Thursday, November 23, 2017
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mba student

माना जाता है कि जिसके पास एमबीए की डिग्री है, वह तो अच्छा बिजनेस मैनेजर होगा ही! पर ऐसा होता नहीं है। वजह है कि केवल इंस्टीट्यूट में किताबों को पढ़ कर अच्छे एमबीए तैयार नहीं होते। एक छात्र का खुद का दायित्व भी बनता है कि वह कोर्स के दौरान सिखायी जा रही बातों को अपने अनुभव और व्यवहार से बढ़ाए। खुद में एक अच्छे विश्लेषक, टीम लीडर, निर्णायक और समस्या के समाधानकर्ता के गुण विकसित करे। ऐसी कौन-सी बातें हैं, जिन्हें करना किसी प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई कर रहे उम्मीदवारों के लिए जरूरी होता है, बता रहे हैं एग्जीक्यूटिव कोच राकेश जैन

       दिल्ली-एनसीआर के एक प्रतिष्ठित एमबीए इस्टीट्यूट (एफएमएस) से पढ़ाई करने के दौरान और इंस्टीट्यूट्स में बतौर गेस्ट फैकल्टी पढ़ाते हुए मैंने कुछ बातें अनुभव की हैं। मुझे यह देख कर हैरानी होती है कि आजकल अधिकतर छात्र एमबीए क्लास में सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने या इंटरनल असेस्मेंट के नंबर हासिल करने के लिए बैठे होते हैं। उनकी फैकल्टी के लेक्चर में, उस कोर्स में, क्लास में होने वाली चर्चा में कोई खास रुचि नहीं होती। वे या तो अपने मोबाइल में बिजी होते हैं या फिर अपने लैपटॉप पर पिछली क्लास में हुए काम या प्रोजेक्ट को पूरा कर रहे होते हैं। पर प्रश्न यह है कि क्या एमबीए की पढ़ाई ऐसे ही करनी चाहिए? क्या सिर्फ परीक्षा के दिनों में किताबों को पढ़ कर अंक ले आने से ही एमबीए की पढ़ाई का उद्देश्य पूरा हो जाता है? क्या सीजीपीए स्कोर 7 या उससे अधिक लाने से अच्छी नौकरी और एक अच्छे भविष्य की गारंटी मिल जाती है? मेरी राय में यह व्यवहार अनुचित है।

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       वर्तमान में जब एक उम्मीदवार किसी इंस्टीट्यूट में दाखिला लेने से पहले आरओआई(रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट) का हिसाब लगाता है तो क्या कंपनी उस उम्मीदवार को अपने यहां रखते हुए आरओआई का ध्यान नहीं रखेगी? यदि किसी एमबीए स्टूडेंट को अच्छा करियर बनाना है तो जरूरी है कि वह एमबीए की पढ़ाई की अवधि का पूरा फायदा उठाए। अपने अंदर उन स्किल्स और क्षमताओं को विकसित करे, जिनसे आगे चल कर कंपनी के रिक्रूटर्स को उसमें प्रभावी मैनेजर के गुण नजर आएं।

उम्मीदवार क्या करें

यह डिग्री नहीं, मौका है

       यह समझना जरूरी है कि एमबीए सिर्फ एक डिग्री नहीं है। यह मौका है बिजनेस के सभी पहलुओं को समझने का। किसी बिजनेस को चलाने के लिए एक उम्मीदवार को कई तरह के निर्णय लेने होते हैं, एमबीए की पढ़ाई उन निर्णयों तक पहुंचने के लिए तर्कसंगत सोच का आधार तैयार करती है। छात्र यह समझ पाते हैं कि किन निर्णयों से किन नतीजों तक पहुंचा जा सकता है। कहा जाता है कि जितना पसीना कक्षा में बहाओगे, उतना ही लड़ाई के मैदान में कम खून बहाना पड़ेगा। अगर एक छात्र पढ़ाई के दौरान बिजनेस से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को अच्छी तरह समझने की कोशिश करता है तो आगे चल कर वह बेहतर फैसले कर पाता है। थ्योरी पर पकड़ बनाएं।

       यदि आपने एमबीए करने का मन बनाया है तो पहले ही दिन से पढ़ाई को लेकर गंभीर हो जाएं। हर एमबीए प्रोग्राम में पहले छह महीने जो थ्योरी पढ़ाई जाती है, वो थ्योरी अगले डेढ़ साल के दौरान पढ़ायी जाने वाली बिजनेस की फंक्शनल नॉलेज का आधार होती है। ध्यान रखें, हर विश्लेषण का एक सैद्धांतिक आधार होता है। यदि किसी नियम के सैद्धांतिक पक्ष को ही बेहतर ढंग से नहीं समझा तो अगले सत्र में किसी बिजनेस केस का समाधान करते समय जब छात्र से निर्णय लेने की क्षमता का प्रदर्शन करने की अपेक्षा की जाएगी तो वह रटे-रटाए जवाब ही देगा। किसी भी एमबीए प्रोफेशनल से यह अपेक्षा की जाती है कि वह कोई भी फैसला आर्थिक, वित्तीय, बाजार, ऑपरेशन, एचआर, आईटी आदि सभी पहलुओं को ध्यान में रख कर करे। इतना ही नहीं, सैद्धांतिक जानकारी विभिन्न निर्णयों की सफलता और विफलता को समझने का आधार भी होती है। 

समूह में बैठ कर पढ़ाई करें

       यदि संभव हो तो खाली समय मिलने पर समूह में बैठ कर पढ़ाई करें। पढ़े हुए विषय पर चर्चा करें। जिन उम्मीदवारों ने स्पेशलाइजेशन के दूसरे कोर्स का चुनाव किया है, उनकी विषय सामग्री के साथ अपने कोर्स का सामंजस्य स्थापित करें। उदाहरण के लिए अगर आपने मार्केटिंग की क्लास में प्रोडक्ट प्राइजिंग के बारे में पढ़ा है तो यह समझने की कोशिश करें कि किसी प्रोडक्ट की कीमत का फैसला उस कंपनी के कंपन्सेशन स्ट्रक्चर पर क्या प्रभाव डाल सकता है? कैसे प्रोडक्ट प्राइजिंग एक कंपनी की बाजार में छवि और स्ट्रेटजी को प्रभावित करती है

बिजनेस की दुनिया की जानकारी बढ़ाएं

       जितना अधिक संभव हो, व्यवसाय की वास्तविक स्थितियों का विश्लेषण करें। हर रोज एक बिजनेस न्यूजपेपर पढ़ें। उस अखबार की खबरें, लेख, संपादकीय और गेस्ट कॉलम्स को पढ़ कर बिजनेस जगत की घटनाओं पर विशेषज्ञों की राय को समझने का प्रयास करें। खुद से उन्हें विश्लेषित करें। इससे आपको किसी एक विषय के सैद्धांतिक और प्रायोगिक दोनों पक्षों को समझने में मदद मिलेगी। क्लास में केस स्टडीज पर होने वाली चर्चा में भाग लें और खुद से एक बिजनेस केस स्टडी तैयार करें। इससे आपकी कम्युनिकेशन व प्रेजेंटेशन स्किल्स का विकास होगा।

समर इंटर्नशिप प्रोजेक्ट को गंभीरता से लें

       समर इंटर्नशिप प्रोग्राम को छात्र गंभीरता से नहीं लेते। वे उस प्रोजेक्ट को सिर्फ एक रिपोर्ट जमा कराने के तौर पर देखते हैं, जो गलत है। किसी भी स्टूडेंट को यह कोशिश करनी चाहिए कि वो उस प्रोजेक्ट के लिए दिए गए समय का सदुपयोग करे। ज्यादा से ज्यादा इंडस्ट्री विशेष के बाजार, उसके कर्मचारी, कार्य प्रणाली, कस्टमर, उत्पाद व नीतियों को समझने की कोशिश करे। अंत में एक बात ध्यान रखें कि इन 2 सालों में पढ़े जाने वाली कोई बात यदि आपको अभी गैर जरूरी लग रही है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि आगे चल कर भी उसका कोई उपयोग नहीं होगा।

स्पेशलाइजेशन कोर्स में लापरवाही नहीं

       छात्रों को स्पेशलाइजेशन कोर्सेज की क्लास में पढ़ाए जाने वाले विषयों को न सिर्फ गंभीरता से सुनना चाहिए, बल्कि क्लास रूम में होने वाली चर्चाओं में भी भाग लेना चाहिए। विषय से जुड़ी अपनी जिज्ञासाओं को टीचर के समक्ष रखना चाहिए। एक अच्छी चर्चा न सिर्फ विषय को अच्छे से समझने में मदद करती है, बल्कि  उससे अन्य विषयों के बीच तालमेल बनाए रखने में भी मदद मिलती है। यह समझने की कोशिश करें कि पढ़ाए जा रहे कोर्स का बाकी दूसरे कोर्सेज के साथ क्या संबंध है? पढ़ाए जा रहे विषय का किसी भी कंपनी के लिए क्या फायदा हो सकता है? जिस सिद्धांत को वह पढ़ रहा है, वह बिजनेस की कार्यप्रणाली में कहां लागू होता है? इन सब बातों को दिमाग में रखना कोर्स को बेहतर तरीके से समझने में मदद करेगा।

साभार: हिन्दुस्तान

 

 

 

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