Friday, November 24, 2017
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lalit kumar

झारखंड के छोटे से कस्बे से देश की राजधानी दिल्ली के संसद मार्ग स्थित रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया तक का सफर आसान नहीं हो सकता। टेढ़े-मेढ़े रास्तों से चलकर बतौर आरबीआई असिस्टेंट तक पहुंचे ललित कुमार से जानते हैं, इस राह पर चलने का उनका अनुभव कैसा रहा? उन्हीं की जुबानी

 

आपकी रैंकिंग क्या थी?

        दिल्ली से दो-तीन लाख लोग आरबीआई की इस प्रतियोगी परीक्षा में बैठे थे। उनमें से केवल 65 प्रतियोगियों का सलेक्शन हुआ। मैं 27वें स्थान पर था। आरबीआई असिस्टेंट की पोस्ट पर मैंने ज्वाइन किया। बहुत खुश नहीं हूं। सुकून है कि अब एक स्टैंड जरूर मिल गया है।

परीक्षा में सफल होने के लिए कितनी मेहनत की?

        सच कहूं, तो महज छह महीने की मेहनत से मैंने यह मुकाम हासिल किया है। इससे पहले कभी सोचा भी नहीं था कि प्रतियोगी परीक्षा में बैठना है। जब तय किया तो सबकुछ भूलकर सिर्फ इसी पर ध्यान देने लगा। पहली बार एक अंक से चूकने के बाद कुछ कमजोर पड़ गया था लेकिन फिर खुद को एक और मौका देने की ठान ली। दरअसल, प्रतियोगी परीक्षा में बैठने के लिए उम्र के लिहाज से मेरे पास अंतिम मौका था, इसलिए जानता था कि यह मेरा आखिरी दांव होगा।

तैयारी कैसे की?

        मैथ्स पहले से ही अच्छी थी, इसलिए थोड़ी मेहनत के बाद रीजनिंग भी ठीक हो गयी। बीएससी-आईटी किया हुआ था, इसलिए कम्प्यूटर भी बढ़िया था। शुरू में सवालों को हल करने पर पूरा ध्यान लगाया। बार-बार की प्रैक्टिस के जरिये उन्हें तेजी से हल करने पर जोर दिया। पिछले दस साल के सवालों को बार-बार हल किया और अपना कॉन्फिडेंस बढ़ाया। अंग्रेजी में कमजोर था, इसलिए उसकी प्रैक्टिस पर विशेष ध्यान दिया।

तैयारी में किन-किन पत्र-पत्रिकाओं से मदद मिली?

        न्यूजपेपर में ‘द हिन्दू’ और मैगजीन में ‘प्रतियोगिता दर्पण’। ‘बैंकिंग सर्विस क्रॉनिकल’ ने भी काफी मदद की। उन दिनों ‘बैंकिंग एंड यू’ नामक पत्रिका आती थी, मैंने उससे भी हेल्प ली।

कोचिंग क्लासेस करनी पड़ी?

        यूं तो मैंने अपनी तैयारी पूरी कर ली थी, लेकिन अंतिम समय में एक महीने के लिए कोचिंग इंस्टीट्यूट ज्वाइन किया, यह जानने के लिए कि अच्छे अंक पाने के लिए किस तरह की स्ट्रैटजी बनानी चाहिए।

सफलता का मूल मंत्र क्या है?

        अभ्यास और धैर्य। नियमित रूप से प्रयास करते रहें और धैर्य बनाए रखें तो सफलता दूर नहीं होती। हो सकता है कि लगातार 10 प्रतियोगी परीक्षाओं में आप बेहतर न कर पाएं लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि आप हार मान लें। लगे रहें और अपने प्रयास बढ़ा दें। यकीन मानिए, सफलता जरूर मिलेगी।

कोई संदेश?

        बैंकिंग सेवा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को सिर्फ यही कहना चाहूंगा कि यदि आपने लक्ष्य तय कर लिया है और धैर्य के साथ मेहनत कर रहे हैं तो उसे पाने से कोई रोक नहीं सकता। जीवन में कई अनुभव होते हैं, बुरे भी और अच्छे भी। कई बार हम समझ नहीं पाते लेकिन जीवन के किसी बुरे अनुभव में भी हमारी बेहतरी छिपी होती है। हालांकि, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उन हालातों में भी हमें खुद पर यकीन रखना चाहिए और पूरे जी-जान से बेहतर करने की को शिश करते रहना चाहिए। क्या पता, पहले की तुलना में कोई बेहतर विकल्प बांहें फैलाए हमारे स्वागत के लिए तैयार खड़ा हो।

साभार: राष्ट्रीय सहारा

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