Monday, November 20, 2017
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jesus
जीसेस के जन्मदिवस पर कि्रसमस मनाया जाता है। परंतु दावे के साथ यह नहीं कहा जा सकता कि जीसेस का जन्म ठीक किस दिन और किस सन में हुआ था।सन 336 में रोम के वेस्टर्न चर्च ने 25 दिसंबर की तारीख को कि्रसमस मनाने के लिए चुना। ईस्टर्न चर्च ने 6 जनवरी को चुना। बीतते समय के साथ 25 दिसंबर से 6 जनवरी तक बारह दिन कि्रसमस के तौर पर जाना जाने लगा।


मदर मेरी की परी से मुलाकात-
करीब दो हजार साल पहले गैबरियल नामक परी (एंजिल) एक यहूदी युवती मेरी के सामने प्रकट हुई और उससे बोली तुम्हारे गर्भ में ईश्वर का पुत्र पलेगा। तुम्हे उसे जन्म देना है जिसका नाम जीसेस होगा। मेरी उस समय अविवाहित थी और मां बनने की बात पर विचलित हो गई। उन्होने परी से पूछा कि उसकी गर्भ में संतान कैसे आ सकती है। परी ने कहा ईश्वर के लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं । तुम ईश्वरीय शकित से गर्भधारण करोगी। मेरी को भगवान में पूरी आस्था थी। उन्होने कहा मैं ईश्वर की सेविका हूं जैसा वह चाहते हैं वैसा ही होगा।

जीसेस का जन्म-

mother mary and jesus
मेरी और उसके होने वाले पति जोसेफ नाजरेथ नामक एक शहर में रहते थे। रोम के सम्राट सीजर अगस्टस के निर्देश पर जनगणना पंजीकृत कराने के लिए उन्हें बेतलेहम जाना पड़ा। बेतलेहम से नाजरेथ की दूरी 65 मील (105 किमी) था और उस जमाने में यह दूरी तय करने में कई दिन लगते थे।
जब वह बेतलेहम पहुंचे तब उन्हें रहने के लिए मुसाफिरखाने में जगह नहीं मिली। उन्होने अस्तबल में रात बिताने की सोची। उसी रात जीसेस का जन्म हुआ। जन्म के बाद नवजात शिशु को लिटाने के लिए पालना नहीं था अत: शिशु जीसेस को जानवरों के चारा खाने के नाद में लिटाया गया। नाद के नीचे पड़े पुआल ने शिशु के बिस्तर का काम किया। 
उसी रात बेतलेहम के निकट मैदानों में कुछ गड़रिये अपने अपने भेड़ों पर नजर रख रहे थे , एक परी ने प्रकट होकर कहा धरती को बचाने वाले मसीहा ने जन्म ले लिया है। गड़रियों ने जीसेस के दर्शन किये और यह खबर चारों तरफ फैला दी।

हेरोड और जीसेस-
कुछ समय बाद , पूर्वी देशों के तीन विद्वान लोगों ने एक विशेष प्रकार का तारा देखा। ऐसा तारा इस बात का संकेत था कि नये राजा जन्म हो चुका है। वह लोग नये राजा को देखने जरूसलम और बेतलेहम के निकट स्थित जूडिया आए। जूडिया के राजा हेरोड ने उन लोगों को बुलाकर कहा कि नये राजा की खोज करके उन्हें पता बता दें ताकि वह भी नये राजा की पूजा कर सकें। पूर्वी देश के तीन विद्वान लोग तारे की दिशा में बढ़ते गये अंत में उन्होने एक मकान देखा जिसके ठीक ऊपर वह तारा था। उस मकान में जाकर उन लोगों ने मदर मेरी और जीसेस के दर्शन किये, पूजा की, साथ में लाए उपहार जीसेस को दिये। इसके बाद उन्हे सपना आया कि वह लौटकर जूडिया के राजा हेरोड के पास वापस न जाएं। वह लोग दूसरे रास्ते से घर लौट गए।

राजा हेरोड ने जैसा उन लोगों से कहा था वैसा नहीं था। हेरोड झूठ बोल रहा था। असल में उसे डर था कि यह नया राजा उसे हटाकर जूडिया का राजा बन जाएगा । परंतु उसे पता नहीं था कि नये राजा का जन्म जूडिया पर राज्य करने के लिए नहीं हुआ है उसे ईश्वर की संपूर्ण धार्मिक राज्य का राजा बनना था। जब पूर्वी देशों के वह विद्वान लोग हेरोड के पास लौटकर नहीं आए तो वह गुस्सा हो गए क्योंकि वह जीसेस को मारना चाहते थे। उन्होने बेतलेहम में अपनी सेना भेजकर दो साल से कम उम्र के सभी बच्चों को मरवा दिया। उसने सोचा कि जीसेस भी मर चुका है परंतु इससे पहले ही ईश्वर ने जोसेफ को मिस्र पलायन करने के लिए कहा। जोसेफ मेरी और जीसेस को लेकर मिस्र चले गये और हेरोड के मौत के बाद ही पुन: नाजरेथ वापस आए।

जीसेस के पिता जोसेफ
जीसेस के जन्म के पहले मेरी की जोसेफ से मंगनी हो गयी थी जो पेशे से बढ़ई थे। मेरी आश्चर्यजनक तरीके से गर्भवती हो गयी। जब मेरी ने जोसेफ को उसके गर्भवती होने की खबर सुनाई तो वह दुखी हुए। उन्हे पता था कि बच्चा उनका नहीं है। वह मेरी को बेवफा समझ रहे थे। इसी बात पर जोसेफ मेरी को छोड़ भी सकते थे यहां तक की यहूदी कानून के अनुसार पत्थर मारकर खत्म भी कर सकते थे। उन्होने सबसे पहले मंगनी तोड़ने की सोची थी पर बाद में एक सभ्य पुरूष की भांति मेरी को और शर्मिंदा न करते हुए चुपचाप कुछ करने का सोचा । इसके बाद ईश्वर ने उनके सपने में एक परी भेजा जिसने मेरी के गर्भधारण की सारी बातें बताईं । सुबर जोसेफ उठे और मेरी को अपने घर ले आए। शायद उनमें एक सभ्य पुरूष के गुण मौजूद थे इसीलिए ईश्वर ने उन्हें धरती पर जीसेस के पिता बनने के लिए चुना।

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