Thursday, November 23, 2017


वर्षा ऋतु की अंतिम नक्षत्र है उत्तराफाल्गुनी। हमारे जीवन में गदह-पचीसी सावन-मनभावन है, बड़ी मौज रहती है, परंतु सत्ताइसवें के आते-आते घनघोर भाद्रपद के अशनि-संकेत मिलने लगते हैं और तीसी के वर्षों में हम विद्युन्मय भाद्रपद के काम, क्रोध और मोह का तमिस्त्र सुख भोगते हैं। इसी काल में अपने-अपने स्वभाव के अनुसार हमारी सिसृक्षा कृतार्थ होती है।

निबंध


रद्दी तो रद्दी है, जो रद्दी में डालने की चीज है, लेकिन अपने देश में मामला अलग है। यहाँ रद्दी की इतनी इज्जत है कि लोग अंग्रेजी अखबारों को महज इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि इनकी रद्दी हिंदी पेपरों के मुकाबले महँगी बिकती है।

व्यंग्य


नाव चली जा रही थी।
मँझदार में नाविक ने कहा, 'नाव में बोझ ज्यादा है, कोई एक आदमी कम हो जाए तो अच्छा, नहीं तो नाव डूब जाएगी।'

लघुकथाएँ



'The child is the father of a man.'
                            - William Wordsworth

तेईस साल के उस युवक की बातें एक साथ सैकड़ों बरछे की तरह उनके सीने में चुभ गईं थीं। वे इतने असंयत कभी नहीं हुए थे - जैसे सिनेमा की रील घूमकर अचानक बहुत जमाने पहले के समय में चली गई हो - समय का सीना चीरते हुए - कि समय की सिली पर कोई बेदर्द आरामशीन चला दी गई हो।

कहानी


अपनी कहानी चिट्ठी से मुझे गहरा लगाव है और गहरी विरक्ति। पहले विरक्ति के बारे में। इस कहानी को लिखे हुए 25 बरस हो रहे हैं और इस बीच मैंने इसकी उपेक्षा करने, इसे थोड़ा पीछे धकेल देने के पर्याप्त जतन किए लेकिन उसके बावजूद यह चुनौती देती हुई मेरे सामने है।

निबंध

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