Saturday, November 25, 2017
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maha shiv ratri
दो दिवसीय आराधना से असम्भव भी होगा सम्भव
(9 मार्च शनि प्रदोष, 10 मार्च महाशिवरात्रि)
व्रत-पूजा विधान से होंगे शिव-शनि प्रसन्न
शिव हैं शनि के गुरू : भगवान शिव ने ही शनि को ब्रह्राण्ड का दण्डाधिकारी बनाया

महाशिवरात्रि से एक दिन पूर्व शनि प्रदोष पड़ने के कारण शनि, राहु, केतु अनिष्ट ग्रहों की पीड़ा से दो दिवसीय आराधना असम्भव को भी सम्भव करेगी। भगवान शिव और शनिदेव का गुरू और शिष्य का संबंध है, देवाधिदेव महादेव देवों के देव हैं। शनिदेव ने भी मनुष्य को साढ़ेसाती, ढैयया आदि के चक्र में डालकर पापमुक्त करने का कार्य महादेव की आज्ञा से ही स्वीकार किया है। शनि प्रदोष साढ़ेसाती, ढैयया दोष निवारक, पद तथा पुत्र प्रदायक माना जाता है। शनि ग्रह की शानित तथा दुष्प्रभाव को कम करने में शनि प्रदोष का विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है। पद तथा पुत्र प्रापित की कामना रखने वालों को भी शनि प्रदोष का व्रत करना चाहिए। 9 मार्च 2013 शनिवार के दिन शनि प्रदोष तथा 10 मार्च 2013 को महाशिवरात्रि होने के कारण शनि प्रदोष में शिव-शनि का पूजन विशेष फलदायी रहेगा, ततपश्चात शिव पूजन समस्त अनिष्ट ग्रहों को शांत कर घर में सुख-समृद्धि, सौभाग्य लाएगा। वर्तमान में शनिदेव तुला राशि में विधमान हैं, तुला शनि की उच्च राशि है। तुला राशि में शनि भ्रमण करने से कन्या, तुला एवं वृशिचक राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है, कर्क और मीन राशि वाले शनि की ढैयया के प्रभाव में है। शनि के अशुभ होने से नौकरी में तबादला, चार्जशीट, निलम्बन, बर्खास्तगी, व्यवसाय में अचानक घाटा, निरन्तर गृह क्लेश, मुकदमेबाजी, पैतृक सम्पति का हाथ से निकलना, जादू-टोने का प्रभाव सर्वोपरि रहता है। अगर आप हैं शनि से परेशान तो शनिदेव की पीड़ा मुक्ति किे लिए महाकाल शिव की प्रदोष बेला में तथा शिवरात्रि के दिन आराधना करें क्योंकि भगवान शिव की शरण में जाकर अपील करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष शास्त्र अनुसार शनिदेव कर्म सिद्धांत एवं ब्रह्रााण्ड के संतुलन हेतु नियम कानून का पालन करवाते हैं। जो वव्यक्त धिर्म के नियम कानून का पालन नहीं करता है, शनि महाराज उसे सोने की भांति तपाकर कुंदन करते हैं। प्रदोषकाल में रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शनि की पीड़ा से मुक्ति किे लिए शनि प्रदोष के दिन प्रदोषकाल में उपाय करना तथा प्रदोष व्रत रखना विशेष फलप्रद रहता है। भगवान शिव ने ही शनि को ब्रह्रााण्ड का दण्डाधिकारी बनाया है। चूँकि भगवान शिव शनिदेव के गुरू हैं अतएव शिव शरणागत को इनकी कृपा मिलनी स्वाभाविक है। शनि प्रदोष उपाय -
1. पंचामृत से शिव मंदिर में रुद्रभिषेक करना लाभप्रद रहेगा।
2. महामृत्युंजय का जप तथा शिव तांडव स्तोत्र का पाठ विशेष फलदायी रहेगा।
बारह राशियों के लिए विशेष उपाय हैं, अपनी ग्रहदशा और राशि अनुसार इन उपायों को अपनाकर शीघ्र सफलता प्राप्त कर बाधाओं को दूर किया जा सकता है।
• मेष राशि - शनि प्रदोष के दिन गरीब असहाय व्यकितयों की सेवा करें, शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें तो शनि कभी भी कार्यों में बाधक नहीं रहेगा।
• वृष राशि - शनि प्रदोष के दिन शनि यंत्र धारण करें, क्योंकि शनि आपकी राशि के स्वामी शुक्र का मित्र है, इसलिए शनि कृपा अनुकूलता प्रदान करेगी।
• मिथुन राशि - शनि प्रदोष के दिन बीच वाली मध्यमा उंगली में काले घोड़े की नाल का छल्ला धारण करें, तो शनि पीड़ा से राहत मिलेगी, साथ ही शनिवार को लोहे धातु से निर्मित वस्तुओं का दान अवश्य करें।
• कर्क राशि - शनि से सम्बंधित वस्तुऐं शनि प्रदोष के दिन घर में स्थापित करे, तो लाभ अवश्य होगा। काले घोड़े की नाल, शनिवार को घर के मुख्य द्वार पर लगाऐं।
• सिंह राशि - अपनी राशि के स्वामी एवं शनि के पिता सूर्यदेव को अघ्र्य दें एवं आदित्य हदय स्तोत्र का पाठ करें। यधपि सूर्य शनि पिता पुत्र होकर एक दूसरे से शत्रुता रखते हैं, तथापि ग्रह राज सूर्य की उपासना करने से शनि कष्टों में कमी आती है।
• कन्या राशि - किसी वृद्ध, अपाहिज अथवा बेसहाय व्यकित की सहायता करें, साथ ही गणपति की आराधना आपकी निर्णय शकित को प्रबल करेगी।
• तुला राशि - आठ बादाम अथवा आठ नारियल बहते पानी में बहायें तथा शनिवार का व्रत रखें तो रूके हुए कार्य शीघ्र गति पकड़ेंगें।
• वृशिचक राशि - अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के प्रति सदव्यवहार करें, काले कुत्ते को गुड़ तथा तेल में चुपड़ी रोटी शनि प्रदोष के दिन खिलाऐं।
• धनु राशि - प्रात:काल काली उड़द की दाल का दान करें, घर में काले घोड़े की नाल मुख्य द्वार पर अवश्य लगाऐं, आसक्त व वृद्ध व्यकितयों के आर्शीवाद से समय मंगलमय व्यतीत होगा।
• मकर राशि - आपकी राशि का स्वामी स्वयं शनि भगवान हैं, अत: विशेष प्रभाव हेतु शनि प्रदोष के दिन से प्रारम्भ कर प्रतिदिन शनि चालीसा का पाठ करें अथवा शनि स्तोत्र का जप करें।
• कुम्भ राशि - कुम्भ राशि का भी स्वामी शनि है, अत: शनिवार के दिन शनि की प्रसन्नता हेतु पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाऐं, शनि का उपासना कर उनका पूजन, व्रत करें और कथा प्रत्येक शनिवार को पड़ें।
• मीन राशि - शनि प्रदोष के दिन शनि से संबंधित तेल से बनी वस्तुओं का दान करें, वृद्धों, अपाहिजों की सेवा करें, दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ विशेष लाभदायक रहेगा।

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