Friday, November 24, 2017
User Rating: / 0
PoorBest 

admissions

डीयू की कट ऑफ लिस्ट आने के बाद इस हफ्ते पैरेंट्स के लिए सबसे अहम काम हीरो या जीरो वाली मानसिकता से लड़ना होगा। उन्हें अपने बच्चों को यह बताने की जरूरत है कि कॉलेज एडमिशन के लिए जो चीज अहम है, वह असल जिंदगी में बहुत मायने नहीं रखती। ऐसे स्टूडेंट्स को बताना पड़ेगा कि बेशक कॉलेज की पढ़ाई अहम है, लेकिन जिंदगी के कई फैसले इससे भी अहम हैं। मसलन आप किससे शादी करेंगे, आपके दोस्त कौन हैं, आप क्या पसंद करते हैं, आप किसे गलत मानते हैं और आप किस तरह से अपनी भावनाओं को काबू में रखते हैं। अगर आप क्रिएटिव और जानकार हैं, टीम के साथ मिलकर काम कर सकते हैं, तो एंप्लॉयर्स मार्क्स की परवाह नहीं करते। इस कट ऑफ के मद्देनजर 4 चीजें कहीं जा सकती हैं: हमारे कॉलेज एडमिशन की शर्तें ठीक नहीं हैं।


कॉलेज एडमिशन की गलत शर्तें

कई लोगों का मानना है कि 12वीं के टेस्ट पर बैन लगा देना चाहिए। हालांकि, किसी शख्स के पर्सनल या प्रफेशनल नजरिए से देखें, तो इस परीक्षा में खामियां और खूबियां दोनों हैं। ये टेस्ट स्टूडेंट्स की एकेडमिक क्षमता के बारे में बताते हैं। हालांकि, ये टेस्ट परफेक्ट इसलिए नहीं हैं कि इन पर कई चीजों का असर होता है: एजुकेशन में अंतर, फर्स्ट जेनरेशन लर्नर होने की चुनौती, फर्स्ट लैंग्वेज, घरेलू माहौल, ट्यूशन अफोर्ड करने की क्षमता, परीक्षा के हालात आदि।

फ्लाइन इफेक्ट

जेम्स फ्लाइन का मानना है कि बच्चे की आईक्यू हर जेनरेशन के साथ बढ़ रही है। हालांकि, फ्लाइन इफेक्ट की मान्यता विवादस्पद है। दरअसल, आजकल के बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। अगर वे बेहतर परफॉर्म करते हैं, तो यह उसी का नतीजा है। मैंने हाल में दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के कुछ स्टूडेंट्स के साथ वक्त गुजारा। ये बच्चे हमसे ज्यादा बेहतर ड्रेस पहनते हैं, पैसे भी ज्यादा हैं और टेक्नोलॉजी के मामले भी आगे हैं। हालांकि, वे हमसे ज्यादा स्मार्ट नहीं हैं।

95 पर्सेंट है नया 75 पर्सेंट

पूरी दुनिया में ग्रेड इनफ्लेशन हो रहा है। इंग्लैंड में पिछले 25 साल में ए ग्रेड पाने वाले ए लेवल स्टूडेंट्स की संख्या 9 फीसदी से बढ़कर 30 फीसदी तक पहुंच गई है। एक स्टडी के मुताबिक, आज का ए ग्रेड 1980 के सी ग्रेड के बराबर है। अमेरिकी यूनिवर्सिटी में तकरीबन 45 फीसदी ग्रेजुएट टॉप ग्रेड पाते हैं। 1960 में सिर्फ 15 फीसदी स्टूडेंट्स को ए ग्रेड मिलता था। ग्रेड इनफ्लेशन की कई वजहें हो सकती हैं। मसलन ओपन बुक एग्जाम, ऑब्जेक्टिव एग्जाम, टेस्ट के सवाल पिछले कई एग्जाम के सेट से आना आदि।

 

डिमांड बनाम क्वॉलिटी सप्लाई

कट ऑफ में बेतहाशा बढ़ोतरी की यह सबसे बड़ी वजह है। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉर्मर्स 2013 में 624 नए स्टूडेंट्स को लेगा। जब मैंने 1987 में अप्लाई किया था, तब भी सीटों की संख्या इतनी ही थी। हालांकि, इस बीच डिमांड में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। 12वीं का एग्जाम देने वाले बच्चों की संख्या 1987 में 15 लाख थी। 2013 में यह बढ़कर 1.60 करोड़ हो गई।

लेखक: मनीष सब्बरवाल (लेखक टीमलीज सर्विसेज के चेयरमैन हैं)

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

youth corner

Who's Online

We have 1976 guests online
 

Visits Counter

750774 since 1st march 2012