Thursday, November 23, 2017
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भाई दूज का त्यौहार भारत और नेपाल में मनाया जाता है। यह एक हिंदू त्यौहार है और पांच दिन के दिपावली पर्व के अंतिम दिन मनाया जाता है। इस दिन को रक्षा बंधन की तरह ही मनाया जाता है। बहनें भाई को राखी बांधने के स्थान पर टीका लगाती हैं और उनके लंबे तथा खुशहाल जिंदगी के लिए प्रार्थना करती हैं।


भैया दूज प्राचीन काल से ही मनाया जा रहा है। परंतु यह कितना प्राचीन है और कब से मनाया जा रहा है यह तो नहीं पता लेकिन भैया दूज के विषय में कुछ कथाएं हैं जिससे हम यह समझ सकते हैं कि यह कितना प्राचीन है।
युगों युगों पहले की बात है, सूर्य देवता का विवाह बेहद खूबसूरत राजकुमारी सामजना से हुआ। उन्हें संज्ञा भी कहते थे। विवाह के एक वर्ष के भीतर ही उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, एक पुत्र और एक पुत्री। उनका नाम था यम और यमुना या वरनी। दोनों भाई बहन एक साथ बड़े होने लगे।
समय बीतने लगा, अपने पति सूर्य का तेज संज्ञा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और उसने धरती पर वापस जाने का फैसला किया। जाते समय वह अपनी परछाई वहीं छोड़ आई ताकि सूर्य देव को पता न चले कि वह वहां नहीं है। लेकिन उसकी परछाई बहुत ही क्रूर सौतेली मां बन गई। उसने अपने बच्चों को जन्म दिया तथा यम और यमुना को स्वर्ग से निकालने के लिए सूर्य देव को मना लिया। यमुना धरती पर गिरी और यमुना नदी बन गई, यम नरक में गए और मृत्यु के देवता बन गए। 
वर्षों बीत गए, यमुना का विवाह एक सुंदर से राजकुमार के साथ हो गया।वह एक खुशहाल जिंदगी गुजार रही थी परंतु उसे अपने भाई की बहुत याद आती थी। यम को भी बहन की बहुत याद आती। एक दिन उन्होनें बहन से मिलने का निश्चय किया।
यमुना भाई के आने का समाचार सुनकर बेहद खुश हुई। उसने भाई के सम्मान में एक दावत का आयोजन किया। यह दिपावली के दो दिन बाद था अतः घर सजा हुआ था। यम, बहन के स्वागत सत्कार से बेहद खुश हुए। एक लंबे अलगाव के बाद भाई बहन ने एक दूसरे के साथ वक्त गुजारा। 
जब यम नरक लौटने लगे तो उन्होने बहन से कहा कि बहना तुमने इतनी अच्छी तरह से मेरा स्वागत सत्कार किया पर मैं तो तुम्हारे लिए उपहार भी नहीं लाया। तुम जो भी मांगोगी वह तुम्हें मिलेगा। यमुना ने यम से मांगा कि इस दिन पर प्रत्येक भाई अपने बहन को याद करेगा और हो सके तो अपने बहन के घर जाएगा। बहनें इस दिन अपने भाई की ख्ंुाशहाली के लिए प्रार्थना करेंगी। इस तरह भाई दूज का त्यौहार अस्तित्व में आया।
एक दूसरी कथा कहती है कि नरकासुर राक्षस को मारने के बाद श्री कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के पास गए। सुभद्रा ने श्री कृष्ण का स्वागत दीया, फूल और मिठाइयों से किया। सुभद्रा ने अपने भाई के कपाल पर एक टीका भी लगाया, पवित्र सुरक्षा टीका।
भाई दूज इसलिए भी मनाई जाती है क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर निर्वाण को प्राप्त हुए। उनके भाई राजा नंदीवर्धन बहुत दुखी हुए तब उनकी बहन सुदर्शना ने उन्हें संभाला था। तब से महिलाएं इस दिन पर भाई के लिए मंगल कामना करती हैं।
दिपावली के दो दिन बाद पड़ने वाले इस पर्व से भाई बहन का संबंध गहरा होता है। भाई बहन इस त्यौहार के लिए साल भर इंतजार करते हैं। बहनें इस दिन अपने भाई के माथे पर एक टीका लगाती हंैं और मिठाइयां खिलाती हैं तथा उनकी लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं। भाई बहनों को उपहार देते हैं। भाई दूज के त्यौहार के प्रारंभ को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं, उनमें कितनी सच्चाई है यह कोई नहीं कह सकता।परंतु यह प्रथा बहुत दिन से चली आ रही है। अगर बहन इसे केवल एक प्रथा समझकर टीका लगाएगी और भाई महंगा तोहफा देकर अपना कर्तव्य पूरा कर दे तो यह मात्र एक प्रथा ही बनी रहेगी। इसे केवल प्रथा न बनाएं, त्यौहार समझकर भावनात्मक जुड़ाव बनाते हुए सच्चे मन से एक दूसरे की मंगल कामना करते हुए इसे मनाएं तो भाई बहन के संबंध हमेशा मधुर बनी रहेगी और वह सुदृढ़ होती जाएगी।

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