Thursday, November 23, 2017
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लखनऊ। आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ में ''चक ग्लाइडर के द्वारा उड़ने का सिद्धांत विषय पर एक लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान, प्रो0 राज कुमार एस. पन्त, उडडन अभियांत्रिकी विभाग, भारतीय प्रोधोगिकी संस्थान, मुम्बई द्वारा बड़े ही रोचक ढ़ग से दिया गया। करीबी 300 की संख्या में विधार्थी एवं अध्यापक इस व्याख्यान से लाभानिवत हुए। व्याख्यान के अंत में अतिथि ने विधार्थियों से वार्तालय किया तथा उनके द्वारा पूँछे गये विविध प्रश्नों के उत्तर बड़े ही सरल तरीके से दिये।

व्याख्यान के दौरान प्रो0 राज कुमार एस. पन्त ने उड़ान के सिद्धान्तों को क्रमवार तरीके से व्याख्या की तथा एक वायुयान कैसे उड़ता है, भी समझाया। उन्होंने ''बुमरैंग वायुयान को भी समझाया तथा एक वायुयान के विभिन्न अंगों की व्याख्या की जैसे कि धड़, पंख, इंजिन, पूँछ इत्यादि। उन्होंने बताया कि एक वायुयान को उड़ाने के लिए चार बलों की आवश्यकता होती है जैसे कि उठना, खिचना, घर्षण और भार। उन्होंने हवाई जहाज में लगने वाले पंखों के बारे में बताया कि वायुयान कैसे ऊँचाई तक उड़ता है और कैसे संतुलित होता है तथा हवा में बिना किस सहारे के कैसे उड़ता है। 

विधार्थियों ने वक्ता से वायुयान, अभियांत्रिकी तथा वायुयान से सम्बनिधत कई सवाल पूँछे जैसे कि किसी-किसी हवाई जहाज में दो पंख क्यों होते हैं?, जब हवाई जहाज उड़ता है तो वह तुरन्त नीचे क्यों नहीं गिर जाता?, जब कोई जहाज उड़ता है तब उसके ऊपर कोई दाब कार्य करता है? इत्यादि।ं
उमेश कुमार, परियोजना समायोजक आंचलिक विज्ञान नगरी ने प्रो0 राज कुमार एस. पन्त का स्वागत किया तथा आंचलिक विज्ञान नगरी के शिक्षा अधिकारी श्री के.के.चटर्जी ने सभी प्रतिभागियों एवं अध्यापकों को धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। श्री कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम के आयोजन का मुख्य उददेश्य भारत में उडडयन प्रौधोगिकी के बारे में विधार्थियों को जागरूक करना था।

 

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