Saturday, November 25, 2017
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इलाहाबाद । पितर पक्ष में अपने पुरखों के पिंड दान और पित्र तर्पण की शुरूआत इलाहाबाद से होती है  क्योंकि ऐसी मान्यता है की  प्रयाग में  संगम के  जल में मुक्ति के देवता स्वयं  विष्णु  वेणी माधव  के रूप में  वास करने के कारण यह पितरों   की मुक्ति का प्रथम द्वार है | एक पखवारे तक विसर्जनी अमावस्या तक चलने वाले इस पखवारे में यहाँ आकर लोग ना केवल अपने पुरखों की तृप्ति और मुक्ति के पिंडदान और पितृ-तर्पण  करते है बल्कि इससे खुश होकर पूर्वजों  से धन -धान्य , संपदा और स्वास्थ्य का आशीर्वाद भी श्राद्ध करने वाले को  प्राप्त होता है |

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संगम के पवित्र जल में मुक्ति के देवता विष्णु का वेणी माधव रूप में वास माना गया है यही कारण है की पुरखों की मुक्ति और तृप्ति धार्मिक कर्म्काद की यह यात्रा प्रयाग से शुरू होती है | इसके बाद मध्य द्वार काशी और गया होते हुए बद्री धाम में स्थापना के साथ ही यह यात्रा पूर्ण मान ली जाती है .....ऐसा विश्वाश है की पन्द्रह दिनके इस पखवारे में मृत पुरखों की आत्मा जाग्रत हो जाती है जिनकी पहचान वासु ,रुद्र और आदित्य के रूप में की जाती है और यही श्राद्ध के देवता माने गए हैं जो पुरखों तक इन दिनों अभिमंत्रित मंत्रों के साथ भेजे गए भोजन और जल आत्माओं तक ले जाने का कार्य करते हैं |देश के कई हिस्सों से संगम में श्रद्धालु आते है ....

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पितर पक्ष में पिंडा दान करने के बाद इसका भोग यम् के प्रतीक कुत्ता , पितर लोक और देव लोक का संयोजक काक और ब्रम्ह रूपा गौ को भी खिलाया जाता है | पिंड दान के बाद इस पिंड को संगम के जल में तर्पण कर दिया जाता है | संगम के बाद काशी और गया के बाद बद्री धाम में अन्तिम क्रिया संपन्न की जाती है । 

पितृपक्ष में क्या करें

1. पशु-पक्षियों को भोजन कराएं।

2.  गरीबों और ब्राह्मणों को अपने सामर्थ्यनुसार दान करें।

3. शुभ और कोई नए कार्य की शुरुआत न करें।

4. पितृस्त्रोत का पाठ करें

 

 

 

 

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