Thursday, November 23, 2017
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swami-nityanand
लगभग 37 वर्षीय स्वामी नित्यानंद दक्षिण भारत के हैं। बंगलूरू से कुछ दूर बिदादी नामक स्थान पर उनका आश्रम है। उनके शिष्य कहते हैं कि लगभग 11 वर्ष की उम्र में उन्होने घर छोड़ दिया। देश का भ्रमण करते रहे। उनके अनुसार स्वामी जी की बहुत प्रखर बुद्धि के हं।

स्वामी नित्यानंद अपार पैसे के मालिक हैं। उनके ज्यादातर शिष्य विदेशी हैं। उनके द्वारा लिखी पुस्तकों में विदेश के बड़े बड़े डाक्टरों का रिर्पोट मिलता है जिन्होने उनका ब्रेन टेस्ट किया और उसे असाधारण करार दिया। डाक्टरों ने कहा कि ऐसा ब्रेन उन्होने पहले किसी का नहीं देखा। स्वामी जी हिंदी नहीं बोल सकते । दक्षिण भारतीय भाषा में बोलते हैं। ज्यादातर प्रवचन अंगेजी मे होते हैं क्योंकि उनके शिष्य ज्यादातर विदेशी हैं। यह तो रहा स्वामी जी का संक्षिप्त परिचय।

स्वामी नित्यानंद 2007 के अर्ध कुंभ में प्रयाग आए थे। उसके कुछ साल बाद अचानक ही एक दिन टीवी के सभी समाचार चैनेलों में स्वामी नित्यानंद और दक्षिण भारत की एक अभिनेत्री को आपतितजनक अवस्था में दिखाया जा गया। पता चला कि दक्षिण भारत के किसी टीवी चैनेल ने यह सीडी बनाई। स्वामी नित्यानंद ने कहा कि सीडी नकली है। दक्षिण की अभिनेत्री ने कहा कि वह तो अपनी मर्जी से स्वामी जी की सेवा करती है। बाद में जांच के दौरान सीडी असली पाई गई। एक महिला ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। इसी सिलसिले में मीडिया से बात चीत के दौरान स्वामीजी ने उनसे मारपीट की। उन पर आपराधिक मामले दर्ज हुए। पुलिस स्वामी जी की खोज करने लगी। लेकिन वह बिदादी के आश्रम में नहीं थे। वहां के आश्रम की सारी गतिविधियां रूक गई। 2010 में एक पहाड़ी स्थल पर पहाड़ों के बीच में स्वामी नित्यानंद को सैलानी नवयुवक की आधुनिक वेष भूषा में घूमते हुए पुलिस ने पकड़ लिया। स्वामी नित्यानंद सेक्स स्कैंडल वाले बाबा , सीडी वाले बाबा के नाम से विख्यात हो गये।

इस महाकुंभ में सेक्टर 7 में उनका भव्य पंडाल बना है। उनके आने की खबर से संत समाज में विरोध के स्वर फूटने लगे। उनके अनुसार साधू संत को संयमी होना चाहिए और नित्यानंद के बारे में तो सभी जानते हैं। संत समाज ने यह भी कहा कि अगर गंगा में स्नान करके वह पाप धोना चाहते हैं तो ठीक है लेकिन वह जब तक कुंभ क्षेत्र की पावन धरती पर रहेंगे तब तक उन्हें विलासिता की नहीं बलिक साधू संतों जैसा जीवन यापन करना पड़ेगा।

खैर फरवरी महीने में स्वामी नित्यानंद कुंभ आए । 10 फरवरी रविवार मौनी अमावस्या के शाही स्नान में वह महानिर्वाणी अखाड़े के साथ महामंडलेश्वर के तौर पर रथ पर सवार होकर शाही स्नान के लिए गए और स्नान किया। 
इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े ने उन्हें महामंडलेश्वर बना दिया और महाकुंभ में महासंग्राम प्रारंभ हो गया।

महामंडलेश्वर का पद बहुत गरिमामय होता है। किसी को जब महामंडलेश्वर बनाया जाता है तो भव्य अनुष्ठान होता है। सभी अखाड़ों के साधू संतों को निमंत्रण भेजा जाता है । मीडिया को बुलाया जाता है। सबके सामने उसका पटटाभिषेक होता है। चादर ओढ़ाकर उसे महामंडलेश्वर बनाया जाता है। परंतु स्वामी नित्यानंद कब महामंडलेश्वर बनें किसी को पता ही नहीं चला।

मंगलवार को महानिर्वाणी अखाड़े में शैलप्रकाशानंद का पटटाभिषेक चल रहा था। स्वामी नित्यानंद अपने शिष्यों के साथ वहां आए। शिष्य बाहर थे वह अखाड़े के अंदर गए और शैलप्रकाशानंद के बाद उनका भी पटटाभिषेक हो गया। चादर ओढ़ाकर उन्हें महामंडलेश्वर बना दिया गया।

उनके महामंडलेश्वर बनने की खबर जैसे ही फैली संत समाज गुस्से से उबलने लगा। संतों ने इस पर घोर आपतित दर्ज कराई। निरंजनी अखाड़े ने खुली बैठक की और कहा कि महानिर्वाणी अखाड़े को नित्यानंद के निर्दोष साबित होने तक इंतजार करना चाहिए था।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने कहा कि यह साधू संतों का अपमान है। उनके अनुसार , कैसे लोगों को साधू संतो के बीच में लाया जा रहा है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कहा है कि ऐसे आदमी को महामंडलेश्वर नहीं बनाया जाना चाहिए । जब विरोध तीव्र होने लगा तो महानिर्वाणी के महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि नित्यानंद पर जांच के बाद आरोप सिद्ध हुए तो पदवी वापस ले ली जाएगी।

जूना अखाड़े के सचिव महंत हरि गिरी ने उस मामले को महानिर्वाणी अखाडे़ का आंतरिक मामला बताते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। निरंजनी ने बुधवार को खुली बैठक की जिसमें काफी संख्या में साधू संत उपसिथत थे। महानिर्वाणी के इस कदम से लगभग सभी अखाड़े नाराज हैं। साधू संतों ने कहा प्रयाग की धरती पर नित्यानंद का पटटाभिषेक करके अखाड़े ने बहुत बड़ा अपराध किया है। महंत रवींद्र पुरी ने कहा जो गलत करेगा उसका विरोध हर स्तर पर होगा। महंत हरगोविंद पुरी ने कहा महामंडलेश्वर कोई रोज नहीं बनता है ,यह विशेष अवसर होता है , इसके लिए समारोह का आयोजन होता है।बैठक में महंत शंकरानंद , महंत लालता गिरी , दिगंबर गिरी ने कहा कि नित्यानंद का शाही स्नान में शामिल होना उचित नहीं है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने यह भी कहा कि महानिर्वाणी ने सनातन धर्म का अपमान किया है। संतो के बीच एक गलत व्यकित को ले आए हैं। महामंडलेश्वर परिषद के महामंत्री संगठन ने कहा कि आरोपी व्यकित को संत की पदवी नहीं दी जा सकती। महानिर्वाणी के सचिव महंत रवींद्र पुरी ने कहा कि नित्यानंद पर अभी सिर्फ आरोप लगे हैं। जांच चल रही है । न्यायालय में मामला लंबित है। आरोप सिद्ध हो जाएंगे तो उन्हें अखाड़े से बाहर कर दिया जाएगा। यदि इस बीच उनके आचरण में गड़बड़ी मिली तो भी उन्हें बहिष्कृत कर दिया जाएगा।
बैठक में तो नहीं पर बाद में नरेंद्र गिरी ने कहा कि नित्यानंद इस पद के अनुकूल नहीं हैं।निरंजनी अखाड़े के प्रभारी ने कहा कि नित्यानंद के पास बहुत दौलत है। नित्यानंद ने पैसे देकर उस पद को खरीदा है । उन्हें पैंट शर्ट पहनकर नृत्य करना चाहिए। उनके अनुसार महामंडलेश्वर का पद पैसे देकर खरीदा जा सकता है। इतने विरोध के बीच स्वामी नित्यानंद या महामंडलेश्वर नित्यानंद कहें ने बसंत पंचमी के शाही स्नान में हिस्सा नहीं लिया।

यह विवाद थमने वाला नहीं है। महानिर्वाणी भी जांच खत्म होने से पहले उन्हें इस पद से हटाने के मूड में नहीं लग रहा है। ऐसे में तो यही लग रहा है कि कुंभ के बचे हुए दिन काफी गर्मागर्मी में बीतेंगे।

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