Friday, November 17, 2017
User Rating: / 0
PoorBest 

kumbh ram bank
जहां मुद्रा का नहीं, श्रद्धा का संचय होता है प्रेम की पूंजी और अध्यात्म का ब्याज से होता है कल्याण
कुम्भ माघी पूर्णिमा पर कल्पवासी राम भक्त होंगे सम्मानित

संगम क्षेत्र पर सवा लाख राम नाम कुम्भ के दौरान पूर्ण करने वालों को किया जाएगा अंगवस्त्रम, श्रीफल एवं प्रशसित पत्र द्वारा सम्मानित

कुम्भ नगरी, सैक्टर 6, कैलाशपुरी मार्ग पर सिथत राम नाम बैंक देश-विदेश से आए हुए श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। संगम स्नान करने के बाद श्रद्धालु यहां बैठकर भगवान राम का नाम लिखते हैं तथा लोक के साथ परलोक संवारने वाला खाता खुलवाकर प्रस्थान करते हैं। तम्बुओं के बने राम नाम बैंक में रूपए-पैसों का नहीं बलिक भगवान राम के नाम का लेन-देन होता है मगर अन्य सभी प्रकि्रया सामान्य बैंक जैसी है। अन्य बैंकों की तरह यहां पर श्रद्धालुओं को खाता संख्या प्रदान की जाती है और जब व्यकित राम नाम लिखकर समय-समय पर यहां पर जमा करता है तो यहां से जारी की गई पासबुक में राम नाम संख्या हर बार अंकित कर दी जाती है। अन्य बैंकों की तरह यहां पर कई काउन्टर बने हुए हैं, एक काउन्टर पर नि:शुल्क राम नाम पुसितकाओं का वितरण होता है, तो दूसरे पर राम नाम धन जमा होता है, किसी काउन्टर पर अनेक श्रद्धालुओं को राम नाम खाते सम्बनिधत जानकारी एवं सहायता लेते देखा जा सकता है, तो किसी पर बैलेंस पूछताछ की सुविधा है। इस बैंक के खजाने कोश में धन की जगह श्रद्धालुओं द्वारा लिखा गया लगभग साढ़े तीन करोड़ राम धन सुरक्षित है जिसकी परिक्रमा संगम के अक्षय क्षेत्र पर श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए करते हैं। पचपन दिन के कुम्भ मेले में मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक काफी अधिक संख्या में श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर राम नाम लिखकर जमा किया है। माघी पूर्णिमा के पावन पर्व पर बालसंत सक्षम, समर्थ, कृति के साथ प्रियंका, सत्यप्रिय एवं कन्हैयालाल अग्रवाल संगम तट पर अन्य राम भक्तों के उत्साह वद्र्धन हेतु उपलब्ध रहेंगे और राम नाम की महिमा बखारेंगे। राम सेवा टस्ट की गुंजन वाष्र्णेय बताती हैं कि कुम्भ के दौरान अब तक लगभग दस हजार नि:शुल्क राम नाम पुसितका वितरित की चुकी हैं। देश-विदेश से आए हुए श्रद्धालुओं ने संगम की रेत पर विभिन्न भाषाओं में राम नाम लिखकर जमा किया है, तमाम लोग हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, बंगला, तेलुगु, संस्कृत में भी राम नाम लेखन कर रहे हैं। संगम अक्षय क्षेत्र है, यहां पर किया गया पुण्य कर्म का फल जन्म-जन्मान्तर तक अक्षय रहता है। अक्षय क्षेत्र में राम नाम लिखने वालों की मनोकामनाएं पूर्ण हुईं हैं। होमगार्ड के पद पर तैनात ग्राम भीटी, जनपद मिर्जापुर के हरिनारायण बताते हैं कि कुम्भ के प्रथम दिन से वे राम नाम बैंक से जुड़कर नित्य संगम के अक्षय क्षेत्र पर राम नाम लिख रहे हैं, जिससे उन्हें विशेष लाभ हुआ। कुम्भ में बना प्रयाग का राम नाम बैंक एकमात्र ऐसा बैंक है जहां सभी समुदाय के लोग एकजुट होकर कौमी एकता के लिए राम नाम लिखते हैं। भक्तों की यहां मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भक्त राम नाम लिखकर यहां संग्रह करते हैं और अपना खाता खुलवाते हैं। राम नाम बैंक की यह विशेषता है कि प्रयाग का जो राम नाम बैंक है इसमें न केवल हिन्दु बलिक मुसलिम भाई, सिख भाई, ईसाई भाई, सभी धर्मों के खाते हैं और अपनी स्वेच्छा से मुसलमान भाई आते हैं, वो भी यहां राम नाम लिखते हैं और पूछने पर कहते हैं, चाहें राम कहो, चाहें रहीम कहो, अंदाजे बयां अलग हैं। भगवान या ईश्वर, अल्लाह, खुदा एक है। राम नाम बैंक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पर हर धर्म के खाते हैं और यहां पर सात वर्ष के बालक से लेके नब्बे-सौ वर्ष तक के वृद्ध हैं जो राम नाम लिखते हैं। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्र्णेय बताते हैं कि संस्था में बहुत सारे ऐसे बालक हैं छोटे-छोटे जो राम का मतलब नहीं जानते लेकिन लाल कलम से राम नाम लिखते हैं। यहां तक कि जेल के कैदियों को भी संस्थान ने पुस्तकें वितरित की थीं और वो सब भी राम का नाम लिखते हैं और कहते हैं कि जब वाल्मीकि राम का नाम लिखकर साधु हो गए तो हम लोग क्यों नहीं। राम नाम की महिमा बड़ी निराली है और संगम तट पर राम नाम पुस्तक नि:शुल्क वितरित करते हैं, उसी के साथ-साथ लाल कलम भी करी जाती है। संगम की रेत का राम नाम बैंक भले ही रेत पर हो, परन्तु खातेधारकों को अतिआधुनिक सुविधा प्रदान करता है, कागज की बचत के लिए श्रद्धालु कम्प्यूटर, लैपटाप पर राम नाम लिखकर पेनडाइव के माध्यम से अथवा ई-मेल द्वारा संस्थान में राम नाम डिजिटल रूप में जमा करते हैं। जीवन में कष्ट अथवा कोई इच्छा शेष हो, तो इच्छा पूर्ति अथवा कष्ट निवतितृ के लिए श्रद्धालु यहां से राम नाम का कर्ज लेते हैं और जब वे धीरे-धीरे राम नाम लिखकर कर्ज चुकाने लगते हैं तो उनकी इच्छाएं पूर्ण होने लगती हैं। माघी पूर्णिमा को राम बैंक का मेला लगेगा जिसमें सवा लाख पूर्ण करने वाले राम भक्तों को प्रशसित पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। लौकिक धन केवल इस लोक में जब तक व्यकित जीवित रहता है तब उसके काम आता है लेकिन राम नाम धन लोक-परलोक दोनों संवारता है इसलिए कहा जाता है, राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट, अंत काल पछताएगा, जब प्राण जाएंगे छूट।

Add comment

We welcome comments. No Jokes Please !

Security code
Refresh

Magh Mela 2014

Who's Online

We have 3534 guests online
 

Visits Counter

748452 since 1st march 2012