Saturday, November 25, 2017
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laxmi ganesh puja

दीपावली के दिन लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा का विधान है, जो शुभ और लाभ के प्रतीक हैं, पूरे मनोभाव से गणेश-लक्ष्मी का आहवान एवं पूजन मनोकामनाएं पूर्ण करता है।

 

दीपावली पूजन के लिए शुभ मुहूर्त वृष अथवा सिंह लग्न का चयन कर पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुंह कर शुद्ध वस्त्र धारण कर पूजन प्रारम्भ करें।

लक्ष्मी पूजन की सामग्री - लक्ष्मी, गणेश, हनुमान, कुबेर आदि देवी-देवताओं की प्रतिमाएं, श्रीयंत्र, महालक्ष्मी आदि धन प्रापित के यंत्र, अक्षत (साबुत चावल), पुष्प, पुष्पमाला, रोली, मोली, लौंग, पान, सुपारी, धूप, कपूर, अगरबत्ती, गुड़, धनिया, ऋतुफल, जौ, गेहूँ, दुर्बा, चन्दन, सिन्दूर, दीपक, रूर्इ, प्रसाद, नारियल, पंचरत्न, यज्ञोपवीत, पंचामृत, गंगाजल, लार्इ, लावा, लाल वस्त्र, इत्र, फुलेल, चौकी, कलश, घी, कमलपुष्प, कौड़ी, गोमती चक्र, कमलगटटा, इलायची, माचिस, दक्षिणा हेतु नकदी, चांदी के सिक्के, बहीखाता, कलम-दवात इत्यादि। 

पूजन विधि - लक्ष्मी पूजन के समय परिवार का प्रत्येक सदस्य पूजा स्थल पर उपसिथत रहे। लकड़ी की चौकी या पीढ़ा को हल्दी के लेपन से शुद्ध कर शुद्ध वस्त्र बिछाकर भगवान श्री गणेश जी को आसन देते हुए, गणेश जी के दाहिने लक्ष्मी जी को स्थापित करें तथा बायीं ओर कुबेर जी को स्थापित करें, दुर्वा से गंगाजल पूरे घर में छिड़कें। दीप प्रज्जवलित करें, एक थाली में अष्टदल केसर युक्त चन्दन से बनाकर उस पर श्री यंत्र, कुबेर यंत्र, महालक्ष्मी यंत्र या स्वर्ण-चांदी की प्रतिमा स्थापित करें, पूजा सामग्री अपने समीप रखें। तीन बार आचमन करें, दाहिने हाथ में अंगूठी पहने या पवित्री धारण करें तथा अपने ऊपर एवं पूजा सामग्री पर नीचे दिए गए मंत्र के साथ गंगाजल छिड़कें। 

ओम अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतो·पि वा।
य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्राभ्यन्तर: शुचि: ।।

संकल्प - इसके उपरांत प्राणायाम, न्यास, आसन शुद्धि, चंदन धारण, संकल्प, कलश पूजन आदि का विधान है किन्तु आम गृहस्थजनों के लिए दीपावली पूजन के समय इतना कर पाना तथा स्वयं संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण करना अगर कठिन लगे, तो आचमन के पश्चात पूरे मनोभाव से चंदन धारण करें, धरती मां का स्पर्श करें तथा इसके उपरान्त संकल्प करें, ''मैं (अपना नाम), गोत्र (अपना गोत्र बोलें), भारतवर्ष के राज्य (अपने राज्य का नाम), स्थान (जहां आप रहते हैं, उस स्थान का नाम), कुल (अपने कुल का नाम), कार्तिक मास की अमावस्या तिथि एवं दिवस मंगलवार को देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने हेतु श्री लक्ष्मी पूजन करने का संकल्प लेतालेती हूं। 

गणेश जी का आहवान एवं पूजन - गणेशजी की मूर्ति पर या थाल में स्वसितक बनाकर सुपारी पर मौली लगाकर रखें। उसके उपरान्त गणेशजी का आहवान करें: 

सिद्धि सदन गजवदनवर, प्रथम पूज्य गणराज। 
प्रथम वन्दना आपको, सकल सुधारो काज।।
जय गणपति गिरजासुवन ऋद्धि-सिद्धि दातार।
कष्ट हरो मंगल करो नमस्कार शतम्बर।।

आहवान करने के पश्चात हाथ में चावल लेकर गणेशजी पर छोड़ते हुए श्रीगणेश को आसन दें। अब गणेश का पूजन निम्नलिखित प्रकार से करें: तीन बार जल के छींटे दें और बोलें: पाध स्वीकार करें, अघ्र्य स्वीकार करें, आचमन हेतु जल स्वीकार करें। जल के छींटे दें। स्नान हेतु जल स्वीकार करें। जल के छींटे दें। वस्त्र स्वीकार करें। फिर मौली चढ़ाएँ। गन्ध स्वीकार करें। रोली चढ़ाएँ। अक्षत स्वीकार करें। चावल चढ़ाएँ। पुष्प स्वीकार करें। पुष्प चढ़ाएँ। धूप स्वीकार करें। धूप करें। दीपक का दर्शन करें। दीपक दिखाएँ। मिष्ठान स्वीकार करें। प्रसाद चढ़ाएँ। आचमन हेतु जल स्वीकार करें। कहकर जल के छींटे दें। नागरपान स्वीकार करें। पान सुपारी चढ़ाएँ। दक्षिणा स्वीकार करें। कहते हुए नकदी चढ़ाएँ। ऋतुफल स्वीकार करें। ऋतुफल चढ़ाएँ। नमस्कार स्वीकार करें। नमस्कार करें। करबद्ध होकर गणेशजी को निम्नलिखित मंत्र नमस्कार करें:

विघ्नहरण मंगलकरण, गौरीसुत गणराज।
मैं लियो आसरो आपको पूरण करजो काज।।

षोडशमातृका, नवग्रह एवं कलश पूजन करें।
महालक्ष्मी पूजन - लक्ष्मी पूजन करने के लिए पूर्व स्थापित लक्ष्मीजी की तस्वीर के पास चाँदी की कटोरी में या अन्य बर्तन में चाँदी के सिक्के या प्रचलित रूपये के सिक्कों को कच्चे दूध एवं पंचामृत से स्नान कराएँ फिर शुद्ध स्नान कराके लक्ष्मीजी के पास स्थापित करें। फिर पुष्प एवं चावल दाहिने हाथ में लेकर महालक्ष्मी का आहवान निम्न उच्चारण करते हुए करें तथा नमस्कार करें:

जय जग जननी जय रमा, विष्णु प्रिया जगदम्ब। बेग पधारो गेह मम, करो न मातु विलम्ब।।
पाट बिराजो गेह मम, भरो अखंड भण्डार। भक्ति सिहित पूजन करूं, करो मातु स्वीकार।।
मातु लक्ष्मी करो कृपा, करो ह्रिदय में वास। मनोकामना सिद्ध करो कृपा, पुरवहु मेरी आस।।
यही मोरि अरदास, हाथजोड़ विनति करूं। सबविधि करौं सुवास, जय जननि जगदंबिका।।
सब देवन के देव जो हे विष्णु महाराज। हो उनकी अर्धांगिनी, हे महालक्ष्मी आप।।
मैं गरीब अरजी धरूं, चरण शरण में माय। जो जन तुझको पूजता सकल मनोरथ पाय।।

फिर दोनों हाथ से पुष्प एवं चावल लक्ष्मीजी के पास छोड़ें ओर तीन बार जल के छींटे दें और उच्चारण करें। पाधं, अघ्यन, आचमनीयं स्नानं समर्पयामि। उसके पश्चात दुग्ध स्नानं समर्पयामि कहते हुए दूध से छींटे दें। स्नान हेतु पंचामृत स्वीकार करें। कहते हुए पंचामृत के छींटे दें, स्नान हेतु शुद्ध जल स्वीकार करें, कहते हुए जल के छींटे दें। गंध स्वीकार करें, कहते हुए मौली चढ़ाएँ। गंध स्वीकार करें, कहते हुए रोली चढ़ाएँ। अक्षत स्वीकार करें, कहते हुए चावल चढ़ाएँ। पुष्प स्वीकार करें, कहते हुए पुष्प चढ़ाएँ। धूप स्वीकार करें, कहते हुए धूप करें। दीपज्योति का दर्शन करें, कहते हुए दीपक दिखाएँ। मिष्ठान स्वीकार करें, कहते हुए प्रसाद या गुड़ चढ़ाएँ। आचमन हेतु जल स्वीकार करें, कहते हुए जल के छींटे दें। मुख शुद्धि हेतु पान स्वीकार करें, कहते हुए पान-सुपारी चढ़ाएँ। ऋतुफल स्वीकार करें, कहते हुए ऋतुफल चढ़ाएँ। दक्षिणा स्वीकार करें, कहते हुए नकदी चढ़ाएँ। अब हाथ जोड़कर नमस्कार करते हुए उच्चारण करें, विष्णुप्रिया सागर सुता जन जीवन आधार। गेह वास मेरे करो नमस्कार शत बार।। इसके पश्चात श्रीसूक्त का पाठ अपनी श्रद्धानुसार करें। ग्रह नक्षत्रम सिविल लाइन्स एन पी आर्केड के ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय बताते हैं कि पाठ के उपरांत श्री गणेश एवं लक्ष्मी जी से अपनी इचिछत मनोकामना पूर्ण करने का आशीर्वाद मांगें, कमलगटटे से लक्ष्मी मंत्रों द्वारा हवन करें, घर में सुख-समृद्धि का वास होगा।

 

 

 

 

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