Sunday, November 19, 2017
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इलाहाबाद। कड़कड़ाती ठंड और गलन के बीच रविवार को तपोनिधि श्री आनंद अखाड़े की पेशवाई हुई। अखाड़े के साधु संन्यासियों और नागा साधुओं में कुंभ मेला में प्रवेश करने को लेकर गजब का उत्साह था। सभी महीने भर चलने वाले इस महाकुंभ की पवित्र भूमि में जल्द से जल्द पहुंचने को आतुर दिखे।

जिस ओर से पेशवाई निकलती उस ओर लोगों ने फूल माला लेकर साधुओं को स्वागत किया। आलम यह था कि शास्त्री पुल पर गुजर रहे लोग अपने वाहन खड़े कर यह भव्य नजारा देखने को जुटे। बैंड बाजा के बीच सजे घजे हाथी घोड़े ऊंट बड़े ही मोहक लग रहे थे। अल्लापुर सिथत बाघंबरी मठ के पीछे सिथत आनंद अखाड़े से रविवार सुबह पेशवाई निकली। सबसे पहले अखाड़े के ईष्ट देव का पूजन हुआ। इसके बाद चांदी के रथ पर सवार महंत निकले। पेशवाई की अगुवाई महंत सागरानंद सरस्वती ने की। आगे-आगे नागा साधु तुरही बजाकर पेशवाई का आगाज करते चल रहे थे। पेशवाई लेबर चौराहा, मटियारा रोड, अलोपीबाग होते हुए कुंभ मेला क्षेत्र में पहुंची। हर तरफ हर हर महादेव के जयकारे लग रहे थे और पूरा माहौल भकितमय हो गया।

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इससे पहले शनिवार को अटल अखाड़े की पेशवाई हुई। ठंडे मौसम के बीच जब ढोल ताशों की तानपर भाल और गदा लेकर अटल अखाड़े के नागा संत पेशवाई को निकले। इसी बीच रुक-रुक हो रही फूलों की वर्षा भी लोगों को खासी लुभाती रही। शनिवार को अलोपीबाग मंदिर से आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद महाराज की अगुवाई में पेशवाई हुई।

यह पेशवाई पिछली बार से ज्यादा भव्य रही। इसका कारण इस बार महामंडलेश्वरों की बढ़ी हुई संख्या बताई जा रही है। सभी महामंडलेश्वर चांदी के सिंहासन पर सवार थे। आचार्य महामंडलेश्वर शुकदेवानंद के पीछे प्रेमपुरी, विशोकानंद, शरद पुरी, मधुसूदन गिरि, अमर गिरि आदि के रथ थे। अखाड़े के अराध्य भगवान गणेश के प्रतीक रूप में गजानन की सज्जा आलौकिक थी। इसके पीछे भगवान गणेश की पालकी भी सभी का मन मोह रही थी। पेशवाई में शामिल साधु संत चांदी की लठ हाथ में लेकर कतार में चल रहे थे। उनके ठीक पीछे नागा संन्यासी खूब उछल कूद करते चल रहे थे।

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