Sunday, November 19, 2017
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rakhi
हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा श्रावणी पूर्णिमा को राखी का त्यौहार पड़ता है। इस दिन हर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसे रक्षा का वचन देता है। राखी के काफी पहले से ही बाजारों में राखी की दुकानें सज जाती हं और हर बहन के मन की मुराद होती है कि बाजार की सबसे सुंदर राखी अपने भाई को बांधे।

महाकुंभ पर्व पर एक अनोखी राखी बनाई गई है। यह 25 स्क्वायरफीट की गोलाई में बनी है। पांच महीने के कठिन परिश्रम से यह पूरा किया हुआ। इसे हिंदू , मुसिलम , सिख , इसाई सभी धर्मों के महिलाओं और पुरूषों ने मिलकर बनाया है। लेकिन यह किसी भाई की कलाई पर नहीं सजेगी। इस राखी का मकसद मां गंगा की रक्षा करना है। इसमें हिदुओं के पूजा का स्थान मंदिर ,मुसलमानों के इबादत की जगह मसिजद ,सिखों के मत्था टेकने का स्थान गुरूद्वारा और इसाईयों के प्रेयर की जगह चर्च का चित्र लगा है। प्रत्येक समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर मां गंगा की रक्षा के लिए राखी बनाकर धार्मिक एकता की अनूठी मिसाल पेश की है। मां गंगा की रक्षा के लिए धार्मिक एकजुटता की अनोखी मिसाल कुंभ की धरती पर ही संभव है।

 

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