Friday, November 24, 2017
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durga astami

परम्परा अनुसार अष्टमी अथवा नवमी के दिन कन्याओं का पूजन प्राय: हर जगह किया जाता है। अष्टमी का दिन नवरात्र का सबसे पवित्र शक्तिविद्र्धक दिन माना जाता है। इस दिन अगर कन्याओं को अगर अपने हाथ से श्रृंगार किया जाए, तो देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

                देवी के दर्शन करने और नौ दिन तक व्रत करने और हवन करने के बाद कन्या पूजन का बहुत महत्व है। सभी शुभ कार्यो  का फल प्राप्त करने के लिए कन्या पूजन किया जाता है। कुमारी पूजन से सम्मान, लक्ष्मी, विधना और तेज प्राप्त होता है। इससे विघ्न, भय और शत्रुओ का नाश होता है। होम, जप और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होतीं जितनी कन्या पूजन से। नवरात्र में प्रतिदिन कुमारी पूजन करना अत्यंत शुभ फलदायक सिद्ध होता है। देवी भक्त चाहे तो केवल एक कुमारी का नित्य पूजन करे या प्रतिदिन एक-एक कर कुमारियों की संख्या क्रमश: बढ़ाते जाऐं अर्थात प्रथम दिन एक कुमारी का, दूसरे दिन दो कुमारियों का, तीसरे दिन तीन का, इस प्रकार नवरात्र के नवें दिन महानवमी में नौ कुमारी कन्याओं का पूजन करना चाहिए। कुमारी पूजन में एक वर्ष की अवस्था वाली कन्या नहीं लेनी चाहिए क्योंकि गन्ध और भोग आदि पदार्थो  के स्वाद से वह बिल्कुल अनभिज्ञ रहती है। कुमारी वही कहलाती है, जो कम से कम दो वर्ष की हो चुकी हो।

एक कन्या के पूजन से        -              ऐश्वर्य

दो कन्याओं के पूजन से     -              भोग और मोक्ष

तीन कन्याओं के पूजन से -              धर्म, अर्थ, काम

चार कन्याओं के पूजन से  -              राज्यपद

पाँच कन्याओं के पूजन से -              विधना

: कन्याओं के पूजन से    -              षष्टकर्म की सिद्धि

सात कन्याओं के पूजन से -              राज्य

आठ कन्याओं के पूजन से -              सम्पदा

नौ कन्याओं के पूजन से     -              सर्वकार्य सिद्धि की प्रापित होती है।

                दो वर्ष की कुमारी, तीन वर्ष की त्रिमुर्तिनी (त्रिमुर्ति), चार वर्ष की कन्या कल्याणी, पाँच वर्ष की रोहिणी, : वर्ष की काली (कालिका), सात वर्ष की बालिका चंडिका, आठ वर्ष की कन्या शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलाती है। शक्ति की आराधना में दो से दस वर्ष तक की अवस्था वाली कन्याओं का ही पूजन करना चाहिए। इससे कम और अधिक आयु की कन्यायें कुमारी-पूजन के लिए उपयुक्त नहीं है। कुमारी पूजन के बिना शक्ति पिूजा निष्फल हो जाती है, कन्याओं का पूजन करने के बाद उन्हें वस्त्र, अन्न तथा जल अर्पण करना चाहिए।

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