Monday, November 20, 2017
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ganpati 2016

सन् 2016 का गणपति महोत्सव 5 सितम्बर से प्रारंभ हो गया है। गणेश चतुर्थी, हिंदू त्यौहारों में सबसे पवित्र त्यौहार माना जाता है। बुद्धि और समृद्धि के देवता भगवान गणेश का जन्म इस महोत्सव के दौरान मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद के महीने में शुक्ला चतुर्थी के दिन प्रारंभ होता है। यह त्यौहार दस दिनों तक चलता है और अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होता है।


भगवान गणेश का सिर हाथी का कैसे हो गया यह तो हम सब जानते हैं, आईए आज गणेश चतुर्थी का इतिहास जानने की कोशिश करते है। यू ंतो पता नहीं कि गणेश चतुर्थी पहली बार कब मनाया गया परंतु इतिहाकार श्री रजवाड़े के अनुसार, पहली बार यह त्यौहार सातवाहन, राष्ट्रकूट एवं चालुक्य राजवंशों के शासनकाल में मनाया गया। ऐतिहासक तथ्य बताते हैं कि महाराष्ट्र में इस त्यौहार का प्रारंभ छत्रपति शिवाजी महाराज ने किया। इसके पीछे संस्कृति और राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने की उनकी मंशा थी। पेशवा के शासनकाल के दौरान भी ऐसे ही त्यौहार मनाए जाने का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि भगवान गणेश पेशवाओं के पारिवारिक देवता थे। पेशवाओं का शासनकाल समाप्त होने के बाद गणेश चतुर्थी सन् 1818 से 1892 तक घर.घर में मनाया जाने वाला त्यौहार बनकर रह गया।

बाल गंगाधर तिलक एक भारतीय राष्टवªादी, समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। अपार श्रद्धा और प्रेम से भारत विशेषकर महाराष्ट्र के लोग तिलक को ‘‘ लोकमान्य’’ कहकर बुलाते थे। तिलक ने ही घर घर में गणेश चतुर्थी पर मनाए जाने वाले सलाना गणेश त्यौहार को सार्वजनिक त्यौहार बना दिया। लोकमान्य ने देखा कि भगवान गणेश की पूजा समाज के सभी स्तर के लोग करते हैं। वह समझ गए कि गणेश चतुर्थी को राष्ट्रीय त्यौहार का रूप दिया जा सकता है। इससे ब्राहमण और अन्य जातियों के बीच भेद.भाव कम हो जाएगा और इनके बीच एकता आएगी। वह समझ रहे थे कि भारतीय अंग्रेजों से तब तक लड़ नहीं पाएंगे जब तक उनमें एकता न हो और इसके लिए उन्हें गणेश चतुर्थी सबसे उपयुक्त अवसर प्रतीत हुआ।
1893 के आस पास तिलक ने स्वंय ही गणेश उत्सव को सामाजिक और धार्मिक त्यौहार के रूप में मनाना प्रारंभ किया। वह पहले व्यक्ति थे जिन्होने पंडाल में बड़े गणेश प्रतिमाओं को स्थापित करना और दस दिन तक गणेश उत्सव मनाने के पश्चात प्रतिमाओं को विसर्जित करने की प्रथा प्रारंभ की। अंग्रेजी शासन के दौरान सामाजिक और सार्वजनिक बैठकों पर बंदिश थी, तब गणेश उत्सव सभी जाति और वर्गों के लोगों के लिए मिलन स्थली बना। तब से आज तक गणेश उत्सव महाराष्ट्र और अन्य प्रदेशों में उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता है। 1947 में भारत स्वाधीन होने के बाद यह राष्टीªय त्यौहार बन गया।
गणपति महोत्सव आज संपूर्ण भारत में मनाया जाता है परंतु महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के गणपति महोत्सव की बात कुछ और ही होती है। नेपाल में भी इसे मनाया जाता है।
आज दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। इस बदलती हुई दुनिया में गणेश महोत्सव ने भी सात समुंदर पार अपने पांव पसारे हैं। जहां पर भी हिंदू समुदाय की उपस्थिति है वहीं गणेशजी भी विराजमान होते हैं।

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