Thursday, November 23, 2017
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Dr.-Ukreja

अगर आप अपने में परिश्रम और लगन की कार्य संस्कृति पैदा कर लेंगे तो कोई ऐसा कारण नहीं है कि आप अपने उददेश्य प्राप्ति में असफल रहें। यह बात इलाहाबाद में शम्भूनाथ ग्रुप आफ इन्स्टीटयूशन्स के विधार्थियों को सम्बोधित करते हुए मशहूर वैज्ञानिक एवं आध्यातिमक विचारक डा0 लाज उत्रेजा ने कही।


संस्थान के अध्यक्ष डा0 डी. एन. तिवारी ने डा0 लाज उत्रेजा का विस्तार से परिचय देते हुए बताया कि डा0 उत्रेजा ने वर्ष 1966 में आई. आई. टी. कानपुर से बी.टेक उत्तीर्ण करने के बाद अमेरिका से डाक्टरेट उपाधि प्राप्त की और वहीं 26 साल नासा के साथ बिताकर अपने देश लौटकर आध्यातिमक शिक्षा देने में लग गये। डा0 उत्रेजा को नासा के सम्मानित जार्ज. (एम. लो.) अवार्ड से विभूषित किया गया।
डा0 उत्रेजा ने अपने देश की अमेरिका से तुलना करते हुए कहा कि दोनों देशों के विधा र्थियों में कोई अन्तर है तो कार्य संस्कृति का है । अपने देश में ज्यादातर लोग आठ घंटे की डयूटी में मुशिकल से दो घंटे काम करते हैं और उसे भी निष्ठा व लगन के साथ नहीं करते हैं। जो लोग पूरी निष्ठा व लगन से काम करते हैं वे अपने उददेश्य में सफल होते हैं। उन्होने कहा कि जापान, अमेरिका और अन्य विकसित देशों में लोग बहुत मेहनत करते हैं और अपने काम को पूरी जिम्मेदारी के साथ करते हैं। उनकी सफलता का यही प्रमुख कारण है । अपने देश में भी इस कार्य संस्कृति को लाना होगा तभी यह देश महाशकित बन सकेगा।
डा0 उत्रेजा ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि आपको अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्र में ही काम मिले। आवश्यकता इस बात की है कि आपको जो भी काम मिले उसे पूरी निष्ठा एवं लगन से करें। यदि आप ऐसा करेंगे तो आपको नये क्षेत्र में भी सफलता निशिचत मिलेगी। उन्होंने अपने बारे में बताया कि उन्होंने पढ़ाई ऐरोनाटिकल इंजीनियरिंग से की और नौकरी अन्तरिक्ष तकनीकी की मिली। उन्होंने बताया कि उस क्षेत्र में भी वह पूरी तरह सफल रहे और उनके नेतृत्व में काम करने वाली कम्पनी ने उच्चतम पुरस्कार भी हासिल किया।
संस्थान के सचिव डा0 के. के. तिवारी व मुख्य प्रशासिनिक अधिकारी आर. के. सिंह ने उन्हें अंगवस्त्रम एवं बुके भेंटकर स्वागत किया। निदेशक प्रो0 के. पी. सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन आशुतोष श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर डीन स्टूडेन्ट वेलफेयर प्रो0 डी. पी. अगिनहोत्री व डीन, ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट जे. पी. मिश्रा भी उपसिथत रहे।

 

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