Friday, November 24, 2017
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science expo 1
1 फरवरी 2013, आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ में पाँच दिवसीय 5वें साईन्स एक्स्पो ''विज्ञान तकनीकी और नवीनता विषय पर एक लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान और वार्ता सत्र का आयोजन किया गया जिसमें डा0 विजय कुमार, वैज्ञानिक, सीपेट, डा0 निमिष कपूर, वरिष्ठ वैज्ञानिक, विज्ञान प्रसार, डा0 डी0के0श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक, विज्ञान एवं प्रौधोगिकी परिषद, उ0प्र0 और डा0 आर0डी0गौड़, वैज्ञानिक अधिकारी, विज्ञान एवं प्रौधोगिकी परिषद, उ0प्र0 ने विधार्थियों, शिक्षकों तथा आम जनता से वार्ता की तथा विधार्थियों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दिये।

इस अवसर पर नवीनता विषय पर बोलते हुए डा0 विजय कुमार ने कहा कि अलग दिशा में सोचने से नवीनता की उत्पतित होती है जिससे कार्य कुशलता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि प्रकृति भी एक उधोग की तरह है जो विभिन्न तरह के उत्पाद उत्पन्न करती है तथा सभी तरह के विकास की शुरूआत प्रकृति के अनुसरण से ही हुई। उन्होंने आगे कहा कि प्लासिटक जिसका उपयोग आज की जीवन शैली में हर जगह होता है नवीनता का ही परिणाम है जिससे कम भार के, स्थाई, शकितशाली और कुशल उत्पाद प्राप्त हुए। 

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डा0 निमिष कपूर ने कहा कि नवीनता का अर्थ नये विचार या तरीके को इस तरह प्रयुक्त करना है जिससे वह वर्तमान तरीके की तुलना में अधिक कुशल और किफायती हो सकें। उन्होंने विज्ञान प्रसार के क्रियाकलापों पर भी प्रकाश डाला जिसका उददेश्य वैज्ञानिक प्रवृतित और तार्किक सोच का प्रचार व प्रसार करना है जिससे अंधविश्वास को हटाकर समाज का त्वरित एवं स्थाई विकास सम्भव हो सके। उन्होंने नवीन तरीकों को लागू करने के लिए विज्ञान प्रसार द्वारा की जा रही विभिन्न गतिविधियों जैसे विज्ञान रेल, राष्ट्रीय विज्ञान फिल्मोत्सव, परमाणु ऊर्जा पर जन जागरूकता अभियान आदि का उल्लेख किया। उन्होंने भारत सरकार द्वारा घोषित विज्ञान पौधोगिकी एवं संरचना नीति 2013 के बारे में भी बताया जिसका उददेश्य विज्ञान पौधोगिकी एवं संरचना को राष्ट्रहित के लिए अपनाना है।

नवीनता के बारे में बोलते हुए डा0 डी0के0 श्रीवास्तव ने विधार्थियों से आग्रह किया कि वे कृषि के क्षेत्र में नवपरिवर्तन लाये जिससे कृषि जो भारत के विकास का आधार है उन्नत हो सके तथा देश की प्रगति में योगदान कर सके। उन्होंने जैवखेती का उदाहरण देते हुए बताया कि जैव खाद के उपयोग जैसे विचार को महत्व देना चाहिए।
डा0 आर0डी0गौड़ ने कहा कि वर्तमान की सभी तकनीकियाँ पूर्व में हुए नवीनीकरण का परिणाम है तथा आज के नव प्रवर्तन से भविष्य की प्रौधोगिकी विकसित हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि नवीनीकरण की कोई आयु नहीं होती है। उन्होंने कहा कि कृषियंत्रों, मशीनों, यातायात साधनों, हरबल औषधियों आदि के क्षेत्र में होने वाले नवीनीकरण से कृषि उत्पादकता बढ़ सकती है।

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आज के कार्यक्रम में विज्ञान, प्रौधोगिकी और नवीनता पर विज्ञान एवं प्रौधोगिक परिषद, उ0प्र0 के सहयोग से एक पावरप्वाइंट प्रेज़न्टेशन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया साथ ही खुली विज्ञान प्रश्नोत्तरी का भी आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न स्कूलों के लगभग 250 विधार्थियों ने भाग लिया। इसके साथ ही डा0पी0के0श्रीवास्तव, वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीडीआरआई ने ''विचार और नवीनता विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया जिसमें विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने अपनी विरासत से सीखने की आवश्यकता पर बल दिया जिसमें आज भी भविष्य के लिए उपयोगी विचार उपसिथत हं। इसके अतिरिक्त विज्ञान प्रसार के सहयोग से विज्ञान संचार कार्यशाला का आयोजन किया गया।

आंचलिक विज्ञान नगरी के परियोजना समायोजक श्री उमेश कुमार ने बताया कि एक्स्पो के चौथे दिन दिनांक 2.2.2013 को प्रात: 10:30 बजे ''जल संरक्षण एवं प्रबन्धन विषय पर एक लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान और वार्ता सत्र का आयोजन किया जायेगा। इसके अतिरिक्त ''जल हमारा जीवन विषय पर विज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जायेगा।

आज के कार्यक्रमों में विभिन्न संस्थानों, विधालयों एवं कालेजों के लगभग 500 विधार्थी, अध्यापक तथा वैज्ञानिक उपसिथत थे।

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