Sunday, November 19, 2017
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makar sankranti shopping
इलाहाबाद। मकर संक्रांति भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। इस त्यौहार का सम्बंध प्रकृति, मौसम के परिवर्तन और कृषि से है, यह तीनों चीजे ही जीवन में प्रकृति का आधार है। प्रकृति के कारक के तौर पर इस पर्व पर सूर्य देव की पूजा की जाती है। इस दिन दान का भी विशेष महत्व है।

मकर संक्रांति से एक दिन पहले रविवार होने से बाजारों में काफी रौनक रही। लोग दान देने और खाने के लिए दिन भर खरीदारी करते रहे। कुंभ मेला क्षेत्र में भी लोगों ने दान देने वाली वस्तुएं खरीदी। इस त्यौहार को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। और खिचड़ी के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा है। कई स्थानों पर इस पतंगबाजी की प्रतियोगिता होती है। चौक समेत कई बाजारों की दुकानों पर पतंगों की दुकान भी खूब रौशन रही। रंग बिरंगी पतंगों और लटाई मांझा खरीदने के लिए बच्चों से लेकर बड़े भी काफी उत्साहित रहे।

मकर संक्रांति में सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में आने का स्वागत किया जाता है। शिशिर ऋतु की विदाई और बसंत का अभिवादन तथा अगहनी फसल के कट कर घर में आने का उत्सव मनाया जाता है। उत्सव के आयोजन का आयोजन होने पर सबसे पहले खान-पान की चर्चा होती है। संक्रांति पर्व देश भर में अलग-अलग तरीके से और नाम से बनाया जाता है। मकर संक्रांति पर लोग अलग-अलग रूपों में तिल, चावल उड़द की दाल एवं गुड़ का सेवन करते है। इन सभी सामगि्रयों में सबसे ज्यादा महत्व तिल को दिया गया है। इस दिन किसी न किसी रूप में तिल खाने का रिवाज है। तिल के महत्व के कारण मकर संक्रांति पर्व को तिल संक्रांति नाम से भी जाना जाता है। तिल पौषिटक होने के साथ ही शरीर को गर्म रखने वाला पदार्थ है।

मकर संक्रांति के खान-पान को धार्मिक और वैज्ञानिक आघार
मकर संक्रांति में ठंड अपने चरम पर होती है। इस लिए शरीर को गर्म रखने के लिए तिल चावल उड़द की दाल और गुड़ का सेवन किया जाता है। मकर संक्रांति में इन खाध पदार्थो का धार्मिक आधार भी है। शास्त्रों में लिखा है कि संक्राति पर तिल का दान और सेवन करने से पुण्य अर्जित होता है। मकर संक्रांति में सूर्य देवता धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर राशि के स्वामी शनि देव है। सूर्य की उपसिथति में शनि के कोप से बचने के लिए तिल का दान व सेवन किया जाता है। चावल और गुड़ और उड़द खाने का धार्मिक आधार यह है इस समय यह फसले तैयार होकर घर में आती हैं तथा इन फसलों को सूर्य देवता को अर्पित करके उन्हें धन्यवाद दिया जाता है।

 

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