Friday, November 24, 2017
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son marige

अगर आप चाहते हैं कि आप का बेटा पति बनने से पहले करोड़पति बन जाए तो उसकी तै यारी बेटे के जन्म के साथ ही शुरू करनी होगी। म्यूचुअल फंड कंपनियां ऐसी कई योजनाएं चला रही हैं जिसमें हर माह छोटी- छोटी रकम निवेश करके 25-30 साल की अवधि में एक बड़ी रकम बनाई जा सकती है। यह रकम एक करोड़ या इससे ज्यादा भी हो सकती है

        व्यक्ति अपने जीवन में जो कुछ भी करता है वह अपने व अपने परिजनों के लिए करता है। हर व्यक्ति यह चाहता है कि वह खुद तो खुशहाल रहे साथ ही उसके परिजन भी खुशहाली में जीवन बिताएं। इसके लिए वह अपनी आय बढ़ाने के लिए जीवन भर प्रयत्न करता रहता है। कई परिवार तो ऐसे हैं जिनमें पति-पत्नी दोनों ही सिर्फ इसलिए नौकरी करते हैं ताकि उनके परिजनों खासकर उनके बच्चों को कभी आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। इसके लिए वह अपनी कमाई से कुछ रकम जोड़कर रखते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर इस रकम का बच्चों की उच्च शिक्षा अथवा शादी ब्याह के मौके पर इस्तेमाल किया जा सके। भले ही वह अपने बच्चों को जमा पूंजी के रूप में कुछ न दे पाएं लेकिन उनकी शिक्षा-दीक्षा और शादी-ब्याह का इंतजाम तो कर ही लेते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आप अपने बेटे को जमा पूंजी के रूप में भी कुछ रकम दें तो आप सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए अपने बेटे के जन्म के बाद से ही मासिक तौर पर कुछ बचत शुरू कर दें। इसका फायदा यह होगा कि आपका बेटा शादी की उम्र यानी पति बनने से पहले करोड़पति बन जाएगा।

कैसे करें शुरुआत

        लगभग सभी म्युचुअल फंड कंपनियों ने चिल्ड्रेन फंड समेत दीर्घावधि की कई निवेश योजनाएं शुरू कर रखी हैं। इन योजनाओं में सिप के जरिए 500 रुपए से लेकर आप 5000 रुपए प्रतिमाह निवेश किया जा सकता है। लेकिन निवेश से पहले आपको अपना लक्ष्य तय करना होगा। लक्ष्य तय करते समय दो बातों का ध्यान रखना होगा। पहला यह कि आप अपने बेटे के लिए कितने रुपए जमा करना चाहते हैं। दूसरा यह कि आप कितने साल में इसका रिटर्न चाहते हैं। मान लीजिए आपके बेटे की उम्र पांच वर्ष है और आप उसकी शादी 30 साल की आयु में करना चाहते हैं तो ऐसे में आपके पास 25 साल का समय होगा। आप इन 25 वर्षो के लिए सिप में प्रतिमाह 3000 से लेकर 5000 रुपए तक की रकम निवेश करें। 25 साल बाद जब आप यह रकम निकालेंगे तो आपका बेटा करोड़पति बन चुका होगा। आप इस रकम का कुछ हिस्सा उसकी शादी-ब्याह पर खर्च करें और कुछ रकम उसको जमा पूंजी के रूप में दे दें।

        सिप में आपके बैंक खाते से सीधे रकम कट जाती है इसलिए आपको हर माह रकम देने के लिए कोई चेक इत्यादि नहीं देना पड़ेगा। कुछ वर्षो में तो आप भूल भी जाएंगे कि आपके खाते से कुछ रकम कट रही है। लेकिन जब 25 साल पूरे होंगे तब तक यह रकम एक बड़ी रकम बन चुकी होगी। सिप में निवेश का एक फायदा यह भी है कि अगर आपको आठ-दस साल बाद भी पैसे की जरूरत पड़ती है तो आप अपने निवेश में से कुछ रकम निकाल भी सकते हैं।

योजना के चयन में बरतें सावधानी

        सिप में निवेश करते समय इस बात की सावधानी बरतें कि निवेश ऐसी योजना में होना चाहिए जो पिछले तीन साल से ज्यादा समय से चल रही हो। यह जरूर देखें कि योजना के तहत किस साल में कितना रिटर्न मिला है। तीन साल के एनएवी के आंकड़ों पर भी नजर जरूर डालें। इसके अलावा एक ऐसी योजनाओं का चयन करें, जिसमें परिसंपत्ति आवंटन के कई एक से ज्यादा विकल्प मौजूद हों। उदाहरण के तौर पर जब कोई योजना अपनी पसिंपत्ति का 60 फीसद डेट में और 40 फीसद इक्विटी में निवेश करती है तो इस परिसंपत्ति आवंटन को स्वीकार करने के अलावा हमारे पास और कोई चारा नहीं रह जाता है। इसलिए ऐसी योजनाओं रेगुलर इनकम प्लान, बैलेंस्ड फंड और डेट ओरियंटेड प्लान शामिल हैं जिनमें 60 फीसद डेट में और 40 फीसद इक्विटी में निवेश किया जाता है।

        अत: आप कई विकल्प वाली योजनाएं चुनें तो ज्यादा रिटर्न मिल सकता है। एक ही निवेश के विकल्प वाली योजनाओं में निवेश ज्यादा प्रतिफल नहीं देता। कई योजनाओं में फंड मैनेजर योजना का दीर्घावधि प्रतिफल ठीक नहीं देता। इसकी वजह यह होती है कि वह फंड का प्रबंधन ठीक प्रकार से नहीं कर पाता। ऐसे में आप अपने निवेश पर ज्यादा से ज्यादा रिटर्न देने वाली योजना का ही विकल्प तलाशें।

साभार: राष्ट्रीय सहारा

Comments 

 
#1 Pramod kumar SAINI 2016-10-25 22:47
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