Sunday, November 19, 2017
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shankara charya

इलाहाबाद। महाकुंभ मेला प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के बीच चतुष्पथ को लेकर बात बनते-बनते बिगड़ गई। चतुष्पथ को लेकर सहमति की खबरें फैलने के बाद अचानक अखाड़ों ने अपना मोर्चा खोल दिया। अखाड़ों ने एलान कर दिया कि यदि चतुष्पथ बना तो संत शाही स्नान का बहिष्कार करेंगे।


वहीं दूसरी तरफ शंकराचार्य भी अपनी मांग पर अडिग हैं। शंकराचार्य स्परूपानंद सरस्वती ने रविवार को मनकामेश्वर मंदिर में जनसभा की। शंकराचार्य ने साफ शब्दों में कहा कि चतुष्पथ से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है और मेलाधिकारी अखाड़ों की आड़ में अपनी गलती छुपाने में लगें है।

शंकराचार्य ने कहा कि मेलाधिकारी ने उनसे प्रस्ताव पर विचार के लिए समय मांगा था लेकिन शुक्रवार को जिस तरह अखाड़ों की बैठक के बाद मेलाधिकारी ने अपना बयान दिया उससे साफ जाहिर होता है कि यह उनकी मिली भगत है। इसके साथ ही उन्होंने शंकर चतुष्पथ की स्थापना के लिए अखाड़ों की आपतित पर आश्चर्य व्यक्त किया। उनका कथन था कि यह समझ से परे है कि जिन संन्यासी अखाड़ों में हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में चतुष्पथ की स्थापना की है तथ उन्हें स्थाई रूप दिया है उन्हें प्रयाग में चतुष्पथ की स्थापना करने में क्या परेशानी हो रही है। 

शंकराचार्य स्वरूपानंद ने कहा कि मां गंगा, संगम और प्रयाग के बहिष्कार का कोई प्रश्न ही नहीं उठता हां, इस मेले से उन्हें अरुचि जरूर हुई है क्योंकि जिस धार्मिक मेले में शंकराचार्यों के प्रस्ताव को कोई महत्व न दिया जा रहा हो तथा इतना विवाद हो रहा हो उसका आध्यातिमकता से क्या वास्ता रह जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि अखाड़ों का यह कहना कि हम मेला बिगाड़ रहें है सर्वथा अनुचित है। अखाड़े सुख से स्नान करें हमें कोई आपतित नही हम यहां से चले जाएंगे। 

विश्व सनातन धर्म परिषद ने कुंभ मेले में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती को जमीन न दिए जाने पर आक्रोश जताया है। इस संदर्भ में परिषद की ओर से धर्म जागरण संगोष्ठी में मेला के वर्तमान परिदृश्य पर चर्चा की गई।

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