Friday, November 24, 2017
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                पौष पूर्णिमा, भारतीय वर्ष के दसवें पौष माह अथवा पूस का आखिरी पर्व है। इस दिन से ही माघ मास के पवित्र स्नान का शुभारम्भ होता है। माघ मास में संगम तट पर लोग एक महीने का कल्पवास करते हैं। पौष माह की पूर्णिमासी को स्नान का बड़ा महत्व है, जो व्यä पिूरे माघ मास के लिए स्नान का व्रत धारण करते हैं वे अपने स्नान का प्रारंभ पौष पूर्णिमा से शुरू कर माघी पूर्णिमा को समापन करते हैं।

इस दिन स्नान के पश्चात मधुसूदन भगवान की पूजा-आराधना कर उन्हें प्रसन्न करने का प्रयत्न किया जाता है, जिससे मधुसूदन की कृपा से मृत्योपरान्त को स्वर्ग में स्थान मिल सके, ऐसी धार्मिक मान्यताएँ हैं। इस दिन सूर्योदय के पूर्व स्नानादि करके भगवान मधुसूदन की एवं उनके पश्चात ब्राह्राणों को भोजन एवं आराधना यथा शäदिन देने का विधान है। सायंकाल सत्यनारायण भगवान की कथा भी होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार जो इस स्नान को करता है वह देव-विमान में बैठकर विहार करने के योग्य हो जाता है। इस स्नान का पुण्य अर्जित करने वाले पुण्यात्मा स्वर्ग में विहार करते हैं, ऐसी हिन्दुओं की धार्मिक मान्यताएँ हैं। संगम के पवित्र जल में प्राणदायिनी शक्ति विधमान हे। सौ हजार गायों का दान करने का जो फल होता है वही फल तीर्र्थराज प्रयाग में माघ मास में तीस दिन (एक मास) स्नान करने का होता है। माघ स्नान के लिए तीर्थराज प्रयाग को सर्वोत्तम माना गया है, किन्तु यदि कोर्इ श्रद्धालु वहां न जा सके, तो वह जहां कहीं भी स्नान करे, वहां प्रयागराज का स्मरण कर ले। पौष पूर्णिमा से प्रारम्भ कर माघ में स्नान के साथ दान का विशेष महत्व है। मनोवांछित फल की कामना रखने वालों को अपनी शकित एवं सामथ्र्य अनुसार दान अवश्यक करना चाहिए। जाड़ा होने के कारण कम्बल आदि उनी वस्त्रों का दान इस समय विशेष महत्वपूर्ण माना गया है। जो लोग पूरे महीने दान न कर पाएं वे कम से कम पूर्णिमा एवं अमावस्या के दिन ही दान करके अपना लोक-परलोक संवार सकते हैं। माघ मास में स्नान, दान, उपवास व भगवान माधव की पूजा अत्यंत फलदायी बतार्इ गर्इ है। इस विषय में महाभारत के अनुशासन पर्व में इस प्रकार वर्णन है-

दशतीर्थसहस्त्राणि तिस्त्र: कोटîस्तथा परा:। समागच्छनित माघ्यां तु प्रयागे भरतर्षभ।।

माघमासं प्रयागे तु नियत: संशितव्रत:। स्नात्वा तु भरतश्रेष्ठ निर्मल: स्वर्गमाप्नुयात।

                अर्थात माघ मास में प्रयागराज में तीन करोड़ दस हजार अन्य तीथोर्ं का समागम होता है, अत: जो नियमपूर्वक उत्तम व्रत का पालन करते हुए माघमास में प्रयाग में स्नान करता है, वह सब पापों से मुä होकर स्वर्ग में जाता है। पूर्णिमा चन्द्रमा की प्रिय तिथि है, यह तिथि सभी मनोरथों को पूर्ण करने वाली है। जो पूर्णिमा को चन्द्रमा का पूजन करते हैं, वे धन-धान्य से युक्त होते हैं। सोमवार के दिन इस बार पौष पूर्णिमा का पर्व पड़ना विशेष फलदायी रहेगा क्योंकि चन्द्रमा का सम्बंध पूर्णिमा से तथा सोमवार से दोनों से है। सोमवार के दिन पड़ने वाली पौष पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा से सम्बनिधत सभी उपाय विशेष रूप से फलीभूत होते हैं।

उपाय - इस दिन जिनके उपर चन्द्रमा की महादशा चल रही हो अथवा जिन्हें मानसिक उलझनें अधिक रहती हों, वे नौ रत्ती का मोती दाहिने हाथ की सबसे छोटी उंगली में चांदी की अंगूठी में जड़वाकर प्राण-प्रतिष्ठा करवाकर पौष पूर्णिमा के दिन अवश्य धारण करना चाहिए। विशेष लाभ के लिए हाथ की अपेक्षा गले में अद्र्धचन्द्राकार रूपी लाकेट में मोती जड़वाकर धारण करें। व्रती इस दिन प्रात:काल नदी आदि में स्नान करके देवताओं का पूजन एवं पितृों का तपृण करना चाहिए। सफेद चन्दन, चावल, सफेद फूल, धूप-दीप, सफेद वस्त्र आदि से चन्द्रमा का पूजन करें।

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