Sunday, November 19, 2017
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प्रयाग महाकुंभ के आखिरी शाही स्नान में लगभग सत्तर लाख लोगों ने डुबकी लगाई। संगम में देशी विदेशी स्नानार्थी थे। आज यहां काफी संख्या में युवक युवतियों ने डुबकी लगाई। साधू ,संत, अखाड़े , श्रद्धालुओं के बीच युवाओं के स्नान पर्व में शामिल होने से आस्था और आधुनिकता का मेल होता दिखा।

गुरूवार रात से ही संगम तट पर बसंत पंचमी का स्नान प्रारंभ हो गया था। भोर होते होते लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगा ली थी। शाही स्नान सुबह छ: बजे प्रारंभ हुआ। लेकिन मौनी अमावस्या पर हुए हादसे की वजह से शाही स्नान फीका नजर आया। साधू संतों ने यह शाही स्नान सादगी के साथ किया। 

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पूर्व निर्धारित कार्याक्रम के अनुसार सबसे पहले महानिर्वाणी अखाडा़ ,अटल अखाड़े के साथ सुबह सवा पांच बजे शिविर से निकलकर सवा छ: बजे संगम पहुंचा। महानिर्वाणी अखाड़ा पैदल ही स्नान को पहुंचा। सबसे पहले महानिर्वाणी के संतों ने संगम में डुबकी लगाई।

इसके बाद आनंद के साथ पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी और जूना के साथ आवाहन ,अगिन और दशनाम सन्यासिनी अखाड़ा तथा अलख दरबार के संतों ने स्नान किया। जूना अखाड़ा बिना बैंड बाजे के शाही स्नान में शामिल हुआ। इसके बाद अखाड़ों के महामंडलेश्वर ,महंत ,श्री महंतों ने मौनी अमावस्या पर हुए हादसे में मृत लोगों का तर्पण भी किया। नए बने महामंडलेश्वरों और सन्यासिनियों ने भी डुबकी लगाई। 

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मेलाधिकारी मणि प्रसाद मिश्र ने बताया श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 22 घाट बनाए गये है। सब घाटों को मिलाकर लगभग 18,000 फिट लंबी जगह स्नान के लिए उपलब्ध है।

मेले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आर के एस राठौर ने दावा किया कि अंतिम शाही स्नान में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि शाही स्नान के दिन कोई भी वीवीआईपी स्नान के लिए न आए और शाही स्नान के दिन घाट तक कोई भी गाड़ी न जा पाए। लेकिन आज सुबह बीएसएफ के डीजी सुभाष जोशी परिवार सहित गाड़ी में बैठकर स्नान करने वी आई पी घाट पहुंचे। घाट पर जवानों ने गाड़ी को घेर लिया और डिकी से उनके बैग निकालकर जवानों ने ही संभाला। जल पुलिस तुरंत डीजी और उनके परिवार को नाव से स्नान करवाने ले गया। डीजी की उस वक्त मेला क्षेत्र में डयूटी नहीं थी। मेला के पुलिस अधीक्षक राठौर यह कहते सुने गये कि डीजी अपने जवानों की हौसला अफजाई के लिए आए थे।मेला प्रभारी आजम खान को घटना की जानकारी होते ही जांच के आदेश दे दिये। 

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अंतिम शाही स्नान सकुशल बिना किसी हादसे के निपट गया। लेकिन हादसे की छाया शाही स्नान पर देखा गया। साधूओं ने भी सादगी से शाही स्नान में हिस्सा लिया। नए महामंडलेश्वर बने स्वामी नित्यानंद ने विरोध के चलते शाही स्नान में भाग नहीं लिया।

 

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