Monday, November 20, 2017
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धनतेरस के शुभ अवसर पर सोने-चांदी के सिक्के, गहने, धातु के बर्तन इत्यादि खरीदने का प्रचलन अनादिकाल से चला आ रहा है। अमीर हो या गरीब, धनतेरस के दिन हर व्यक्ति अपने घर में कुछ न कुछ खरीदकर अवश्य लाता है। ऐसा करने से जहां घर में सुख-समृद्धि का वास होता है वहीं घर से रोग, शोक दूर भागते हैं। ग्रह नक्षत्रम् के ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार धनतेरस के शुभ मुहूर्त में क्रय किए गए सोने-चांदी के गहने एवं धातुओं की चमक व्यक्ति के भाग्य को चमकाकर अरिष्टों से रक्षा करती है। पौराणिक संदर्भों के अनुसार एक राजकुमार के भाग्य में उसके विवाह के चैथे दिन मृत्यु लिखी थी। जब उसका विवाह हुआ तो उसकी नवविवाहिता पत्नी ने अपने सभी सोने-चांदी के गहने, सिक्के, हीरे-जवाहरात आदि के ढेर शयनकक्ष के सभी दरवाजों पर लगाकर महल का कोना-कोना प्रकाशित करवा दिया। निश्चित समय पर जब मृत्यु के देवता यमराज सर्प का रूप धारण करके आए तो सोने-चांदी की चमक से उनकी आंखें चुंधिया गईं और वे कुछ देख नहीं पाए जिसके कारण उसके पति के प्राणों की रक्षा हुई। तब से उस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाने लगा।

धातुओं का ग्रहों से सम्बन्ध - ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार धातुओं का सम्बन्ध ग्रहों से है और धनतेरस पर धातुओं से निर्मित बर्तन, सिक्के, गहनों की खरीददारी बेहद कल्याणकारी होती है। ताम्बे के प्रयोग से मंगल ग्रह, चांदी से चन्द्रमा, स्वर्ण से सूर्य ग्रह को बल प्राप्त होता है। चांदी के बर्तनों का क्रय एवं चांदी के ग्लास में जल आदि पीने से चन्द्रमा अनुकूल होता है जिससे व्यक्ति का दिमाग ठंडा एवं मन प्रसन्न ठंडा रहता है। ताम्र पात्र का प्रयोग करने से मंगल बलवान होता है जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है। स्वर्ण धारण एवं प्रयोग करने से सूर्य एवं बृहस्पति को बल मिलता है।

धनतेरस नाम कैसे पड़ा - देवताओं और दानवों द्वारा किए जाने वाले समुद्र मंथन के दौरान देवताओं के वैद्य धनवन्तरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे। धनतेरस नाम उन्हीं धनवन्तरि के नाम से प्रचलित हुआ। कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि धनतेरस के रूप में मनाई जाती है। धन यानि धन-धान्य और तेरस यानि हिन्दु माह की तेरहवीं तिथि, यह दीपावली से दो दिन पहले पंचपर्व का शुभारम्भ करती है। इस दिन धनवन्तरि पूजन, बर्तन-आभूषण आदि का क्रय, यम दीपदान, कुबेर पूजन इत्यादि कार्य सम्पन्न किए जाते हैं। धनत्रयोदशी के दिन सायंकाल पारिवारिक सदस्यों की रक्षा हेतु एवं मृत्युभय निवारण हेतु घर के बाहर दीपदान करना चाहिए।

जानिए आपकी राशि अनुसार क्या खरीददारी लाएगी आपके घर में शुभता - राम नाम सेवा संस्थान की अध्यक्ष गुंजन वार्ष्णेय के अनुसार धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तु व्यक्ति के पास स्थाई रूप से रहती है। लोग अपनी सामथ्र्य अनुसार सोने, चांदी अथवा अन्य उपयोगी वस्तुओं का क्रय करते हैं, अगर राशि के अनुसार धनतेरस के दिन सोने-चांदी के सिक्कों एवं गणेश-लक्ष्मी के साथ ही राशि के स्वामी से सम्बंधित वस्तुओं का संग्रह किया जाए तो वर्ष भर समृद्धि बनी रहती है।

  • मेष - ताम्बे का बर्तन एवं मूंगे या लाल रंग से रंगे हुए लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा।
  • वृष - चमकदार पालिश वाले बर्तन, चांदी या हीरा, पीले रंग के लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
  • मिथुन - काँसे का बर्तन अ©र हरे रंग से रंगे लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा।
  • कर्क - चांदी के बर्तन, सिलवर कलर के रंग से रंगे लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
  • सिंह - ताम्बा या गोल्डन पॉलिश के बर्तन, गोल्डन रंग से रंगे लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
  • कन्या - काँसे का बर्तन, श्री यंत्र एवं हरे रंग से रंगे लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
  • तुला - इलेक्ट्रानिक गुड्स, सिल्वर के बर्तन एवं प्लास्टर आफ पैरिस के लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
  • वृश्चिक - ताम्बे का बर्तन, सोने के आभूषण, मूंगा या लाल रंग से रंगे लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
  • धनु - पीतल का बर्तन, सोने का आभूषण, गोल्डन कलर या पीतल के लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
  • मकर - लोहे का बर्तन, नील वर्ण या श्याम वर्ण के लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
  • कुम्भ - भारी वाहन, मिश्रित धातु के बर्तन अ©र गोल्डन कलर से रंगे लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।
  • मीन - पीतल का बर्तन, सोने चांदी का आभूषण, गोल्डन रंग से रंगे लक्ष्मी गणेश प्रतिमा।

 

 

 

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