Sunday, February 25, 2018
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shashi

पूरा हफ्ता बीत जाता है छुट्टी के दिन का इंतजार करते और जब छुट्टी का दिन आता है तो मन और भी आतंकित हो जाता है। पूरा दिन एक ऊब और बेचैनी के साथ कैसे कटेगा - सोचते ही मन और भी झल्ला उठता है। छुट्टी के दिन की दिनचर्या भी अजीब होती है।

कहानी

hajari

पता नहीं किसने इस पेड़ का नाम देवदारु रख दिया था, नाम निश्चय ही पुराना है, कालिदास से भी पुराना, महाभारत से भी पुराना। सीधे ऊपर की ओर उठता है, इतना ऊपर कि पासवाली चोटी के भी ऊपर उठ जाता है, एकदम द्युलोक को भेद करने की लालसा से।

निबंध

letter

अजी संपादकजी महाराज,

जय रामजी की!

कहिए, देश के लीडरों की आजकल कैसी कट रही है, इसका भी कुछ पता है? कोई आंदोलन न होने के कारण बेचारे बैठे-बैठे जंग खाए जा रहे हैं। क्‍या करें, कोई काम ही नहीं।

व्यंग्य

jaishankar

कार्निवल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी। हँसी और विनोद का कलनाद गूँज रहा था। मैं खड़ा था उस छोटे फुहारे के पास, जहाँ एक लड़का चुपचाप शराब पीनेवालों को देख रहा था।

बाल साहित्य

pande

1

लड़कपन से लेकर बी.ए. पास हो लेने तक, आठ वर्ष की अज्ञान अवस्‍था से तेईस वर्ष की अपरिपक्‍व अवस्‍था तक वे दोनों अभिन्‍न मित्र रहे। दोनों तीव्र भी थे, दोनों 'देश के चमकते हुए सितारे' थे।

व्यंग्य

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