Thursday, November 23, 2017
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time management

वर्कप्लेस पर चुनौती होती है टास्क को समय पर पूरा करने की, लेकिन यदि टाइम मैनेजमेंट न किया जाए, तो काम अंतहीन लगने लगता है..

धर्मेश साहू एक कंपनी में मैनेजर हैं। रूटीन काम के अलावा क्या काम उनके पास आ जाएगा, निर्धारित नहीं है। उनकी समस्या यह है कि जब कोई एक्स्ट्रा काम आ जाता है, तो वे परेशान हो उठते हैं। क्योंकि वे समझ ही नहीं पाते कि उसे कैसे मैनेज करें? उनका मानना है कि रूटीन के काम ही इतने हैं कि उन्हें समय पर पूरा करना कठिन हो जाता है, ऐसे में एक्स्ट्रा काम कैसे करें?

        आपके पास दफ्तर में सिर्फ आठ घंटे होते हैं, उसी में आपको अपना काम करना होता है। इन आठ घंटों को अपने वर्तमान काम और संभावित काम में आपको व्यवस्थित ढंग से नियोजित करना होता है। इसी को ऑफिस का टाइम मैनेजमेंट कहते हैं। यदि आप जीवन में कुछ बेहतर करना चाहते हैं या अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं, तो समय की इसमें बड़ी भूमिका होती है। आपको अपने समय के उपयोग को लेकर अधिक सचेत और सावधान रहना होगा। आइए, जानें कैसे?

समय की बर्बादी

        आप यह बात जरूर सोचें कि आपके ऑफिस के आठ घंटों में कितना समय बर्बाद होता है। बर्बादी का मतलब यह है कि उससे होने वाले आउटपुट की आपकी कंपनी के लिए कोई उपयोगिता नहीं है। माना कि आप दो बार चाय पीने बाहर जाते हैं, जिसमें आपको करीब आधे घंटे का समय लगता है। इससे आप तरोताजा होते हैं और बाकी का काम करने के लिए आपको एनर्जी मिलती है, तो यह अच्छा है। लेकिन यदि जब-तब या छह-सात बार चाय पीने या किसी और काम से बाहर जाते हैं, तो यह समय की बर्बादी है। ऐसा करने से आप अपना लक्ष्य नहीं पा सकेंगे। इसी तरह आप हर उस गतिविधि की लिस्ट बना लीजिए, जिसमें आपका समय व्यय होता है, लेकिन उसका कोई आउटपुट नहीं मिलता। लिस्ट बनाने से आपका ध्यान उधर जाएगा और ऐसे काम करना आप छोड़ देंगे।

आपका परिवेश

        आपका परिवेश काफी हद तक आपको और आपके काम करने के तरीके को प्रभावित करता है। आप किस तरह के लोगों के बीच रहते हैं, उनसे किन विषयों पर बातचीत करते हैं और किस प्रकार के आयोजनों में जाते हैं, इन प्रश्नों के जवाब तलाशने की भी जरूरत है। क्योंकि आपको तरोताजा और क्रिएटिव बनाने में आपका परिवेश यानी माहौल जिम्मेदार होता है। आपको गैर जरूरी कार्यो, बेकार के वाद-विवादों, गॉसिपिंग, अवरोध पैदा करने वाले तत्वों और मन को विचलित करने वाली चीजों से खुद को दूर रखना होगा, क्योंकि ये चीजें काम से आपका ध्यान हटाती हैं और उसे आगे बढ़ने से रोकती हैं।

उद्देश्य जरूरी

        आप जब भी कोई काम करें, तो उसका उद्देश्य अवश्य हो। यदि आपको लगता है कि आप कोई ऐसा काम कर रहे हैं, जो आपके काम से मेल नहीं खाता, तो उससे खुद को अलग कर लें। ताकि उस काम से बचे समय को आप अपने मुख्य काम में लगा सकें। आप जो भी काम करें वह आपके उद्देश्य के अनुरूप हो और आपके लक्ष्य की ओर जाता हुआ होना चाहिए।

क्षमता को आंकें

        समय-समय पर आपको अपनी क्षमताओं को जांचते रहना चाहिए। साथ ही यह भी कि आप जो भी काम कर रहे हैं, वह कितना उपयोगी होगा। आपने जीवन में जो लक्ष्य निर्धारित किया है, उसे पाने के लिए आपको अपनी क्षमताओं को परखना बहुत जरूरी है। यदि आप देखते हैं कि आपकी वास्तविक क्षमता के अनुरूप आपका काम है, तो यह भी देखना होगा कि क्या वजह है कि काम पूरा नहीं हो पा रहा है। या तो आपने काम का वर्गीकरण नहींकिया है या फिर आप अपने काम के प्रति गंभीर नजरिया नहीं रखते। इस कमी को दूर कर लेंगे, तो आप काम पर फोकस हो सकेंगे और उसे समय पर पूरा भी कर लेंगे।

एकाग्रता लाएं

        जिम्मेदारी का भाव आपके भीतर एकाग्रता लाता है और किसी काम को समय पर पूरा करने के लिए एकाग्रता की जरूरत पड़ती है। जब एकाग्रता होती है, तब आप तब तक अपनी सीट से नहीं उठते, जब तक वह टास्क संपन्न न हो जाए। इसलिए अपने अंदर जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व की भावना लाइए, ताकि आप एकाग्रता से काम कर सकें।

साभार: दैनिक जागरण

 

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