Friday, November 24, 2017
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जॉब में सक्सेस पाने के लिए किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि लगातार व्यावहारिक प्रयोग बेहद जरूरी है..

        सिमोना एक गारमेंट कंपनी में मैनेजर है। वह अक्सर अखबारों, मैगजींस में जॉब में सफल होने के गुर तलाशती रहती है। वह उन्हें बड़े ध्यान से पढ़ती है और अपने कलीग्स से भी इन फोर्मुलों के बारे में शेयर करती है। पर जब बात आती है उन्हें अमल में लाने की, तो वह पुराने ढर्रे पर ही चलती है। हाल में एक रिसर्च रिपोर्ट आई है कि अमेरिका में हर पांचवां व्यक्ति सक्सेस स्टोरी या फ़ॉर्मूला किताबों या अखबारों और मैगजींस में तलाश कर पढ़ता है या पढ़ना चाहता है।

वजह साफ है कि आज हर कोई सफल होना चाहता है। इसका स्वाद चखने के लिए ही वह किताबों में फ़ॉर्मूला, टिप्स या सक्सेसफुल आदमी की कहानी पढ़ता है। लेकिन किताबें पढ़कर उस पर अमल करने वाले लोगों की संख्या काफी कम है। किताब पढ़कर ही कोई व्यक्ति सफल नहीं हो सकता है, बल्कि उसे अपने कार्यक्षेत्र में प्रयोग में लाना भी जरूरी होता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि केवल किताबें पढ़ लेने भर से बात नहीं बनती है। जब तक हम उसमें दी गई बातों पर अमल नहीं करते, तब तक बड़ा से बड़ा विचार भी हमारे काम का नहीं होता है।

 

स्किल और नॉलेज में संतुलन

        सफलता पाने के लिए केवल किताब पढ़ना ही जरूरी नहीं होता है, बल्कि पढ़ी हुई बात को प्रयोग में लाना बेहद जरूरी है। वर्क स्किल और नॉलेज में संतुलन बैठाकर ही कोई व्यक्ति अपने क्षेत्र में कामयाबी पा सकता है। ऑफिस की जरूरतों के आधार पर उसे अपनी स्किल डेवलप करनी पड़ती है। इसके लिए न केवल ऑफिस में आयोजित होने वाली ट्रेनिंग्स में भाग लेना होगा, बल्कि फील्ड वर्क भी करना होगा।

जिम्मेदारी

        सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने वाले अमित कहते हैं कि एक दिन मेरे बॉस ने मुङो नए प्रोजेक्ट पर काम करने की जिम्मेदारी दी। काम नया था, इसलिए असफल होने का डर सता रहा था। हालांकि बॉस अक्सर मुझे प्रोत्साहित करते रहते। कुछ दिनों बाद परिणाम यह यह हुआ कि न केवल संबंधित प्रोजेक्ट पूरा हो गया, बल्कि मैं बॉस से पुरस्कृत भी हुआ। यह सच है कि किताब पढ़ने से हम अपनी कुछ कमियों को दूर कर लेते हैं, लेकिन ऑफिस में जब तक हमें नई जिम्मेदारी नहीं दी जाती है, तब तक हम कुछ नया सीख नहीं पाते हैं।

व्यावहारिक ज्ञान

        केवल व्यावहारिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि उस ज्ञान को अपने कार्यक्षेत्र में अप्लाई करना भी जरूरी होता है। अमूमन किताबों में यह बताया जाता है कि कैसे हम अपनी गलतियों को ढूंढें और उनका निदान करें। यदि हम इन बातों को केवल पढ़ लें और उन्हें अमल में न लाएं, तो नतीजा शून्य ही होगा। आजकल जमाना कॉम्पिटिशन का है, इसलिए आपको अपने कार्यक्षेत्र में सफल होने के लिए नित नए-नए स्किल्स को भी सीखना होगा।

टीम वर्क

        अगर आप प्रतिभाशाली हैं और सोचते हैं कि बिना सहयोगियों की मदद लिए आप सब कुछ कर सकते हैं, तो यह गलत है। आप कभी-भी अपने कलीग्स के साथ प्रतिस्पर्धा की भावना रखकर सफल नहीं हो सकते। आज तक जितने भी महान कार्य हुए हैं, उसके पीछे टीम वर्क है। इसलिए यदि आप अपने काम को बोझ न समझकर समर्पित भाव से अपने सहकर्मियों के साथ मिल-जुलकर करते हैं, तो सफलता मिलनी तय है।

बुद्धि का ज्ञान

        सक्सेस फ़ॉर्मूला वाली किताबें पढ़ने से आपके दिमाग में कई नए-नए आइडियाज आते हैं। यह न केवल व्यक्ति को मोटिवेट करता है, बल्कि पर्सनैलिटी भी डेवलप करता है। इससे हमारी कुछ कमियां भी दूर हो जाती हैं, लेकिन जब तक हम अपनी बुद्धि का इस्तेमाल और परिश्रम नहीं करेंगे, तब तक हमें सफलता नहीं मिल सकती है। जब किसी व्यक्ति को काम की जिम्मेदारी दी जाती है, तो वह अपनी बुद्धि से स्वयं निर्णय लेता है न कि किताब में पढ़ी बातों के आधार पर।

साभार: दैनिक जागरण

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