Wednesday, November 22, 2017
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shahi snan
महा कुंभ का दूसरा शाही स्नान और मुख्य स्नान पर्व मौनी अमावस्या 10 फरवरी रविवार को है। सनातन धर्म की मान्यता है -इस शुभ अवसर पर विशिष्ट मुहुर्त में संगम स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है।


प्रशासन का अनुमान है कि मौनी अमावस्या पर तीन करोड़ लोग डुबकी लगाएंगे। अनेक शंकराचार्य ,महामंडलेश्वर ,संत-महात्मा ,नागा साधू ,कल्पवासी तो मेला क्षेत्र में ही हैं।

इलाहाबाद के बाहर से केवल इस स्नान पर्व के लिए ही लाखों लोगों के आने का अनुमान है। वैसे बाहर से भीड़ का आना तो प्रारंभ हो चुका है ऐसा रेलवे का दावा है। 
विेदेशी श्रद्धालू भी मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान से स्वयं को वंचित रखना नहीं चाहते। इसलिए विदेशी श्रद्धालू भी इस महास्नान के लिए आ रहे हैं। अनेक विदेशी श्रद्धालू तो कुभ के प्रारंभ से ही मेला क्षेत्र में रह रहे हैं।

अखाड़ों की तैयारी-
इस शाही स्नान पर्व के लिए अखाड़े भी तैयार हो रहे हैं। अखाड़ों के देवता और आचार्य महामंडलेश्वर की अगुवाई में संत महंत स्नान करेंगे। अखाड़ों के शाही जुलूस के लिए एक लेन के अखाड़ा मार्ग को डबल लेन बनाया जा रहा है। कल के स्नान पर्व से पहले अखाड़ा मार्ग चौड़ा हो जाएगा।

शाही जुलूस-
शाही जुलूस में सबसे आगे नागा और निर्वाण नागा चलेंगे। इस कुंभ में बनाए गए नए महामंडलेश्वर भी शाही जुलूस में शामिल होंगे लेकिन वे वरिष्ठ महामंडलेश्वरों से पीछे रहेंगे। इस कुंभ में बने नए नागा भी शाही जुलूस में शामिल होंगे ।वैसे तो सभी नागा शाही जुलूस में पहले चलेंगे पर नए बने नागा वरिष्ठ नागाओं के पीछे होंगे।

शाही स्नान-
शाही स्नान में सबसे आगे अटल अखाड़ा के साथ पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ,आनंद अखाड़ा के साथ पंचायती अखाड़ा निरंजनी , जूना अखाड़े के साथ आवाहन अखाड़ा ,अगिन अखाड़ा ,दसनामी सन्यासिनी अखाड़ा एवं अलख दरबार के संत।वैष्णव अखाड़ों में सबसे आगे निर्मोही अनि ,बीच में दिगंबर ,फिर निर्वाणी अनि के साथ साधू संत होंगे। तीसरे चरण में नया उदासीन ,बड़ा उदासीन और अंत में निर्मल अखाड़े के साधू संत होंगे। मौनी अमावस्या के शाही स्नान में अखाड़ों का क्रम यही रहेगा। प्रत्येक अखाड़े को स्नान के लिए 40 मिनट का समय मिलता है। जूना अखाड़े के एक पदाधिकारी के अनुसार अखाड़ा चाहे जितना भी बड़ा हो स्नान के लिए केवल 40 मिनट का ही समय मिलता है। अखाड़े को 40 मिनट के पश्चात घाट खाली कर देना पड़ता है। इसके बाद 20 मिनट तक घाट की सफाई होती है। उसके बाद ही दूसरा अखाड़ा स्नान के लिए घाट पर आता है।

डुबकी लगाने वाले शंकराचार्य एवं मुख्य संत-

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ,शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ,शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ,शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती , शंकराचार्य अधोक्षजानंद देवतीर्थ , शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ,शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम , जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी , स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनीजी , महामंडलेश्वर स्वामी महेश्वरानंद ,महामंडलेश्वर दाती जी , योगगुरू बाबा राम देव , संत आसाराम बापू , पंडित देव प्रभाकर शास्त्री ' दददा जी ,स्वामी नित्यानंद इत्यादि।

इलाहाबाद जंक्शन की व्यवस्था-
उत्तर मध्य रेलवे के द्वारा मुख्य स्नान पर्व को देखते हुए जंक्शन पर याति्रयों के नियंत्रण के लिए बनाए गए रूट प्लान के अनुसार प्लेटफार्म चार से दस तक जाने के लिए संख्या एक नया पैदल उपरी पुल खुला रहेगा। पुल संख्या दो सामान्य जनता के लिए बंद रहेगा ,यह पुल स्टेशन परिसर से प्रारंभ होता है। इस पुल का प्रयोग प्लेटफार्म एक से दस तक जाने के लिए केवल मेला यात्री कर सकेंगे।

मौनी अमावस्या पर बस सेवा-
जेएनएनयूआरएम शटल सिटी बस बांध तक ही जाएगी। रूट अगले तीन दिनों के लिए निर्धारित किया गया है। स्नान के लिए दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्नान पर्व पर बादशाहपुर ,फूलपुर से बस चलाया जाएगा। मलाक हरहर से बसें लखनउ और प्रतापगढ़ मार्ग के स्नानार्थिओं के लिए फाफामउ होते हुए संगम पेट्रोल पंप तक आएगी और जार्ज टाउन होते हुए वापस जाएगी।

9 से 11फरवरी तक बसों की रूटें-
लखनउ रूट पर - मलाक हरहर से बालसन चौराहा।
कानपुर रूट पर - ट्रांसपोर्ट नगर से मेडिकल कालेज चौराहा।
शहर में - जंक्शन सिटी साइड से मेडिकल कालेज चौराहा। कुंभ मेले में प्रदेश के प्रत्येक जिले से बस आएगी । कुल बसों की संख्या छह: हजार होगी। बस और ट्रक जैसे बडे वाहनों के मेला क्षेत्र में प्रवेश पर 8 फरवरी से रोक लगा दी गई है। प्रशासन के अनुसार शनिवार 9 फरवरी दोपहर बारह बजे से मेला क्षेत्र में सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश बंद है।

इलाहाबाद में मौनी अमावस्या और बसंत पंचमी के शाही स्नान के अवसर पर इंटरमीडिएट तक के सभी स्कूल बंद रहेंगे। शहर में भी अनेक सड़कों पर वाहनों का आवागमन बंद रहेगा। जो सड़कें खुली होती हैं शहर की पूरी भीड़ को उसी तरफ डाइवर्ट कर दिया जाता है इसलिए इस दौरान जाम भी खूब लगता है। प्रशासन इस समय इंटर तक के स्कूल और सरकारी कार्यालय बंद करवा देती है लेकिन बाकी लोगों को तो जाना ही पड़ता है। सब लोग तो घर पर नहीं बैठ सकते। परंतु इलाहाबादवासियों के लिए यह गर्व की बात है कि ति्रवेणी संगम सिर्फ यहीं पर है और यहां लगने वाले कुंभ मेले का महत्व ही कुछ और है। जब से कुंभ हो रहा है मेले के दौरान इलाहाबाद के लोग हंसते हुए तरह तरह के समस्याओं को नजर अंदाज करते आए हैं। आगे भी जब तक दुनिया रहेगी तब तक कुंभ होगा और हम सब इलाहाबादवासी यूं ही हंसते हंसते सभी समस्याओं को नजर अंदाज करते हुए श्रद्धालुओं के पुण्य अर्जन में सहयोग करते रहेंगे।

 

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