Sunday, November 19, 2017
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kumbh snanज्योतिष शास्त्र, ग्रह-नक्षत्रों के माध्यम से शुभाशुभ की गणना करता है, ग्रह नक्षत्रों के माध्यम से जीवन में अगर कुछ अशुभ घटित होने के संकेत प्राप्त होते हैं तो उसे महाशिवरात्रि जैसे पावन पर्व पर शिव उपासना, रूद्राभिषेक, महामृत्युंजय का जप द्वारा निशिचत ही कम किया जा सकता है।

10 मार्च को होने वाली महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ तीर्थराज प्रयाग के संगम क्षेत्र में आने की सम्भावना है। महाशिवरात्रि हिन्दुओं का परम पावन पर्व है, इस दिन भोलेशंकर की आराधना कर शिव भक्त हर हर गंगे के उदघोष के साथ गंगा, संगम स्नान करेंगे। वैसे तो माघ मास समाप्त होते ही अधिकांश श्रद्धालु अपने-अपने घरों को प्रस्थान कर चुके हैं, परंतु 144 वर्ष बाद जो कुम्भ के ग्रह योग बने हैं उसके कारण इस बार शिवरात्रि पर गंगा पूजन, स्नान-दान का विशेष महत्व रहेगा। ग्रहीय योग के चलते देवाधिदेव का पूजन करने वालों को आरोग्यता का वर मिलेगा। शिवत्व के अंकुश से शनि राहु जैसे अनिष्ट ग्रहों की पीड़ा शांति के लिए रूद्राभिषेक का विशेष महत्व है। शिवरात्रि पर स्नान-दान करने से अकाल मृत्यु का भय जाता रहता है, वृष राशि के बृहस्पति, उच्च तुला राशि के शनि सहित कुम्भ की विशेष सिथतियों के कारण ऐसा माना जा रहा है कि तीन महीने तक गंगा में स्नान करने का विशेष महत्व रहेगा। इस संयोग के कारण गंगा का जल कई सौ गुना पवित्र हो गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार भी कुम्भ और बृहस्पति के योग से धरती का जल पहले की अपेक्षा और ज्यादा साफ हो जाता है। भगवान शिव की जटाओं से निकली गंगा का तीर्थराज प्रयाग में संगम होता है, गंगा की लहरों के आंचल में ही भारतीय संस्कृति का विकास हुआ है इसलिए गंगा को शैव समुदाय जहां अपनी इष्ट देवी मानते हैं वहीं वैष्णवों के लिए यह विष्णुपदी के रूप में स्तुत्य है। ज्योतिष शास्त्र, ग्रह-नक्षत्रों के माध्यम से शुभाशुभ की गणना करता है। ग्रह नक्षत्रों के माध्यम से जीवन में अगर कुछ अशुभ घटित होने के संकेत प्राप्त होते हैं तो उसे दान-पुण्य, उपाय, जप-तप द्वारा निशिचत ही कम किया जा सकता है। इष्टकृपा, मनोबल और उचित अचूक उपाय एवं मन में श्रद्धा अशुभ फल को पूर्ण समाप्त भी कर देता है। ज्योतिष शास्त्र के प्रति श्रद्धा, मां त्रिवेणी के प्रति आस्था और कल्पवास के नियमों का कुम्भ के ग्रह योगों में दृढ़ रूप से पालन कर नित्य त्रिवेणी स्नान, शिव पूजन कर राम नाम लिखकर परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को असीमित लाभ प्राप्त होता है जिसकी पुषिट वैज्ञानिकों ने भी की है। शिवरात्रि पर किया गया व्रत, उपवास तथा शिव पूजन अनंत फलदायी होता है। अपनी राशि अनुसार भगवान शिव का पूजन कर सकते हैं :-

मेष राशि - गुड़ के जल से अभषिेक करें। लाल पेड़ा, लाल चंदन और कनेर के फूल चढ़ाऐं।
वृष राशि - दही से अभषिेक करें। शक्कर, चावल, श्वेत चंदन और सफेद फूल चढ़ाऐं।
मिथुन राशि - गन्ने के रस से शिव का अभषिेक करें। मूंग, दूब और कुशा चढ़ाऐं।
कर्क राशि - घी से अभषिेक करें। चावल, कच्चा दूध, श्वेत आर्क और शंख पुष्पी अर्पित करें।
सिंह राशि - गुड़ के जल से अभषिेक करें। गुड़ और चावल से बनी खीर का नैवेध, मदार के फूल अर्पित करें।
कन्या राशि - गन्ने के रस से अभषिेक करें। भांग, दूब, मूंग और पान अर्पण करें।
तुला राशि - सुगंधित तेल या इत्र से अभषिेक करें। दही, शहद, श्रीखंड का नैवेध और श्वेत फूल चढ़ाऐं।
वृशिचक राशि - पंचामृत से अभषिेक करें। लाल मिठाई एवं लाल पुष्प चढ़ाऐं।
धनु राशि - हल्दीयुक्त दूघ से अभषिेक करें। केसर, बेसन से बने मिष्ठान और गेंदे के फूल चढ़ाऐं।
मकर राशि - नारियल पानी से अभषिेक करें। उड़द से बने मिष्ठान और नीलकमल के फूल अर्पित करें।
कुम्भ राशि - तिल के तेल से अभषिेक करें। उड़द से बने मिष्ठान और शमी का फूल चढ़ाऐं।
मीन राशि - केसरयुक्त दूध से अभषिेक करें। दही-भात का नैवेध, पीली सरसों और नाग केसर अर्पित करें।

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