खींचे और इसमें ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जाए, इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाता है। स्पोर्ट्स की इंटरटेनमेंट वैल्यू क्या है और इसके विविध पहलू क्या-क्या हैं, इनसे रू-ब-रू कराया जाता है। इसमें इवेंट मैनेजमेंट का भी एक हिस्सा शामिल है। इसमें स्पोर्ट्स इवेंट का प्रबंधन और इससे जुड़ी कई चीजें- जैसे हेल्थकेयर, उपकरण, तकनीक, नैतिक मुद्दे जैसे डोपिंग, पर्यावरण और कानून आदि का अध्ययन करना होता है। स्पोर्ट्स के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप, मीडिया और ब्रांड मैनेजमेंट का हुनर सिखाया जाता है। कहने का मतलब यह कि सारी चीजों को देखते हुए किसी खेल का उम्दा आयोजन करना और उम्दा मुनाफा कमाना जैसी चीजें छात्रों को आनी चाहिए।

कोर्स के रंग

        भारत में इसको लेकर फिलहाल निजी संस्थानों में शॉर्ट टर्म या सर्टिफिकेट कोर्स चलाए जा रहे हैं। सरकारी संस्थान इस क्षेत्र में कम ही आए हैं। लक्ष्मीबाई नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ फिजिकल एजुकेशन एक साल का पीजी डिप्लोमा कोर्स करा रहा है। कोलकाता विश्वविद्यालय में भी इसको लेकर कोर्स कराया जा रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय का एसजीटीबी खालसा कॉलेज स्पोर्ट्स इकोनॉमिक्स एंड मार्केटिंग का कोर्स करा रहा है। कोलकाता स्थित आईआईएस संस्थान भी इसमें एमबीए कोर्स करा रहा है। विदेशों में एमएससी इन स्पोर्ट्स मैनेजमेंट या एमबीए इन स्पोर्ट्स मैनेजमेंट का कोर्स प्रचलन में है। स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के अंदर ब्रांड इंडोर्समेंट, स्पोर्ट्स गुड्स प्रमोशन, फैशन गैजेट प्रमोशन, ग्राउंड प्रबंधन, सिलेब्रिटी मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स एजेंट और स्पोर्ट्स टूरिज्म जैसे कई क्षेत्र हैं। पाठ्यक्रम में कोचिंग स्पोर्ट्स, प्रबंधन के सिद्धांत, स्पोर्ट्स पब्लिक रिलेशन, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, वॉलेंटियर मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स प्रमोशन, स्पोर्ट्स मार्केटिंग, स्पोर्ट्स लॉ, बिजनेस प्लानिंग, स्पोर्ट्स इवेंट मैनेजमेंट, स्पोर्ट्स फाइनेंस, मैनेजमेंट ऑफ स्पोर्ट्स, स्पोर्ट्स मीडिया, ऑपरेशंस मैनेजमेंट, प्लेयर कांट्रेक्ट्स, ग्लोबल इकोनॉमिक्स ऑफ स्पोर्ट्स, स्पांसरशिप, स्पोर्ट्स विज्ञापन, ब्रांड मैनेजमेंट और अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स मैनेजमेंट जैसे सभी एरिया में एक हुनरमंद प्रबंधक काम करता है। इसमें वह कम निवेश में ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने की कोशिश करता है।

विशेषज्ञ की राय

        दिल्ली विश्वविद्यालय के खालसा कॉलेज में स्पोर्ट्स इकोनॉमिक्स एंड मार्केटिंग कोर्स की कॉर्डिनेटर डॉ. स्मिता मिश्रा कहती हैं- स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्रबंधन का एक विशेष क्षेत्र है जहां छात्र खेलों में मार्केटिंग की भूमिका की पहचान करते हैं। डॉ. मिश्रा के मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी मैदान में अपना प्रदर्शन दिखाता है तो उस खिलाड़ी के खाने-पीने, पहनने-ओढ़ने और जीवन शैली के प्रमोशन से बाजार में मुनाफा कमाया जा सकता है। खेल के दीवानों और आम दर्शकों का मनोरंजन करके कैसे ज्यादा मुनाफा कमाया जाए, इस पर स्पोर्ट्स मैनेजर नजर रखते हैं।

        विशेषज्ञों के मुताबिक, एक खेल का आयोजन अपने साथ आंख, नाक, कान, त्वचा और जिह्वा यानी पांचों इंद्रियों से जुड़ा बिजनेस भी साथ लाता है। आंख यानी मीडिया के जरिए लाखों दर्शकों के बीच प्रसारण। इसमें टीवी, मोबाइल, इंटरनेट और प्रिंट सबकुछ शामिल हैं। इसके एवज में अच्छा-खासा विज्ञापन हासिल होता है। नाक यानी खेल के आयोजन के दौरान आगंतुकों के बीच तरह-तरह के इत्र का बिजनेस। त्वचा यानी मसाज से जुड़े व्यवसाय और कान यानी रेडियो से खेल का प्रसारण।

अवसर

        स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के विशेषज्ञ की मांग आज स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी हो या रियल एस्टेट कंपनी, सभी जगह है। विभिन्न निजी कंपनियां, जो स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के क्षेत्र में आई हैं, वहां ब्रांड मैनेजमेंट संभालने के लिए ऐसे लोगों की जरूरत पड़ती हैं। तमाम स्पोर्ट्स फेडरेशन अपने यहां अलग से मैनेजमेंट सेक्शन खोल रहा है जहां इसके विशेषज्ञों की जरूरत है। रियल एस्टेट अपने व्यवसाय के प्रचार के लिए खिलाड़ियों को ब्रांड एम्बेसेडर बनाता है। इसका चुनाव और प्रचार का प्रबंधन एक स्पोर्ट्स मैनेजर ही बेहतर तरीके से कराता है। रियल एस्टेट के अलावा इंश्योरेंस कंपनी या अन्य बिजनेस संस्थान अपने व्यवसाय के प्रचार-प्रसार के लिए खिलाड़ियों को एक ब्रांड के रूप में चुनता है। कॉरपोरेट हाउस भी ब्रांड एम्बेसेडर के लिए राष्ट्रीय और विश्व खिलाड़ी को तवज्जो देते हैं, इस कार्य में भी मैनेजमेंट की भूमिका होती है।

फीस

        इस कोर्स की फीस विभिन्न संस्थानों में अलग- अलग है। कहीं दस हजार, तो कहीं बीस हजार रुपये भी हैं। विदेशों से स्पोर्ट्स मैनेजमेंट में एमबीए और एमएससी की फीस लाखों रुपये हैं।

वेतनमान

        स्पोर्ट्स मैनेजमेंट के छात्र की शुरुआती सैलरी 25 से 30 हजार रु. के बीच है। अनुभव और जोखिम के साथ कमाई बढ़ती जाती है। असिस्टेंट या सीनियर मैनेजरों को 50 हजार से एक लाख रुपये तक मिलते हैं।

साभार: राष्ट्रीय सहारा

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