Wednesday, November 22, 2017
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प्रभात की पुस्तक "कुम्भ एक फोटोग्राफर की डायरी"का विमोचन 

प्रख्यात छायाकार और पत्रकार तथा वर्तमान में अमर उजाला गोरखपुर संस्करण के संपादक प्रभात की पुस्तक "कुम्भ एक फोटोग्राफर की डायरी" का विमोचन दृश्यकला विभाग इलाहबाद विश्वविद्यालय के के एन मजुमदार सभागार में सोमवार को हुआ।विमोचन प्रोफ़ेसर शम्शुर्रह्मान फारुकी और प्रख्यात समालोचक प्रोफ़ेसर राजेंद्र कुमार ने किया।प्रभात की यह पुस्तक या साहित्यकारों की भाषा में कह लें की "डायरी" का महत्त्व सिर्फ इसलिए नहीं है कि इसमें कुम्भ का आँखों देखा हाल है,अपितु इसलिए अधिक है कि कुम्भ को "कवर" करनेवाले पत्रकारों के लिए इसमें एक नयी दृष्टि है।वैसे भी, कोई भी रचना के पीछे लेखक की एक अन्तरदृष्टि होती है।प्रभात ने भी कुम्भ को एक नयी दृष्टि से देखने का प्रयत्न किया है।हलाकि आमतौर पर पत्रकार कुम्भ में सिर्फ अव्यवस्था और आंकड़ों की तलाश करते चलते हैं।

प्रोफ़ेसर राजेन्द्र कुमार ने कहा कि शब्दों में भी तस्वीरें खींची जा सकती हईसका एहसास प्रभात नें अपनी पुस्तक में बखूबी कराया है।यह गद्य में लिखा गया एक मुक्तक है,जिससे आख्यान बनता है।उन्होंने कहा कि एक फोटोग्राफर का सीधा वास्ता परलोक से नहीं बल्कि इस वास्तविक दुनियां से होता है।प्रभात ने इस पुस्तक में न सिर्फ दुनियां के इस सबसे बड़े मेले का आँखों देखा हाल प्रस्तुत किया है,बल्कि इस मेले के ऐतिहासिक महत्त्व को भी प्रतिपादित किया है।प्रोफ़ेसर फारुकी ने पुस्तक में इस्तेमाल डॉ अजय जैतली के रेखांकनों की जमकर तारीफ की,किन्तु उन रेखांकनों के नीचे उनके नाम न छापे जाने के लिए प्रकाशक की आलोचना भी की।उन्होंने कहा की कुम्भ इतने बड़े मुल्क का एक प्रतीक है।

कवी और पत्रकार अजामिल ने कहा कियह पुस्तक कुम्भ के सच्चे एहसास की तस्वीर है।किसी चीज के प्रति सजगता उसकी मौलिकता को सामने ला देती है इस डायरी में प्रभात ने साधारण सी बातों में असाधारण की खोज की है।

हिंदी वभाग के डॉ सूर्यनारायण ने समारोह का सञ्चालन किया ,जबकि रंगकर्मी प्रवीण ने धन्यवाद ।द्र्श्यकला विभाग के अध्यक्ष डॉ अजय जैतली ने अतिथियों का स्वागत किया।इस दौरान दैनिक जागरण के संपादक अवधेश गुप्त,वरिष्ठ पत्रकार हरिशंकर मिश्र।अखिलेश मिश्र,अमरीश शुक्ल,रणविजय सत्यकेतु,मूर्तिकार संजय व् प्रोफ़ेसर अनीता गोपेश आदि उपस्थित थे।

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